उज्जैन में चैत्र नवरात्रि की महाअष्टमी पर श्री पंचायती अखाड़ा निरंजनी द्वारा आयोजित नगर पूजा की पूरी जानकारी। जानें 24 खंबा मंदिर की परंपरा और मदिरा भोग का महत्व।
धारकुंडी आश्रम में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच परमहंस स्वामी सच्चिदानंद महाराज को भू-समाधि दी गई। यह केवल एक संत की विदाई नहीं, बल्कि करुणा, तप, संयम और मौन साधना से भरे युग का शांत अवसान है।
2025 धार्मिक घटनाक्रमों के लिहाज से बहुत उथल-पुथल के साथ की बड़े समारोह और उत्सवों का वर्ष रहा है। देश और दुनिया में धर्म को लेकर चर्चा चरम पर रही। अयोध्या में श्रीराम मंदिर पर वैदिक परंपराओं के पुनर्जागरण का विराट क्षण धर्म ध्वजा आरोरण में देखने को मिला।
संसद का शीतकालीन सत्र बुधवार को संपन्न हो गया, और सत्र के समापन के बाद संसद परिसर में एक अलग ही सियासी तस्वीर देखने को मिली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के तमाम दलों के सांसद एक साथ नजर आए।
प्रेम कुमार जैसे ही कुर्सी की ओर बढ़े, नीतीश कुमार दाहिनी ओर खड़े थे और तेजस्वी बाईं ओर से आ रहे थे। प्रेम कुमार बैठने ही वाले थे कि सीएम ने हल्के संकेत के साथ कहा-अरे रुकिए। उनके स्वर में सम्मान के साथ-साथ यह आग्रह भी साफ था कि इस ऐतिहासिक पल में तेजस्वी बराबरी से शामिल रहें।
चार दिन तक चली सूर्य उपासना की परंपरा मंगलवार को सुबह पूरी हो गई। कार्तिक शुक्ल सप्तमी पर आज छठ महापर्व का आखिरी दिन है। भोपाल के 52 घाटों पर सुबह की पहली किरण के साथ श्रद्धालुओं ने उगते सूर्य को दूध, जल और प्रसाद से अर्घ्य अर्पित किया।
दीपोत्सव, यानी 'दीपों का उत्सव' या 'दीपों की पंक्ति', भारतीय संस्कृति का एक ऐसा पर्व है जो प्रकाश की विजय, ज्ञान के उदय और नई शुरुआत का प्रतीक है। यह मूल रूप से दीपावली पर्व का ही विस्तृत और भव्य रूप है
जहां देशभर में दशहरे पर रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, वहीं सतना जिले के कोठी कस्बे में रावण पूजन की अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस वर्ष भी कोठी में भक्तों ने रावण की पूजा-अर्चना कर असत्य पर सत्य की जीत का संदेश दिया। साथ ही राम-रावण लीला, विजय जुलूस और जगह-जगह भंडारों से पूरा नगर रामभक्ति और उत्साह के रंग में रंग गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का इतिहास उसके सरसंघचालकों की प्रेरणादायक यात्राओं से जुड़ा है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार से लेकर डॉ. मोहन भागवत तक—छह युगदृष्टाओं ने संगठन, सेवा और राष्ट्रभक्ति की ज्योति को सतत जलाए रखा। इस लेख में जानिए कैसे हर सरसंघचालक ने समय की चुनौतियों में संघ को नई दिशा दी, और हिंदू संस्कृति को राष्ट्र की आत्मा के रूप में स्थापित किया।
शारदीय दुर्गा पूजा केवल आस्था का उत्सव नहीं, बल्कि परंपरा और प्रतीकों की गहरी परतों से बुना हुआ सांस्कृतिक महाकाव्य है। निषिद्ध पल्लि की मिट्टी से मूर्ति गढ़ने की रीति से लेकर कोला बऊ की स्थापना और सामुदायिक पूजा की ऐतिहासिक जड़ों तक-यह पर्व हमें बताता है कि दिव्यता केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि समाज की हर परत और हर जीवंत संबंध में निवास करती है।






















