सीधी जिले की मझौली स्वास्थ्य टीम की पांच नर्सें उस समय देवदूत बनकर सामने आईं जब जंगल के बीच चलती बस में सवार गर्भवती महिला को अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। जोखिम भरी स्थिति को समझते हुए स्टाफ नर्स अंजली गुप्ता और नेहा साकेत ने बिना समय गंवाए बस में ही सुरक्षित डिलीवरी कराई। सीमित संसाधनों के बीच लिया गया उनका त्वरित निर्णय और साहसिक कदम पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। मां और नवजात की स्थिति पूरी तरह स्वस्थ है।
सतना जिला अस्पताल में 28 वर्षीय रंजना पटेल ने सामान्य प्रसव से अलग-अलग समयांतराल में तीन बच्चों को जन्म देकर नया रिकॉर्ड बनाया। कम वजन के कारण तीनों नवजातों को एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है, जबकि मां स्वस्थ है। 21 नवम्बर को हुई इस डिलेवरी में चिकित्सकों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
सतना जिले में 19 अक्टूबर को प्रसूता की मौत के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच रिपोर्ट में सामने आया कि चिकित्सकों ने प्रसूता की प्रसव पूर्व जांच में गंभीर लापरवाही की और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को रिपोर्ट से दबाया गया। हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के बावजूद महिला को उचित उपचार नहीं मिला, जिससे प्रसूता और नवजात दोनों की मौत हो गई। सीएमएचओ ने मामले में जिम्मेदार चिकित्सकों से स्पष्टीकरण मांगा है और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
मैहर और सतना के बीच सूरत-भागलपुर एक्सप्रेस में 21 वर्षीय गर्भवती महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। महिला यात्रियों ने संकट की घड़ी में ‘दाई’ बनकर प्रसव कराया। रेलवे स्टाफ और जीआरपी ने तत्परता दिखाते हुए सतना स्टेशन पर मां और नवजात को अस्पताल पहुंचाया। दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं।
पन्ना जिले में इंसानियत की मिसाल बनी एक घटना, जब एंबुलेंस न मिलने पर यात्री बस में ही गर्भवती महिला का प्रसव कराया गया। ड्राइवर सिद्दीक राइन और कंडक्टर आशीष पाल की सूझबूझ और तत्परता से मां और नवजात की जान बच गई। यह घटना साबित करती है कि मानवता आज भी जिंदा है।
सिंगरौली जिला अस्पताल ट्रामा सेंटर में प्रसूता के ऑपरेशन के दौरान नवजात को गर्भ में ही कई जगह कट लग गया। नवजात को मृत हालत में बाहर निकाला गया। परिजनों ने डॉक्टरों पर जल्दबाजी और लापरवाही का आरोप लगाया है, जबकि सिविल सर्जन ने इसे गर्भ में ही नवजात की मौत बताया।
प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में सतना जिले की 138 हाई रिस्क गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया।




















