सतना के मुख्य बाजार में सीवर लाइन की अधूरी खुदाई से बारिश में कीचड़ फैल गया। 8 साल बाद भी काम अधूरा, व्यापारियों का 60–70% कारोबार प्रभावित।
सतना में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। रात में बनी डामर सड़क का सुबह उखड़ जाना नगर निगम और संविदाकारों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप खड़े करता है। आठ करोड़ की स्टेशन रोड परियोजना से लेकर 10 करोड़ की डामरीकरण योजना तक सब पर भ्रष्टाचार और अनियमितता की गूंज।
सतना जिले में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अंतर्गत अनुदान संग्रहण का लक्ष्य 13.55 लाख था, लेकिन 4 अगस्त तक केवल 3.77 लाख ही इकट्ठा हो सके। जिला प्रशासन, सीमेंट फैक्ट्रियां और स्मार्ट सिटी जैसी बड़ी संस्थाएं भी मदद से दूर रहीं। पुलिस, एसडीएम, सीईओ, सीएमओ तक ने सहयोग नहीं किया।
सतना शहर के वार्ड 39 और 40 के बीच बजरहा टोला से गौशाला चौक तक की सड़क की हालत बेहद खराब हो गई है। अधूरी सीवर लाइन परियोजना और रोड रेस्टोरेशन न होने से सड़क दुर्घटना का केंद्र बन गई है। राहगीरों की जान पर बनी है और व्यापार बर्बाद हो रहा है, पर जिम्मेदार मौन हैं।
सतना में स्मार्ट सिटी परियोजना की समीक्षा के दौरान सांसद गणेश सिंह ने विकास कार्यों पर गंभीर सवाल उठाए। 415 करोड़ खर्च के बावजूद शहर की दुर्दशा को लेकर नाराज़गी जताई गई। बैठक में सीवर, सड़क निर्माण, जल जीवन मिशन और नर्मदा जल आपूर्ति पर भी हुई खुली चर्चा।
महज 26.7 मिमी बारिश में सतना स्मार्ट सिटी में जलभराव और तबाही, सैकड़ों लोगों के घरों में घुसा पानी, खुली नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही की पोल। वार्डवासी नाराज होकर सड़कों पर उतरे, किया विरोध प्रदर्शन।


















