मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन से लेकर परिसर तक जमकर राजनीतिक गहमागहमी रही। एक ओर जहां कांग्रेस विधायकों ने अनोखे अंदाज में सांकेतिक नाटक का मंचन कर सरकार को घेरा। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विपक्ष के आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब देने की रणनीति तैयार की।

अभी-अभी... मध्य प्रदेश विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल पास हो गया। कांग्रेस के विरोध के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कार्यवाही जारी रखते हुए बिल को पास घोषित कर दिया।
विधानसभा परिसर में कांग्रेस विधायकों ने किया ‘नाटक’
मुख्यमंत्री बोले- जय श्रीराम का उद्घोष के साथ दें जवाब
यूसीसी के विरोध में ‘शव’ लेकर सदन में पहुंची कांग्रेस

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सरकार ने यूसीसी विधेयक सदन में पेश किया। विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने की मांग को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार अडे रहे, लेकिन मांग स्वीकार नहीं होने पर सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। कांग्रेस विधायक वेल में पहुंचकर यूसीसी के विरोध में नारेबाजी करने लगे, जबकि भाजपा विधायक और मंत्री अपनी सीटों पर बैठे रहकर विधेयक पर चर्चा कराने की मांग करते रहे। वहीं यूसीसी पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाला बच्चन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, आरिफ मसूद ने विधेयक को प्रवर समिति के पास भेजने, अनुच्छेद 29 के तहत अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने और इसे राजनीतिक एजेंडा बताते हुए विरोध दर्ज कराया। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि यह सरकार नहीं, बल्कि जनता के सुझावों पर आधारित विधेयक है और करीब 10 लाख लोगों ने इस पर अपनी राय दी है। वहीं भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि प्रदेश के 10 लाख से अधिक लोगों ने यूसीसी के पक्ष में अपनी राय दी है और मध्य प्रदेश में यूसीसी लागू होकर रहेगा। वहीं भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि यूसीसी लागू होने से कांग्रेस की वोटों की फैक्ट्री बंद हो जाएगी। भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने इसे जनता की मांग बताया, जबकि दिलीप सिंह परिहार के पांच-पांच शादियों वाले बयान को लेकर भी सदन में सियासी तकरार देखने को मिली।

राजनीतिक गहमागहमी रही
मानसून सत्र के दूसरे दिन सदन से लेकर परिसर तक जमकर राजनीतिक गहमागहमी रही। एक ओर जहां कांग्रेस विधायकों ने अनोखे अंदाज में सांकेतिक नाटक का मंचन कर सरकार को घेरा। वहीं दूसरी ओर भाजपा ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पर विपक्ष के आरोपों का तथ्यों के साथ जवाब देने की रणनीति तैयार की। दरअसल, सत्र की कार्यवाही शुरू होने से पहले नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा परिसर में एक सांकेतिक नाटक का मंचन किया। कांग्रेस विधायक हाथों में तख्तियां और परिसर में सांकेतिक शव लेकर पहुंचे। वहीं सदन की कार्यवाही से पहले आयोजित भाजपा विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने विधायकों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए।
भ्रम फैलाने की कोशिश करेंगे
सीएम ने कहा-विपक्षी दल यूसीसी को लेकर जनता में भ्रम फैलाने की कोशिश करेंगे, जिसका जवाब भाजपा विधायकों को पूरे तथ्यों और जय श्रीराम के उद्घोष के साथ देना है। यूसीसी से सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और संपत्ति में महिलाओं को बराबरी का हक मिलने से उन्हें विशेष लाभ होगा। सीएम ने विधायकों से अपने-अपने क्षेत्रों को मॉडल क्षेत्र के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि विधायक अपने क्षेत्रों में जाकर यूसीसी के लाभों की जानकारी दें, जिससे विपक्ष की वोटबैंक और तुष्टीकरण की राजनीति उजागर हो सके।
आरोप-विवादित विषयों को प्राथमिकता
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश की भाजपा सरकार और संघ, युवा, छात्र, किसान और रोजगार जैसे जनहित के मुद्दों पर मुर्दों की तरह सोई रहती है, लेकिन मंदिर-मस्जिद और सांप्रदायिक मुद्दों पर तुरंत सक्रिय हो जाती है। कांग्रेस विधायकों ने हाथों में पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया, जिन पर लिखा था कि सरकार किसानों और बेरोजगारों की अनदेखी कर नफरत की राजनीति कर रही है। जब जनता के असली मुद्दे सामने आते हैं तो सरकार सो जाती है, लेकिन विवादित विषयों को प्राथमिकता दी जाती है।
समितियों की रिपोर्ट भी होंगी पेश
मध्य प्रदेश विधानसभा की विभिन्न समितियों के सभापति अपने प्रतिवेदन सदन में प्रस्तुत करेंगे। इनमें याचिका एवं अभ्यावेदन समिति, प्रत्यायुक्त विधान समिति, सरकारी उपक्रम समिति, शासकीय आश्वासन समिति, महिला एवं बाल कल्याण समिति, स्थानीय निकाय एवं पंचायतीराज लेखा समिति, कृषि विकास समिति तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति की रिपोर्ट शामिल हैं।
इन आठ विधेयकों पर होगी चर्चा
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