मध्यप्रदेश में सांसद, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्राप्त होने वाले गंभीर प्रकृति के आवेदनों के निराकरण के लिए सीएम की ओर से विभागों को ए प्लस में नोटशीट भेजी जाती है। जहां सीएमओ के स्पष्ट निर्देश हैं कि तीन दिन के भीतर संबंधित मामलों का निराकरण कर सूचित किया जाए।

लंबित मामलों की मंत्रालय में आज होगी समीक्षा बैठक
नोटशीट दबाकर बैठने वाले अफसरों पर गिरेगी गाज
जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आए मामलों में उदासीनता
ग्वालियर में आनलाइन ट्रांसफर के दावों की खुली पोल
सिर्फ 24 शिक्षकों का मंत्री की सिफारिश पर तबादला
भोपाल । स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में सांसद, विधायक सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से प्राप्त होने वाले गंभीर प्रकृति के आवेदनों के निराकरण के लिए सीएम की ओर से विभागों को ए प्लस में नोटशीट भेजी जाती है। जहां सीएमओ के स्पष्ट निर्देश हैं कि तीन दिन के भीतर संबंधित मामलों का निराकरण कर सूचित किया जाए, लेकिन कई विभागों द्वारा इसमें कार्रवाई न करने की शिकायतें मिली हैं। जिसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज मंत्रालय में ए प्लस मॉनिट प्रकरणों की समीक्षा बैठक बुलाई है। अब बिना उचित कारण के अनावश्यक विलंब करने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से सभी विभागों को समीक्षा की सूचना दी गई है। साथ ही अधिकारियों को आवश्यक जानकारी के साथ शामिल होने को कहा गया है। इसे लेकर प्रस्तुतीकरण व पिछली बैठक में दिए गए निर्देश के पालन प्रतिवेदन पर भी चर्चा होगी।
पात्र रह गए पीछे, रसूखदारों को तरजीह
इधर,ग्वालियर जिला शिक्षा विभाग में शिक्षकों की तबादला प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन इसके साथ ही विभाग के पूर्णत: आनलाइन और पारदर्शी होने के दावों की पोल भी खुल गई है। जिले में प्राथमिक कक्षाओं से लेकर हायर सेकेंडरी स्कूलों के शिक्षक और प्राचार्यों सहित कुल 240 शिक्षकों के ट्रांसफर किए गए हैं। विभागीय स्तर पर लगातार बताया जा रहा था कि पूरी ट्रांसफर प्रक्रिया डिजिटल और हस्तक्षेप से मुक्त है। लेकिन कुल तबादलों में से 24 शिक्षकों के ट्रांसफर सीधे तौर पर जिले के प्रभारी मंत्री की अनुशंसा पर किए गए हैं, जिसने इस पूरी आॅनलाइन व्यवस्था की शुचिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूची, विभाग ने पोर्टल पर चढ़ाई
शासन के नियमानुसार, इस ट्रांसफर प्रक्रिया में केवल उन्हीं शिक्षकों का तबादला होना था जिनका विभाग चाहे या फिर जिन्होंने स्वयं आॅनलाइन पोर्टल पर जाकर आवेदन किया था। पूरी मैरिट और पात्रता पोर्टल के जरिए ही तय होनी थी। प्रभारी मंत्री के यहां से 24 चहेते शिक्षकों की एक सूची जिला शिक्षा विभाग कार्यालय भेजी गई। इसके बाद विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर कार्यालय के कर्मचारियों ने इन नामों को सीधे पोर्टल पर फीड कर दिया। यानी जिन शिक्षकों ने सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन भी नहीं किया था, उनके ट्रांसफर हो गए।


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