नागौद से गंभीर हालत में जिला अस्पताल लाई गई प्रसूता की उपचार के दौरान मौत हो गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, जबकि अस्पताल प्रबंधन ने समय पर आवश्यक चिकित्सकीय प्रयास किए जाने का दावा किया।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही सामने आई है, नागौद क्षेत्र से जिला अस्पताल रेफर की गई प्रसूता की उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। दरअसल, मामला 9 जुलाई का है, जब नागौद सिविल अस्पताल में प्रसूता अभिलाषा सोनी पति दिलीप सोनी उम्र 25 साल निवासी डुड़हा जसो को प्रसव पीड़ा के चलते भर्ती कराया गया था। प्रसूता की यह पहली डिलेवरी थी, स्थितियां गंभीर होने के चलते प्रसूता की सर्जरी से डिलेवरी कराई गई जिस पर प्रसूता ने बालक को जन्म दिया। प्रसव के बाद से ही प्रसूता की स्थिति और गंभीर होने लगी जिस पर चिकित्सकों ने हायर सेंटर जिला अस्पताल रेफर करने का निर्णय लिया।
ब्लीडिंग ज्यादा होने पर किया रेफर
बताया गया कि नागौद में 9 जुलाई को सुबह 6.09 बजे भर्ती किया गया। जहां डॉ. अमित सोनी द्वारा प्रसूता की डिलेवरी सर्जरी द्वारा कराई गई। सीजर के बाद ब्लीडिंग नहीं रुकने पर जिला अस्पताल रेफर का निर्णय लिया गया। 9.25 बजे जिला अस्पताल सतना पहुंची जहां प्रसूता का बीपी और पल्स नहीं मिल रही थी। ब्लीडिंग ज्यादा हो रही थी जिसे रोकने के लिए दोबारा सर्जरी करने का फैसला किया गया।
दोबारा करना पड़ा सीजर
जिला अस्पताल पहुंचते ही ड्यूटी में पदस्थ स्त्री रोग विशेष डॉ. निलोफर द्वारा प्रसूता की ब्लीडिंग रोकने दोबारा सर्जरी का निर्णय लिया गया। हालांकि प्रसूता का बीपी और पल्स मॉनीटर नहीं होने के चलते स्थितियां गंभीर थीं। तत्काल प्रसूता को आॅपरेशन के लिए भर्ती किया गया। भर्ती कर महिला की बच्चादानी निकाल ली गई जिसके चलते ब्लीडिंग तो बंद हुई लेकिन प्रसूता की स्थिति गंभीर हो गई और प्रसूता वेंटीलेटर पर पहुंच गई। बताया जाता है कि 10 जुलाई की सुबह साढे चार बजे प्रसूता ने दम तोड़ दिया। प्रसूता की मौत के बाद परिजनों द्वारा चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाया गया और उनके खिलाफ शिकायत करने की बात कही गई।
इनका कहना है...
मामला जानकारी में आया है, मरीज की स्थिति गंभीर बनी हुई थी, ब्लीडिंग रोकने प्रसूता का आॅपरेशन करने के सिवाय दूसरा आॅप्सन नहीं था। चिकित्सकों के द्वारा तत्काल निर्णय लेकर चिकित्सकीय सुविधाएं दी गई।
डॉ. मंजू सिंह, गायनी एचओडी, जिला अस्पताल
मामला जानकारी में आया है, मरीज की स्थिति गंभीर बनी हुई थी, ब्लीडिंग रोकने प्रसूता का आॅपरेशन करने के सिवाय दूसरा आॅप्सन नहीं था। चिकित्सकों के द्वारा तत्काल निर्णय लेकर चिकित्सकीय सुविधाएं दी गई।
डॉ. मंजू सिंह, गायनी एचओडी, जिला अस्पताल


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