सतना जिले में पेट्रोल-डीजल संकट गहराया। आधी सप्लाई और टैंकरों की कमी से शहर के बड़े पंप भी सूखने लगे। गांवों से लेकर परिवहन और कारोबार तक पर असर साफ दिखाई देने लगा है।
रीवा और मऊगंज में भीषण गर्मी के बीच लगातार बिजली ट्रिपिंग और कटौती से उपभोक्ता परेशान हैं। बढ़ते लोड के कारण ट्रांसफार्मर और केबल जल रहे हैं, जबकि शिकायतों के निराकरण में घंटों लग रहे हैं।
सिंगरौली के अमिलिया-सुहिरा मार्ग पर कोयला वाहनों की लंबी कतारों से रोज घंटों जाम लग रहा है। ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन और पुलिस पर यातायात नियंत्रण में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हादसों और अव्यवस्था पर चिंता जताई।
सतना के मझगवां क्षेत्र की आदिवासी बस्तियों में पेयजल संकट गंभीर हो गया है। दूषित पानी और सूखे हैंडपंपों से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम के सामने नाराजगी जताई, जबकि अधिकारियों ने स्थायी समाधान और जल संरक्षण कार्यों का भरोसा दिया।
सतना मेडिकल कॉलेज में पांच महीनों से जल संकट बना हुआ है। छात्रों के विरोध के बाद प्रबंधन ने टैंकर और मोटर से अस्थायी राहत दी, जबकि पाइपलाइन सुधार के लिए दस दिन का आश्वासन मिला है।
रीवा में नीट यूजी परीक्षा के दौरान सख्ती इतनी रही कि छात्राओं को फुलिया उतरवाने के लिए सुनार बुलाना पड़ा। जूते, गहने और कई वस्तुएं बाहर रखवाकर ही परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया गया।
सतना जिले में मातृ मृत्यु के मामले बढ़कर 37 पहुंचे, जो स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरियों को दर्शाते हैं। एनीमिया, हाई बीपी और समय पर इलाज न मिलने से अधिकतर मौतें हुईं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति चिंताजनक बनी।
रीवा संभाग में गेहूं उपार्जन की रफ्तार धीमी है, 32 दिन बाद भी केवल 25 प्रतिशत खरीदी हो सकी। किसानों को अव्यवस्था, तौल देरी, बारदाना कमी और भुगतान विलंब जैसी समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं।
सतना-रीवा संभाग में पराली जलाने के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि, मैहर में पहली बार 100 पार, एक्यूआई 75 पहुंचा, प्रशासनिक सख्ती बेअसर, किसानों की मजबूरी और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल उठे
सतना में सीवर कार्य के नाम पर सड़कें बार-बार खोदी जा रहीं, खराब रेस्टोरेशन से जनता परेशान, वहीं गंदगी और जलभराव से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा, फॉगिंग न होने से डेंगू-मलेरिया का खतरा भी बढ़ रहा






















