भोपाल के जेपी अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन। नियमितीकरण और 21000 न्यूनतम वेतन सहित 9 सूत्रीय मांगों को लेकर न्याय यात्रा। एक महिला कर्मचारी बेहोश।
भोपाल के दशहरा मैदान में संविदा कर्मचारियों का विशाल सम्मेलन आयोजित हुआ। CM मोहन यादव ने संविदा कर्मियों को सरकार का 'हनुमान' बताया और नियमितिकरण सहित अन्य मांगों पर विचार के लिए समिति बनाने का ऐलान किया
सतना बिजली सर्किल में आरडीएसएस योजना के तहत कार्यों में देरी पर विभाग सख्त हो गया है। एक्सटेंशन मांगने वाली निजी एजेंसियों पर अब पेनाल्टी लगाने की तैयारी है।
मध्य प्रदेश के ढाई लाख संविदा कर्मचारियों ने भोपाल में नियमितिकरण, समान वेतन और महंगाई भत्ते (DA) समेत 9 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। मंच ने सरकार को चेतावनी दी और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
मध्य प्रदेश में ठेका प्रथा और कंपनी राज के विरोध में कल (12 अक्टूबर) भोपाल के अंबेडकर पार्क में 'महाक्रांति आंदोलन' होगा। विभिन्न कर्मचारी संगठन नियमित नौकरी, ₹21,000 न्यूनतम वेतन और समान काम-समान वेतन की मांग करेंगे।
सतना में मेयर योगेश ताम्रकार ने वार्ड 14 में 49 लाख से बन रही नाली की गुणवत्ता जांचते समय पैर से ठोकर मारी तो पूरी नाली टूटकर गिर गई। डस्ट और कम सीमेंट से बने इस घटिया निर्माण कार्य को देख मेयर ने संविदाकार व इंजीनियर को फटकार लगाते हुए काम दोबारा करने के आदेश दिए।
संविदा नीति 2023 के पूर्ण लाभ, संविलयन, निष्कासित कर्मियों की वापसी, एनपीएस व बीमा लाभ, वेतन विसंगति सुधार सहित दस सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर के 32 हजार एनएचएम संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने एकदिवसीय सामूहिक अवकाश लेकर भोपाल में एनएचएम कार्यालय का घेराव किया। सतना-मैहर से 500 से अधिक कर्मियों ने आंदोलन में हिस्सा लिया।
सतना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका है। संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी 16 सितम्बर को सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। सीएमएचओ को ज्ञापन सौंपकर ई-अटेंडेंस और सेवा समाप्ति का विरोध जताया गया। टीकाकरण दर बढ़ाने के लिए कार्यशाला भी आयोजित हुई।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की नई प्रमोशन पॉलिसी में आरक्षण के प्रावधान पर लगाई रोक। सपाक्स संघ की याचिका पर 15 जुलाई को अगली सुनवाई। जानें 2016 से लंबित पदोन्नति प्रक्रिया पर क्या होगा असर।
सतना के नारायण तालाब की बाउंड्री वॉल और पानी निकासी पुलिया में दरारें सामने आई हैं। पिछले साल भारी जलभराव की चपेट में आई उतैली बस्ती एक बार फिर खतरे में है। 4 करोड़ की लागत से हो रहे निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी और तय समय सीमा के बाद भी अधूरा कार्य स्थानीय प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।






















