बीमा कंपनियां शुरू में बड़े-बड़े और लुभावने आफर देकर ग्राहक बनाती हैं फिर अगर कोई हादसा हो जाए तो उपभोक्ता के परिजनों को क्लेम के लिए चक्कर लगवाती हैं। या फिर मुआवजा राशि देने से मुकर जाती हैं। इससे पीड़ित अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं।

ग्वालियर मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण का फैसला
बीमा कंपनी बोली-शिक्षक की लापरवाही से गई जान
ग्वालियर। स्टार समाचार वेब
बीमा कंपनियां शुरू में बड़े-बड़े और लुभावने आफर देकर ग्राहक बनाती हैं फिर अगर कोई हादसा हो जाए तो उपभोक्ता के परिजनों को क्लेम के लिए चक्कर लगवाती हैं। या फिर मुआवजा राशि देने से मुकर जाती हैं। इससे पीड़ित अदालत का दरवाजा खटखटाते हैं। दरअसल, मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण ग्वालियर ने सड़क हादसे में जान गंवाने वाले एक शिक्षक के परिजनों को बड़ी राहत देते हुए 82 लाख 52 हजार 520 रुपए का मुआवजा देने का आदेश दिया है। न्यायालय ने बीमा कंपनी की आपत्तियों को खारिज करते हुए बीमा राशि पर आवेदन की तिथि से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित भुगतान के निर्देश दिए हैं।
2023 में गई थी शिक्षक की जान
प्रकरण क्र.1833/2023 (रचना बनाम फेरन सिंह तोमर) में न्यायालय ने मृतक शिक्षक दीनदयाल त्यागी की पत्नी और अन्य आश्रितों के पक्ष में यह फैसला सुनाया। अभिलेखों के अनुसार नौ अगस्त 2023 को दीनदयाल त्यागी अपने साथी कृष्ण बिहारी शर्मा के साथ बाइक से स्कूल से पोरसा अपने घर लौट रहे थे।
कार ने मारी थी टक्कर
रास्ते में तिवरिया का पुरा, रामदीन की खोड़ के पास परिचित शिवकुमार तोमर से बाइक रोककर बातचीत करने लगे। पोरसा की ओर से आई कार (क्रमांक यूपी-13-एके-9292) के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए गलत दिशा में आकर बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल दीनदयाल त्यागी की मौत हो गई।
बीमा कंपनी ने पीड़ितों को बताया गलत
मृतक की पत्नी रचना और परिजनों ने वकील शंकर लाल ढींगरा और काजल ढींगरा के माध्यम से मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण में क्षतिपूर्ति का दावा प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने तर्क दिया कि दुर्घटना किसी अज्ञात वाहन से हुई थी और बीमित कार को गलत तरीके से प्रकरण में शामिल किया गया है।
कोर्ट ने परिजनों के दावे को माना सही
बीमा कंपनी ने कहा कि दुर्घटना के समय वाहन पालिसी की शर्तों का उल्लंघन करते हुए चलाया जा रहा था। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अधिकरण ने बीमा कंपनी के तर्कों को स्वीकार नहीं किया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मृतक के परिजनों के दावे को सही माना। न्यायालय ने बीमा कंपनी को 82,52,520 रुपए की क्षतिपूर्ति राशि आवेदन की तारीख से छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित तीन माह के भीतर जमा करने का आदेश दिया।


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