सत्ता के शिखर पर दिखाई देने वाला चेहरा भले एक हो, पर उसकी सफलता के पीछे कई लोग होते हैं। किसी भी मुख्यमंत्री की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनकी कोर टीम कितनी मजबूत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शुरुआती दौर में एक चौंकाने वाला चेहरा ‘सरप्राइज चॉइस’ के रूप में देखा गया, लेकिन बीते ढाई सालों में उन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि भाजपा संगठन के साथ भी बेहतरीन तालमेल बिठाया है।

मध्यप्रदेश में मोहन सरकार ने पूरा किया अपना मध्यकाल
वफादारी- विश्वास का मोहन को मिला बुलेटप्रूफ जैकेट
अरविंद मिश्र। भोपाल
सत्ता के शिखर पर दिखाई देने वाला चेहरा भले एक हो, पर उसकी सफलता के पीछे कई लोग होते हैं। किसी भी मुख्यमंत्री की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनकी कोर टीम कितनी मजबूत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शुरुआती दौर में एक चौंकाने वाला चेहरा ‘सरप्राइज चॉइस’ के रूप में देखा गया, लेकिन बीते ढाई सालों में उन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि भाजपा संगठन के साथ भी बेहतरीन तालमेल बिठाया है। कार्यकाल के मध्याह्न तक उन्होंने यह साबित कर दिया है कि उनका नेतृत्व केवल संयोग नहीं, बल्कि मजबूत रणनीति का हिस्सा था। आज जहां वरिष्ठ नौकरशाह और प्रमुख सचिव स्तर के अफसर जो उनकी विकास योजनाओं को जमीन पर उतार रहे हैं। वहीं भाजपा संगठन के दिग्गज नेता, जो सरकार और पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच सेतु का काम कर रहे हैं। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से लेकर भोपाल तक के मोहन के पुराने साथी सबसे भरोसेमंद सलाहकार हैं। दरअसल,13 दिसंबर-2023 को जब डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब बहुत कम लोगों को अंदाजा था कि प्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। अब 13 जून 2026 को उनकी सरकार ने अपने पांच वर्षीय कार्यकाल का आधा मध्यकाल सफर पूरा कर लिया है। स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट...।
सत्ता संगठन में बेतर तालमेल

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को मुख्यमंत्री के सबसे भरोसेमंद राजनीतिक सहयोगियों में गिना जाता है। दोनों नेताओं के मार्गदर्शक एक ही (सुरेश सोनी) होने के कारण उनके बीच वैचारिक और कार्यशैली का तालमेल मजबूत है। यही वजह है कि सरकार और संगठन के बीच टकराव की स्थिति नहीं बनती। किसी भी सत्ताधारी दल के लिए सरकार की योजनाओं को जनता तक ले जाने और संगठन की बात सरकार तक पहुंचाने के लिए इस तरह का समन्वय बेहद जरूरी होता है। केंद्रीय नेतृत्व के साथ बैठकें और राजनीतिक रणनीतियों में भागीदारी यह बताती है कि हेमंत खंडेलवाल केवल राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि केंद्रीय स्तर पर भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
श्रीराम तिवारी सांस्कृतिक विजन के शिल्पकार

मोहन सरकार की मूल पहचान-सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और उज्जैन की ऐतिहासिक विरासत का पुनरुत्थान है। डॉ. श्रीराम तिवारी की भूमिका केवल प्रशासनिक या सलाहकार स्तर की नहीं है, बल्कि वे सीएम के सांस्कृतिक विजन को जमीन पर उतारने वाले मुख्य शिल्पकार हैं। उज्जैन के गौरवशाली इतिहास (जैसे राजा विक्रमादित्य, महाकाल लोक) और भारतीय ज्ञान परंपरा को बहुत ऊंचा स्थान प्राप्त है। इतिहास और धर्म पर गहरी पकड़ होने के कारण डॉ. श्रीराम तिवारी इन विषयों को केवल धार्मिक न रखकर, उन्हें ऐतिहासिक और अकादमिक रूप से प्रामाणिक बनाने का काम करते हैं। महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक और वीर भारत न्यास के सचिव के रूप में वे सीधे उन परियोजनाओं का नेतृत्व कर रहे हैं जो मुख्यमंत्री के दिल के करीब हैं। उज्जैन की प्राचीन विरासत को ग्लोबल और नेशनल स्टेज पर री-ब्रांड करने के पीछे उनका हाथ है। डॉ. तिवारी भी उज्जैन से आते हैं। मुख्यमंत्री ने गृह नगर और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को गढ़ने के लिए बाहरी लोगों के बजाय उन पर भरोसा किया है जो इस मिट्टी की तासीर को बचपन से समझते हैं। डॉ. श्रीराम तिवारी मप्र की सांस्कृतिक पहचान और इतिहास को राष्ट्रीय पटल पर लाने में जुट हुए हैं।
मजबूत सुरक्षा कवच हैं अशोक कड़ेल

भाजपा जैसी विचारधारा-आधारित पार्टी में सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बीच का संवाद कितना मायने रखता है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। हम बात कर रहे हैं अशोक कड़ेल की। हिंदी ग्रंथ अकादमी के पूर्व निदेशक और शिक्षाविद् होने के नाते कड़ेल के पास प्रशासनिक अनुभव भी है और संघ की वैचारिक समझ भी। यही कारण है कि वे नीतिगत मामलों, विशेषकर शिक्षा और संस्कृति में संघ के विचारों को सरकार के साथ सहजता से साझा करते हैं। मुख्यमंत्री के साथ यह संबंध तात्कालिक नहीं, बल्कि पुराना और परखा हुआ है। मुख्यमंत्री के गृह नगर से जुड़े होने के कारण दोनों के बीच एक सहजता और विश्वास है। कड़ेल सीएम के लिए मजबूत सुरक्षा कवच की तरह काम करते हैं।
युवाओं की नब्ज पकड़ने में माहिर निशांत

मध्य प्रदेश भाजपा में पीढ़ीगत बदलाव अहम है। डॉ. निशांत खरे का बढ़ता कद यह दिखाता है कि मुख्यमंत्री की टीम में वैचारिक प्रतिबद्धता के साथ आधुनिक मैनेजमेंट और चुनावी गणित समझने वाले युवाओं को तरजीह दी जा रही है। इंदौर सूबे की राजनीति का एक बड़ा पावर सेंटर भी है। खुद मुख्यमंत्री का इंदौर जिले का प्रभारी होना और वहां से डॉ. निशांत खरे जैसे भरोसेमंद रणनीतिकार का सक्रिय रहना, मालवा-निमाड़ अंचल पर सरकार की मजबूत पकड़ और विशेष फोकस को दर्शाता है। संघ की पृष्ठभूमि और युवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष के नाते युवाओं की नब्ज और आधुनिक राजनीतिक प्रबंधन पर उनकी पकड़ है। डॉ. खरे केवल चुनावी चेहरा नहीं हैं, बल्कि वे उन बंद कमरों की बैठकों का हिस्सा हैं, जहां सरकार और पार्टी की भावी नीतियां और चुनावी बिसात तय की जाती है।
जमीनी स्तर पर राजेश के हाथ उज्जैन की कमान

राजनीति की आपाधापी, दबाव और कूटनीति के बीच एक ऐसा दोस्त, जो बिना किसी बड़े राजनीतिक महत्वाकांक्षा के केवल भरोसे की बुनियाद पर साथ खड़ा रहे, किसी के लिए बहुत बड़ी ताकत होता है। बचपन के दोस्त राजेश कुशवाहा मुख्यमंत्री के उन चुनिंदा लोगों में हैं, जो बिना किसी हिचकिचाहट के उन्हें सही और जमीनी फीडबैक देते हैं। लाइमलाइट से दूर रहना और बिना किसी शोर-शराबे के काम करना यह वफादारी का प्रतीक है। भले ही वे न दिखें, लेकिन महत्वपूर्ण व्यक्तिगत और रणनीतिक फैसलों में उनकी राय मायने रखती है। उज्जैन की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान से जुड़े पदों पर उनकी मौजूदगी (जैसे सम्राट विक्रमादित्य शोध संस्थान, विक्रम यूनिवर्सिटी और संभागीय क्रिकेट एसोसिएशन) यह सुनिश्चित करती है कि मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में भी उनके सबसे भरोसेमंद हाथ उज्जैन के स्थानीय मामलों, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संभाल रहे हैं।
प्रशासनिक ढांचे का ‘धु्रव’ अनुराग

मुख्य सचिव अनुराग जैन का नाम मध्य प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में उस ध्रुव तारे की तरह हैं, जिसके इर्द-गिर्द सीएम की पूरी शासन व्यवस्था है। उन्हें केंद्र द्वारा सेवा विस्तार मिलना, यह महज प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि राजनीतिक स्थिरता और दूरदर्शी गवर्नेंस का एक बड़ा संकेत है। मुख्यमंत्री की औद्योगिक प्रगति और एआई-आधारित गवर्नेंस की योजना को पूरा करने के लिए सीएस जुटे हैं। अनुराग जैन प्रशासनिक व्यवस्था के मुखिया हैं। अनुराग जैन जैसे आईएएस, जो तकनीक और प्रशासनिक सुधारों में रुचि रखते हैं, राज्य को डिजिटल मध्यप्रदेश के अगले स्तर पर ले जाने की क्षमता रखते हैं। सीएम योजनाएं गढ़ते हैं और सीएस उन जनकल्याणकरी योजनाओं को जमीन पर उतारते हैं। प्रशासनिक कसावट और योजनाओं का फीडबैक उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता में है।
सीएम का हर टास्क पूरा कर रहे मंडलोई

मुख्यमंत्री के प्रशासनिक तंत्र के सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं को असल में लागू करने और पूरी ब्यूरोक्रेसी को हांकने का काम अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई के कंधों पर है। मंडलोई केवल एक वरिष्ठ आईएएस ही नहीं हैं, बल्कि उनका पारिवारिक बैकग्राउंड सीधे मध्यप्रदेश की शीर्ष राजनीति (पूर्व मुख्यमंत्री भगवत शरण मंडलोई के पोते) से जुड़ा है। यह विरासत उन्हें प्रशासनिक फाइलों के साथ-साथ राजनीतिक प्राथमिकताओं और जनता की नब्ज को समझने की एक गहरी, स्वाभाविक समझ देती है। मुख्यमंत्री सचिवालय में एसीएस का पद पावर का सबसे बड़ा केंद्र होता है। मुख्यमंत्री जो भी विजन तय करते हैं, उसे कानूनी और प्रशासनिक अमलीजामा पहनाना मंडलोई की मुख्य जिम्मेदारी है। विभागों के बीच फाइलों को अटकने से रोकना और मुख्यमंत्री के निर्देशों को तुरंत लागू करवाना उनके पद का मुख्य टास्क है।
जनता तक सरकार की नीतियां पहुंचा रहे मनीष

मध्यप्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव के सबसे भरोसेमंद और प्रमुख आईएएस अधिकारियों में 2009 बैच के मनीष सिंह का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। उन्हें राज्य सरकार की नीतियों को जनता तक पहुंचाने और जमीनी जुड़ाव को मजबूत करने की बेहद अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासनिक गलियारों में मनीष सिंह अपनी सख्त कार्यशैली, त्वरित निर्णय क्षमता और योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए जाने जाते हैं। मनीष सिंह को सरकार की नीतियों और योजनाओं के सफल प्रचार-प्रसार का जिम्मा मिला है। उनके पास सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट परिवहन विभाग के सचिव, मध्य प्रदेश राज्य सडक परिवहन निगम और इंटरस्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी हैं। इससे पहले मनीष सिंह इंदौर के कलेक्टर, नगर निगम कमिश्नर और मेट्रो रेल कॉपोर्रेशन के एमडी भी रह चुके हैं। प्रशासनिक गलियारों में मनीष सिंह अपनी सख्त कार्यशैली और बेहतरीन निर्णय क्षमता के लिए जाने जाते हैं।
राघवेंद्र आर्थिक-औद्योगिक विजन के इंजन

मध्यप्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में 1997 बैच के आईएएस राघवेंद्र कुमार सिंह का नाम उस अफसर के रूप में जाना जाता है, जो सिर्फ फाइलें आगे नहीं बढ़ाते, बल्कि नतीजों पर भरोसा रखते हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यभार संभालते ही उन्हें प्रमुख सचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दरअसल, मुख्यमंत्री का एक बड़ा फोकस मध्य प्रदेश को निवेश का हब बनाना है। राघवेंद्र सिंह को औद्योगिक नीति, निवेश संवर्धन और एमएसएमई जैसे भारी-भरकम विभागों का जिम्मा देना सरकार के आर्थिक एजेंडे की सबसे मुख्य रणनीति है। राघवेंद्र सीधे मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं, विशेषकर औद्योगिक विकास और निवेश को जमीन पर उतारने के लिए फ्रंट-फुट पर बल्लेबाजी कर रहे हैं। इंदौर कलेक्टर के रूप में उनका इतिहास (2010-12) उनकी कार्यशैली की गवाही देता है। टीसीएस और इंफोसिस जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों को इंदौर लाने के लिए प्रशासनिक विरोध के बावजूद जमीन आवंटित कराई। वे दूरगामी फैसले करने से पीछे नहीं हटते। आज इंदौर का सुपर कॉरिडोर जो आकार ले चुका है, उसकी नींव में उनका वही कड़ा फैसला था।
रस्तोगी सिर्फ बजट बनाने तक सीमित नहीं

वर्ष 1994 बैच के आईएएस मनीष रस्तोगी का अपर मुख्य सचिव वित्त के पद पर पदोन्नत होना मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारे में बेहद महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में जहां लोक-कल्याणकारी योजनाओं और बड़े बुनियादी ढांचे के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। वहां वित्त विभाग की भूमिका सबसे अहम होती है। मनीष रस्तोगी पहले से ही प्रमुख सचिव के रूप में बजट प्रबंधन और आर्थिक स्थिरता को संभाल रहे थे। फिर उन्हें एसीएस के रूप में उनके पास वित्तीय नीतियों के गठन और कड़े संस्थागत फैसलों को लेने की निर्णायक और स्वतंत्र शक्ति मिलीं। वे अब सिर्फ बजट बनाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राज्य के राजस्व और उससे जुड़ी कानूनी-प्रशासनिक व्यवस्थाओं को भी सीधे नियंत्रित करते हैं। रस्तोगी का प्रशासनिक नजरिया और कार्यशैली मध्य राज्य सरकार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
खुफिया रिपोर्ट पर सीधे सीएम को सलाह देते हैं साईं मनोहर

1995 बैच के आईपीएस ए. साईं मनोहर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की टीम का एक बेहद अहम हिस्सा हैं। उन्हें राज्य में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए एडीजी इंटेलिजेंस बनाया गया है। वे सीएम के सबसे करीबी और भरोसेमंद पुलिस अधिकारियों में से एक माने जाते हैं। इस पद पर रहते हुए वे सीएम को राज्य की आंतरिक सुरक्षा और खुफिया रिपोर्ट पर सीधे सलाह देते हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली उच्च स्तरीय पुलिस बैठकों और राज्य-स्तरीय साइबर सुरक्षा कार्यशालाओं में साईं मनोहर प्रमुख रूप से मंच साझा करते हैं और रणनीतियां तैयार करते हैं। इंटेलिजेंस प्रमुख बनने से पहले, वे एडीजी (साइबर) और एडीजी (भोपाल जोन) के रूप में भी अपनी सेवाएं सफलतापूर्वक दे चुके हैं। इससे पहले, उन्होंने सीबीआई में भी लंबे समय तक संयुक्त निदेशक के रूप में काम किया है।
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सत्ता के शिखर पर दिखाई देने वाला चेहरा भले एक हो, पर उसकी सफलता के पीछे कई लोग होते हैं। किसी भी मुख्यमंत्री की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उनकी कोर टीम कितनी मजबूत है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शुरुआती दौर में एक चौंकाने वाला चेहरा ‘सरप्राइज चॉइस’ के रूप में देखा गया, लेकिन बीते ढाई सालों में उन्होंने न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर अपनी पकड़ मजबूत की है, बल्कि भाजपा संगठन के साथ भी बेहतरीन तालमेल बिठाया है।
जिस तरह से सीएम डॉ. मोहन यादव और प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के नेतृत्व में फैसले लिए जा रहे हैं, उससे स्पष्ट है कि भाजपा पुराने स्थापित राजनीतिक घरानों से हटकर नए और युवा चेहरों को मौका दे रही है। स्टार समाचार की विशेष रिपोर्ट...।
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