केंद्र सरकार के तमाम दावों के बाद भी देश की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। एम्स जैसे संस्थानों में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। इससे सवाल उठना लाजमी है। दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली स्थित एम्स में इलाज कराने वाले मरीजों को सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

वेटिंग लिस्ट ने खोली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल
तीन साल में कई वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
केंद्र सरकार के तमाम दावों के बाद भी देश की स्वास्थ्य सेवाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। एम्स जैसे संस्थानों में मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। इससे सवाल उठना लाजमी है। दरअसल, देश की राजधानी दिल्ली स्थित एम्स में इलाज कराने वाले मरीजों को सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। मिले जवाब के मुताबिक, एम्स दिल्ली में आथोर्पेडिक यानी हड्डी रोग सर्जरी के लिए मरीजों को तीन महीने से लेकर ढाई साल तक इंतजार करना पड़ रहा है। यह जानकारी अस्पताल के अलग-अलग सर्जिकल विभागों से मिले जवाबों के आधार पर सामने आई है, जिनमें पहले से तय की जाने वाली सर्जरी के इंतजार का पूरा ब्यौरा दिया गया है। आरटीआई जवाबों के मुताबिक, इमरजेंसी के केसों में मरीजों का इलाज बिना किसी देरी के किया जाता है, लेकिन प्लांड सर्जरी के लिए मरीजों को हफ्तों से लेकर महीनों तक रुकना पड़ता है। सबसे ज्यादा वेटिंग टाइम आॅथोर्पेडिक विभाग में है, जहां तीन महीने से लेकर ढाई साल तक इंतजार करना पड़ता है।
स्त्री रोग के लिए पांच माह इंतजार
गायनेकोलॉजिक आन्कोलॉजी विभाग में डे-केयर ओटी के लिए तीन से पांच महीने, कैंसर से जुड़े मामलों में तीन से चार महीने और सामान्य स्त्री रोग मामलों में चार से पांच महीने का इंतजार है। वहीं छोटी प्रक्रियाओं के लिए एक महीने का समय लगता है।
गंभीर चोटों में कोई वेटिंग नहीं
सिजेरियन डिलीवरी और परिवार नियोजन से जुड़ी सर्जरी में कोई इंतजार नहीं करना पड़ता। प्लास्टिक, रिकंस्ट्रक्टिव एंड बर्न्स सर्जरी विभाग में पुरानी विकृतियों के इलाज के लिए तीन से छह हफ्ते और पुराने घावों के लिए दो से तीन हफ्ते का समय लगता है, जबकि सभी इमरजेंसी मामलों और जलने की गंभीर चोटों में कोई वेटिंग नहीं है।
तीन साल में एक के बाद एक झटके
यह खुलासा ऐसे समय पर हुआ है जब एम्स दिल्ली में पिछले तीन साल में कई वरिष्ठ प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष इस्तीफा दे चुके हैं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, कई डॉक्टरों ने प्रशासनिक अड़चनों, धीमी करियर ग्रोथ और निजी क्षेत्र में बेहतर मौकों का हवाला दिया है।
संसद में गूंजा डॉक्टरों का इस्तीफा
हाल ही में जाने माने स्पाइन सर्जन डॉ. भावुक गर्ग ने भी एम्स छोड़कर एक निजी अस्पताल जॉइन किया है। संसद में साझा जानकारी के अनुसार 2022 से 2024 के बीच देश भर के एम्स संस्थानों से 429 फैकल्टी मेंबर्स ने इस्तीफा दिया, जिनमें सबसे ज्यादा इस्तीफे एम्स दिल्ली से हुए हैं।


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दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन करने पहुंचे CJP नेताओं को पुलिस ने डिटेन किया। इस पर क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने नाराजगी जताते हुए इसे 'अघोषित इमरजेंसी' बताया और पदयात्रा की चेतावनी दी।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के दिल्ली प्रदर्शन से पहले पुलिस ने भारी कार्रवाई की। अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, तुषार गांधी और मनीष सिसोदिया समेत कई विपक्षी नेता हिरासत में लिए गए।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और रकफ रोकने की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध प्रदर्शन से पहले दिल्ली में तनाव और पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिल रही है।
उत्तरप्रदेश के बाराबंकी जिले के सफदरगंज में बीती देर रात चलती कार आग का गोला बन गई। कार में सवार चालक बाहर नहीं निकल सका और जिंदा जलकर उसकी मौत हो गई। आग बुझने के बाद कार के अवशेष में कुछ हड्डियां ही बची थीं।
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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को पुलिस ने नहीं दी अनुमति। कई ट्रेनें रद्द, 57 मेट्रो स्टेशन बंद और 10 डिटेंशन सेंटर बनाए गए। जंतर-मंतर पर धारा 163 लागू।
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