राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर न्यायिक वर्गीकरण को लेकर नाराज तहसीलदारों ने 6 अगस्त से प्रशासनिक कार्य न करने का ऐलान किया है। वे सिर्फ आपदा प्रबंधन से जुड़े कार्यों में सहयोग करेंगे। कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में अधिकारियों ने शासकीय वाहन, डोंगल और वाट्सऐप ग्रुप छोड़ने की बात भी कही है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर न्यायिक दो वर्गों में विभाजन को लेकर आक्रोशित तहसीलदारों ने मुख्य सचिव के नाम कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है जिसमें उन्होंने आगामी 6 अगस्त से सभी प्रशासनिक कार्य नहीं करने की चेतावनी दी है। तहसीलदारों ने अपने ज्ञापन में कहा है कि राजस्व अधिकारी आपदा प्रबंधन के कार्यों को छोड़कर समस्त कार्यों ेसे अलग रहेंगे। मप्र कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी डा. शैलेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि कोई भी राजस्व अधिकारी सामूहिक अवकाश, हड़ताल पर नहीं जाएगा बल्कि सभी राजस्व अधिकारी जिला मुख्यालय में ही उपस्थित रहेंगे और प्रतिदिन शाम 6 बजे जिले की स्थापना शाखा में संयुक्त उपस्थिति पत्रक पर हस्ताक्षर कर अपनी उपस्थिति देंगे।
वाट्सअप ग्रुप, वाहन छोड़ेंगे, डोंगल भी जमा करेंगे
कलेक्टर को सौंपे ज्ञापन में राजस्व अधिकारी (कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा) संघ ने अपने ज्ञापन में कहा है कि सभी अधिकारी अपने शासकीय वाहन जिले में जमा करा देंगे एवं अपने डिजिटल सिग्नेचर के डोंगल सीलबंद कर एकत्र कर जिला अध्यक्ष को सौंपेगे। इसके साथ ही जिले के सभी अधिकारिक वाट्सअप ग्रुप को भी छोड़ देंगे।
सामान्य प्रशासन व पुलिस विभाग को सौंप दें शक्तियां
ज्ञापन में अपनी नाराजगी के कारणों का उल्लेख करते हुए राजस्व अधिकारियों ने कहा है कि संवर्ग के विभाजन का मुख्य आधार कार्यपालिक दंडाधिकारी के कार्यों का निर्वहन रखा गया है, जिसके आधार पर संवर्ग के 45 प्रतिशत अधिकारियों को उनके मूल कार्य (राजस्व) से पृथक किया जा रहा है, जिसे देखते हुए शासन से मांग की जा रही है कि कार्यपालिक दंडाधिकारी की शक्तियां पुलिस विभाग या सामान्य प्रशासन विभाग या किसी भी अन्य विभाग को सौंप दें।
वादा खिलाफी से है नाराजगी
राजस्व अधिकारियों के न्यायिक और गैर न्यायिक दो वर्गों में विभाजन योजना से उत्पन्न होने वाली संरचनात्मक, विधिक और व्यवहारिक समस्याओं से अवगत कराए जाने पर आश्वस्त किया गया था कि आगामी तीन माह तक योजना पायलट प्रोजेक्ट के रूप में बारह जिलों में लागू की जाएगी। राजस्व न्यायालयों को मर्ज नहीं किया जाएगा एवं गैर न्यायिक (कार्यपालिक मजिस्ट्रेट) को आवश्यक संसाधन प्रदान किए जाएंगे। मुख्य सचिव के इस आश्वासन के बावजूद रीवा और कटनी समेत 9 जिलों में कलेक्टरों द्वारा इस व्यवस्था को लागू कर दिया गया है जिससे नाराज राजस्व अधिकारियों ने प्रशासनिक कार्य नहीं करने का निर्णय लिया है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के दौरान बिरसिंहपुर तहसीलदार डा. शैलेन्द्र बिहारी शर्मा, संघ के जिलाध्यक्ष सौरभ मिश्रा, सौरभ द्विवेदी, सुजीत नागेश, प्रज्ञा द्विवेदी, ज्योति पटेल, राजेश सिंह, मणिराज सिंह बागरी, वीरेन्द्र सिंह आदि उपस्थित रहे।


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