सिंगरौली के चितरंगी में दो वर्षों से बंद आंगनबाड़ी केंद्र का मामला सामने आने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग की निगरानी व्यवस्था सवालों में है। कार्यकर्ता को नोटिस जारी हुआ, लेकिन अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में है।

हाइलाइट्स:
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
चितरंगी विकासखंड में महिला एवं बाल विकास विभाग की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। क्षेत्र के आंगनबाड़ी केंद्र नौडिहवा क्रमांक 2 में पिछले करीब दो वर्षों से ताला लटका होने का मामला सामने आने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब केंद्र इतने लंबे समय से बंद था तो आखिर इसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को पहले क्यों नहीं हुई? अब दो वर्ष बाद परियोजना अधिकारी द्वारा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शशि चौबे को नोटिस जारी किए जाने से विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे विभागीय नोटिस के अनुसार महिला एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी चितरंगी-1 ने 11 जुलाई 2026 को संबंधित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में उल्लेख है कि सेक्टर पर्यवेक्षक की रिपोर्ट के आधार पर पाया गया कि कार्यकर्ता द्वारा विभागीय योजनाओं में कोई प्रगति नहीं की गई। लाड़ली लक्ष्मी योजना, मात्र वंदना योजना, आयुष्मान भारत, गर्भवती महिलाओं का पंजीयन एवं जांच, बच्चों का ई-केवाईसी, नियमित टीकाकरण सहित कई योजनाओं में उपलब्धि शून्य दर्ज की गई है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि सेक्टर पर्यवेक्षक के फोन कॉल का जवाब नहीं दिया गया और योजनाओं के क्रियान्वयन में गंभीर लापरवाही बरती गई। परियोजना अधिकारी ने दो दिन के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए चेतावनी दी है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रश्न विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर खड़ा हो रहा है। यदि आंगनबाड़ी केंद्र दो वर्षों से बंद था तो इस दौरान मासिक निरीक्षण, सुपरविजन और समीक्षा बैठकों में यह तथ्य सामने क्यों नहीं आया।
सीडीपीओ की कार्यप्रणाली कटघरे में
विभागीय नियमों के अनुसार सीडीपीओ और सेक्टर पर्यवेक्षकों को नियमित रूप से केंद्रों का निरीक्षण करना होता है। इसके बावजूद इतनी लंबी अवधि तक केंद्र बंद रहने की जानकारी सामने न आना विभागीय मॉनिटरिंग की पोल खोलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केंद्र बंद रहने से क्षेत्र के बच्चों को पूरक पोषण आहार, प्री-स्कूल शिक्षा, टीकाकरण संबंधी सुविधाएं और गर्भवती एवं धात्री महिलाओं को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित हुईं। इससे सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं का लाभ पात्र हितग्राहियों तक नहीं पहुंच सका।
अधिकारी नहीं करते निरीक्षण
लोगों का आरोप है कि यदि समय रहते निरीक्षण किया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जब योजनाओं में लगातार शून्य प्रगति दर्ज हो रही थी, तब संबंधित सेक्टर पर्यवेक्षक और परियोजना अधिकारी ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की। क्या विभाग केवल कागजी समीक्षा तक सीमित रहा। यदि दो वर्षों से केंद्र बंद था तो पोषण आहार वितरण और अन्य योजनाओं का रिकॉर्ड किस आधार पर तैयार किया जाता रहा।
मेरे जानकारी में है नोटिस जारी की गई है एक कमेटी गठित की गई है उस कमेटी में कार्यकर्ता को हटाने का निर्णय लिया जाएगा।
जीतेन्द्र गुप्ता, डीपीओ सिंगरौली
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को नोटिस जारी की गई है और जवाब मांगा गया है। जवाब अगर संदेहास्पद रहा तो कार्यवाही की जाएगी।
सत्येंद्र सौधिया, सीडीपीओ चितरंगी

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