दतिया विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास पर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक हुई। भीतरघात के आरोपों और संगठनात्मक सुधार पर विशेष चर्चा।
प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में संगठन ने जिन नेताओं पर सबसे अधिक भरोसा किया गया, वे अपेक्षित परिणाम नहीं दे सके। पढ़िए विश्लेषण
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कम मतदान भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के लिए चुनौती बनेगा या कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम के लिए अवसर? यदि पिछले तीन उपचुनावों का रिकॉर्ड देखा जाए तो तस्वीर काफी दिलचस्प दिखाई देती है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने 6056 वोटों से जीत दर्ज की है। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बूथ पर भी बीजेपी पिछड़ी
दतिया उपचुनाव के बीच जीतू पटवारी और आशुतोष तिवारी की सौहार्दपूर्ण मुलाकात ने राजनीति में नई मिसाल पेश की है। चुनावी मंच पर दिखी हंसी-मजाक और आपसी सम्मान की अनूठी झलक, पढ़ें पूरी खबर।
दतिया के विधानसभा उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस को चुनौती देने के लिए शिवराज सिंह चौहान, कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल जैसे दिग्गजों के क्षेत्रों से भी उम्मीदवार दांव लगाने उतरे हैं। कुछ प्रत्याशी अन्य दलों से तो कुछ निर्दलीय ही मैदान में हैं।
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने कमर कस ली है। जातीय समीकरणों को साधने के लिए मंत्री और वरिष्ठ नेताओं को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है। जानें दतिया का पूरा जातिगत गणित।
दतिया उपचुनाव में सियासी पारा गर्म! बीजेपी सभा में भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा ने आशुतोष तिवारी को जिताने का संकल्प लिया। कांग्रेस प्रत्याशी पर साधा निशाना। नामांकन की पूरी अपडेट यहाँ पढ़ें।
टिकट कटने से उपजी नाराजगी के सवालों पर उन्होंने कहा कि कभी-कभी कार्यकर्ताओं में क्षणिक आवेश आ जाता है, जो अब शांत हो चुका है।
दतिया विधानसभा उपचुनाव में BJP ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटा।






















