विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 17 सितंबर 2026 विशेष। जानिए भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत, ग्रामीण इलाकों की चुनौतियां, नकली दवाओं का साम्राज्य और मरीज सुरक्षा से जुड़े कड़े सवाल।
राजधानी भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में मध्य प्रदेश के इंटर्न डॉक्टर्स का आंदोलन तीसरे दिन और उग्र हो गया है। भोपाल और इंदौर समेत प्रदेशभर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों व अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कमला पार्क सड़क पर रातभर से डटे इंटर्न डॉक्टरों ने पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज और वॉटर कैनन के इस्तेमाल के विरोध में आज पूरे प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद रखने का ऐलान किया है।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र अंतर्गत विद्यानगर स्थित दीपशिखा अस्पताल में दरमियानी रात एक बड़ा हादसा होने से टल गया। अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर पर स्थित इमरजेंसी वार्ड में अचानक आग लग गई, जिससे देखते ही देखते धुआं चारों मंजिलों में फैल गया और अफरा-तफरी मच गई।
केंद्र सरकार के तमाम दावों के बाद भी देश की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। एम्स जैसे संस्थानों में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। इससे सवाल उठना लाजमी है। दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली स्थित एम्स में इलाज कराने वाले मरीजों को सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।
हरिद्वार रोड स्थित एक अस्पताल में आग लग गई। आनन फानन मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कराया जा रहा है। लेकिन इस दौरान दम घुटने से एक महिला मरीज की मौत हो गई। देहरादून के पैनेसिया हॉस्पिटल में अचानक आग लग गई। जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल है।
कटक स्थित एससीबी मेडिकल हॉस्पिटल में आज तड़के भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। यह हृदयविदारक घटना अस्पताल के एक वार्ड में हुई, जिसमें प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 10 मरीजों की मौत हो गई, जबकि 5 अन्य मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है।



















