सतना के बांका गांव में आदिवासी महिलाओं ने 10 हजार सीड बॉल बनाकर औषधीय पौधों के संरक्षण की अनोखी पहल की। इन बीजों को वन क्षेत्रों में डालकर पर्यावरण और जैव विविधता को बढ़ावा दिया जाएगा।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
प्रकृति की गोद में पली-बढ़ी महिलाओं ने इसका कर्ज लौटाने की ठानी है। इसके लिए वह माटी के गेंदों में संपदा सहेज रहीं हैं। इन गेंदों में वह बीज है जो आयुर्वेदिक रूप से मानव और जंगल के जीवन के लिए महत्वपूर्ण है। इन गेंदों में छिपे आयुर्वेदिक खजाने को जल्द ही बिरले वनों की गोद में डाल दिया जाएगा।
मझगवां के बियावान की सुरम्य छटा के बीच बसा है गांव बांका। जिला मुख्यालय से इसकी दूरी करीब 35 किलोमीटर है। यहीं की महिलाओं ने अपनी प्रकृति मां का ऋण चुकाने के लिए आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर पौधों के बीजों का संग्रह किया है। इन्हें माटी की गेंद के अंदर सहेजा भी है। पिछले दिनों इन गेंदों को वन विभाग को दान देकर सुर्खियों में आई थीं। जानकारी के मुताबिक जय बिरसा मुंडा ग्रामीण विकास एवं शोध समिति के माध्यम से निपट आदिवासी बाहुल्य गांव बांका की महिलाओं ने 10 हजार से भी अधिक सीड बॉल बनाए हैं। इन बॉल में औषधि गुणों से भरपूर पौधों के बीजों को रखा है। जो कि आने वाले दिनों में सतना और मैहर वनमंडल के कई परिक्षेत्रों में जमीन पर डाले जाएंगे।
पुरुषों ने किया बीज संग्रहण
जंगल के बीच से यहीं की संपदा को बचाने का संकल्प साधारण नहीं है। इसके लिए समय लगा और अभी कितना लगेगा इसका भी अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। समिति के सचिव राजेश त्रिपाठी बताते हैं कि औषधि गुणों से भरपूर बीजों को एकत्रित करने का काम पुरुषों ने किया। वजह महिलाएं जंगल के बीच में नहीं जा सकती थीं इस काम में समय और दूरी निश्चित नहीं है। यही कारण है कि बीज संग्रहण का काम पुरुषों को दिया गया।
एक सैकड़ा प्रजातियों के बीज
इन सीड बॉल में एक सैकड़ा से अधिक प्रकार के पौधों के बीज हैं। सचिव बताते हैं कि आंवला, करंज, हर्रा, बहेरा, सोन पाठा, अमलतारा, इमली, नीम, बेर पैगून, देशी बेर, अर्जुन, खमहेर आदि सहित 100 से अधिक प्रजाति के पौधों के बीज हैं। इन सीड बॉल्स को वन विभाग को सौंपा गया है। या यूं कहें कि दान किया गया है। जिसकी संख्या 10 हजार है।
हर रेंज में डलेगी यह बॉल
पिछले दिनों आदिवासी समूह की इन महिलाओं ने वन विभाग को सीड बॉल्स दान किए हैं। वन विभाग इन बॉल्स के अपने प्रमुख वन परिक्षेत्रों की जमीनों में इनका रोपण करेगा। जानकारी के अनुसार इन सीड बॉल्स को वनपरिक्षेत्रों के हिसाब से बराबर बराबर भागों में बांट जाएगा। इनका रोपण उन क्षेत्रों में होगा जहां जमीन अतिक्रमण से मुक्त कराई गई है और ऊंचाई में है।
बाकी सारा काम आधी आबादी का
सीड बाल बनाने का काम महिलाओं ने किया। इसके लिए काली माटी, रेत, भूसा और वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया गया। जंगल से संग्रहित बीजों को इन सामग्रियों की लोई में डाल कर एक गेंद नुमा आकार दिया गया। यह इसलिए भी किया गया कि जंगल में कई पथरीली और ऊंचे क्षेत्रों में पौध रोपण में मशक्कत होती है। जिसके चलते यह कम गहराई में भी डाल देने पर उग आते हैं। अध्यक्ष सोना बाई सिंह गौंड बताती हैं कि सीड बॉल बनाने के काम में 70-75 महिलाओं ने योगदान दिया है जो कि 16 दिनों में 10 हजार से भी अधिक सीड बॉल बना पाई हैं।


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