सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले को बदल दिया है इसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट को फटकार भी लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पायजामे का नाड़ा खोलना बलात्कार की कोशिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित फैसले को पलटने का फैसला किया है।
By: Arvind Mishra
Feb 18, 20262:14 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक विवादित फैसले को बदल दिया है इसके साथ ही इलाहाबाद हाई कोर्ट को फटकार भी लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पायजामे का नाड़ा खोलना बलात्कार की कोशिश की है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित फैसले को पलटने का फैसला किया है, जिसमें कहा गया था कि एक बच्ची के ब्रेस्ट को पकड़ना, उसके पायजामे का नाड़ा खोलना और उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या रेप की कोशिश नहीं है। इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर कड़ी टिप्पणी करते हुए चीफ जस्टिस आॅफ इंडिया सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एनवी अंजारिया के साथ कहा कि यौन अपराधों के मामलों में फैसले के लिए कानूनी तर्क और सहानुभूति दोनों की जरूरत होती है।
विवादित आदेश को खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का नाड़ा खींचना रेप की कोशिश के बराबर है। कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस विवादित आदेश को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि ये सिर्फ रेप करने की तैयारी है। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि विवादित आॅर्डर को क्रिमिनल ज्यूरिस्प्रूडेंस के तय सिद्धांतों के साफ तौर पर गलत इस्तेमाल की वजह से रद्द किया जाता है।
दो आरोपियों को होगी सजा
कोर्ट ने 10 फरवरी को यह आर्डर एक सुओ मोटो याचिका पर दिया था, जिसमें उसने इलाहाबाद हाई कोर्ट के आॅर्डर का संज्ञान लिया था, इसमें कहा गया था कि सिर्फ ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का डोरा खींचना रेप का अपराध नहीं है। हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए शीर्ष अदालत ने प्रोटेक्शन आफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल आफेंस एक्ट के तहत दो आरोपियों के खिलाफ रेप की कोशिश के असली कड़े चार्ज को बहाल कर दिया। कोर्ट ने कहा, जो फैक्ट्स बताए गए हैं, उन्हें देखते हुए, हम हाई कोर्ट के इस नतीजे से सहमत नहीं हो सकते कि आरोप सिर्फ रेप के अपराध को करने की तैयारी के हैं, कोशिश के नहीं।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने दिया था यह फैसला

17 मार्च, 2025 के अपने आर्डर में, हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि सिर्फ ब्रेस्ट पकड़ना और पायजामे का डोरा खींचना रेप का जुर्म नहीं है, लेकिन यह किसी महिला के कपड़े उतारने या उसे नंगा होने के लिए मजबूर करने के इरादे से हमला या क्रिमिनल फोर्स के इस्तेमाल के दायरे में आता है। यह आर्डर जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने दो लोगों की रिवीजन पिटीशन पर पास किया था, जिन्होंने कोर्ट में कासगंज के एक स्पेशल जज के आर्डर को चैलेंज किया था, जिसके तहत कोर्ट ने उन्हें दूसरी धाराओं के अलावा आईपीसी की सेक्शन 376 के तहत समन भेजा था।