सतना जिला अस्पताल में डॉक्टरों की टीम ने 50 वर्षीय महिला के गले से 20 सेमी की विशाल थायरॉइड गांठ सफल सर्जरी से निकालकर चिकित्सा क्षेत्र में नई मिसाल कायम की।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिला अस्पताल में पहली बार 20 सेंटीमीटर की गांठ का सफल ऑपरेशन किया गया है। यह सब मेडिकल कॉलेज आने के बाद संभव हो पाया है। इस कार्य को सफल बनाने शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं जिला अस्पताल की विशेषज्ञ चिकित्सक टीम शामिल रही। 20 सेंटीमीटर गांठ की सफल सर्जरी सतना जिले के लिए चिकित्सा क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। बताया गया कि बुधवार को मेडिकल कॉलेज एवं जिला चिकित्सालय की विशेषज्ञ चिकित्सक टीम द्वारा 50 वर्षीय महिला के गले से लगभग 20 सेंटीमीटर, यानी फुटबॉल के आकार की विशाल थायरॉइड गांठ का सफल आॅपरेशन किया गया। यह जटिल सर्जरी न केवल चिकित्सकीय दक्षता का प्रमाण है, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती गुणवत्ता और भरोसे का मजबूत उदाहरण भी है। महाविद्यालय के डीन डॉ. एसपी गर्ग और सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने पूरी टीम को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान में उन्नत चिकित्सा सुविधाएं लगातार विकसित की जा रही हैं, ताकि क्षेत्रवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। यह सफलता न केवल सतना बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है और यह संदेश देती है कि समर्पण, विशेषज्ञता और सेवा भाव से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है।
डिस्फेजिया से जूझ रही थी मरीज
विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले सात वर्षों से इस समस्या से जूझ रही मरीज को हाल के महीनों में निगलने में कठिनाई (डिस्फेजिया) और गले में भारीपन की शिकायत बढ़ गई थी। गांठ के अत्यधिक बड़े आकार के कारण श्वास नली पर दबाव था, जिससे यह सर्जरी बेहद संवेदनशील बन गई थी। इसके बावजूद समन्वित टीमवर्क, आधुनिक तकनीक और अनुभव के बल पर ऑपरेशन को पूरी सफलता के साथ संपन्न किया गया। समय रहते अस्पताल पहुंचने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्परता से महिला को नई जिंदगी मिली। आॅपरेशन के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और नियमित फॉलो-अप में है।
विशेषज्ञों का रहा योगदान
इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी का नेतृत्व ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. विकास सिकरवार ने किया। उनके साथ डॉ. कार्तिकेश गुप्ता और डॉ. निमीश की अनुभवी टीम ने अहम भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया प्रबंधन की कमान डॉ. वीना कछवाहा के नेतृत्व में डॉ. आरती सिंह, डॉ. इरफान अहमद सिद्दीकी और डॉ. सुजय ने संभाली। पूरे आॅपरेशन के दौरान नर्सिंग स्टाफ सिस्टर संगीता का सहयोग भी सराहनीय रहा।
चिकित्सा जगत की बड़ी उपलब्धि
करीब एक हफ्ते पहले मरीज नाक, कान और गला (ईएनटी) कि ओपीडी में उपचार के लिए पहुंचा था, तब पता चला कि मरीज के गले में फुटबाल जितनी थायराइड गांठ है। इस दौरान उसे बताया गया कि यह घेंघा थायरॉइड का रूप है। इसका आॅपरेशन ही इलाज है। लम्बे समय के बाद यह कैंसर का रूप ले लेगी। सामान्यत: इतनी बड़ी गांठ नहीं मिलती है। मरीज को इस गांठ के चलते खाना निगलने में समस्या आ रही थी। यहां तक कि सही से सांस भी नहीं ले पा रही थी। मरीज की इस समस्या को देखते हुए सर्जरी प्लान की गई। बुधवार को सुबह सर्जरी शुरू की गई। साढ़े तीन घंटे से अधिक समय तक चली यह सर्जरी चुनौती पूर्ण रही। इस प्रकार की सर्जरी में मरीज की जान जोखिम का डर बना रहता है, क्योंकि गले में इस प्रकार की गांठ में कई खून की नलियां नीचे दब जाती हैं, जिनके डैमेज होने का डर बना रहता है। जिला अस्पताल के आॅपरेशन थियेटर के इक्यूप्मेंटों में ही यह सर्जरी कराई गई, जिसमे मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल के विशेषज्ञों का विशेष योगदान रहा। मेडिकल कॉलेज द्वारा हर महीने औसतन 3 से 4 थायरॉइड ऑपरेशन किए जा रहे हैं, जिसके चलते जिला अस्पताल अब जटिल सर्जरी के लिए भी एक भरोसेमंद केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने आमजन से अपील की कि गले में सूजन, आवाज में बदलाव या निगलने में परेशानी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें।
डॉ. विकास सिकरवार, ईएनटी विभाग के विभागाध्यक्ष, मेडिकल कॉलेज


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