देशभर की अदालतों में बढ़ते बोझ को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब पीड़ितों को कोर्ट-कचेहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके साथ ही उन्हें तारीख पर तारीख से भी छुटकारा मिलेगा। वहीं जमानत से जुड़े केसों में आदेश आदर्श रूप से अगले दिन जारी किया जाए और उसी दिन जेल प्रशासन तक पहुंचाया जाए।

लंबित केसों और फैसलों के लिए नहीं काटने पड़ेंगे चक्कर
जमानत से जुड़े केसों में आदेश अगले दिन जारी किया जाए
फैसला सुरक्षित रखा तो जानकारी वेबसाइट पर होगी अपलोड
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
देशभर की अदालतों में बढ़ते बोझ को कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अब पीड़ितों को कोर्ट-कचेहरी के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके साथ ही उन्हें तारीख पर तारीख से भी छुटकारा मिलेगा। दरअसल, लंबित केसों और फैसलों में होने वाली देरी पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने देश के सभी हाईकोर्ट के लिए अनिवार्य दिशा-निर्देश जारी किए हैं। शीर्ष अदालत ने आरक्षित फैसलों, जमानत आदेशों और उनके कारणों को सार्वजनिक करने के लिए स्पष्ट समय सीमा तय की है। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि किसी भी केस में फैसला सुरक्षित रखे जाने के बाद उसे अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाया जाना चाहिए। वहीं जमानत से जुड़े केसों में आदेश आदर्श रूप से अगले दिन जारी किया जाए और उसी दिन जेल प्रशासन तक पहुंचाया जाए।
जमानत पर उसी दिन होगी रिहाई
अदालत ने यह भी कहा कि जिन अंडरट्रायल कैदियों को जमानत मिल चुकी है, उनकी रिहाई उसी दिन या अधिकतम अगले दिन सुनिश्चित की जानी चाहिए। नए दिशा निर्देशों के अनुसार, अदालत पहले आदेश का प्रभावी हिस्सा खुले कोर्ट में सुनाएगी और उसके विस्तृत कारण सात दिनों के भीतर वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। साथ ही, जिस दिन फैसला सुरक्षित रखा गया हो, उसकी जानकारी भी संबंधित हाईकोर्ट की वेबसाइट पर प्रदर्शित की जाएगी।
देरी पर दूसरी पीठ को सौंप देंगे केस
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा का पालन नहीं किया जाता है तो केस किसी अन्य पीठ को सौंपा जा सकता है। वहीं, यदि फैसले के कारण 30 दिनों के भीतर अपलोड नहीं किए जाते हैं तो मामला वापस लेकर नई पीठ के समक्ष भेजा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी हाईकोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे इन निर्देशों को संबंधित मुख्य न्यायाधीशों के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
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