सतना जिले के बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग ने घर-घर फीवर सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए हैं। मेडिकल टीमें मरीजों की जांच करेंगी, जबकि कुओं और हैंडपंपों का क्लोरीनेशन कर संक्रमण रोकने प्रयास होगा।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
चित्रकूट में बाढ़ के बाद फीवर सर्वे का कार्य पूरा होने के बाद अब कोटर, बिरसिंहपुर, कोठी जैसे बाढ़ प्रभावित गांव में घर-घर फीवर सर्वे करने के निर्देश दिए गए हैं। सेमरावल नदी में आई बाढ़ के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा संक्रमण बीमारी और जलजनित बीमारियों की रोकथाम के लिए बाढ़ प्रभावित गांव में अपना मेडिकल सिस्टम सक्रिय कर दिया है। सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित गांवों की सूची तैयार की गई है।
रविवार को रामपुर बाघेलान ब्लाक अन्तर्गत आने वाले टेढ़गवां और बरदाडीह में मेडिकल कैम्प भी लगाया गया जहां कई मरीजों की जांच की गई। डॉ. मनोज शुक्ला द्वारा रामपुर बाघेलान के बीएमओ डॉ. राघवेन्द्र गुर्जर, डीसीएम डॉ. ज्ञानेश मिश्रा एवं बीसीएम को सर्वे कार्य से जुड़ी जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। सर्वे के साथ-साथ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हैंडपम्प और कुआें में क्लोरिनेशन करने के निर्देश दिए गए हैं। गौरतलब है कि चित्रकूट में शनिवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फीवर सर्वे का कार्य पूरा कर लिया गया है। शनिवार को 9 मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराई गई।
इन गांवों में जाएंगी टीमें
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार टीमें सोहास, रगौली, टिकरी, खम्हरिया, अकौना, मैनपुरा, इटौरा, किचवरिया, रेहुंटा, गढवा, खोहर, गजिगवां, टेड़गवां और बरदाडीह सहित प्रभावित गांवों में पहुंच कर लोगों के स्वास्थ्य की जांच करेंगी। सर्वे के दौरान बुखार से पीड़ित लोगों की पहचान के साथ-साथ अन्य बीमारियों की जानकारी लेकर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
टेढ़गवां और बरदाडीह पहुंची मेडिकल टीम
रविवार से ही फीवर सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया। स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम ने टैढ़गवां और बरदाडीह गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। कई मरीजों की जांच की गई,हालांकि मरीजों में कोई गंभीर लक्षण नहीं पाए गए। डीसीएम डॉ. ज्ञानेश मिश्रा ने बताया कि आशा सुपरवाईजरों को निर्देश दिए गए हैं कि सर्वे की लगातार मॉनीटरिंग करती रहें वहीं गर्भवतियों की सूची, बच्चों के टीकाकरण की जानकारी बनाकर जिला मुख्यालय भेजें। संबंधित क्षेत्र के बीसीएम, सेक्टर मेडिकल आफीसर, सेक्टर सुपरवाइजर एवं अन्य फील्ड वर्करों को बीमारी की सूचना मिलते ही तुरन्त स्वास्थ्य विभाग की टीम से सम्पर्क के निर्देश दिए गए हैं।
दूषित पानी से बीमारी का खतरा
बाढ़ के बाद दूषित पानी से संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए गांवों में कुओं का क्लीरिनेशन कराने डीसीएम को निर्देशित किया गया है। इस कार्य को आशा कार्यकर्ताओं द्वारा कराने के निर्देश दिए गए हैं। आशा कार्यकर्ता क्लोरीन की गोलियां और ब्लीचिंग पावडर का घोल कुओं एवं अन्य जल स्त्रोतों में डालेंगी। जरूरत पड़ने पर संबंधित क्षेत्र के मेडिकल आॅफीसर के माध्यम से चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।


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