सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने कहा-सिर्फ इसलिए इस प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह सामान्य वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया से अलग है।

सीजेआई की बेंच ने 29 जनवरी को फैसला रखा था सुरक्षित
आयोग को मतदाता सूची का सत्यापन कराने का अधिकार
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में चुनाव आयोग द्वारा शुरू की गई मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को वैध और संवैधानिक करार दिया है। कोर्ट ने कहा-सिर्फ इसलिए इस प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह सामान्य वोटर लिस्ट संशोधन प्रक्रिया से अलग है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुआई वाली बेंच ने कहा कि आयोग को मतदाता सूची के सत्यापन प्रक्रिया अपनाने का अधिकार है। एसआईआर को कानून के दायरे से बाहर नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि याचिकाओं पर सुनवाई कर रही सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने 29 जनवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
नाम शामिल करने से इंकार का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने कहा-नागरिकता से जुड़ी जांच केवल मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम शामिल करने या हटाने के सीमित संदर्भ में ही की जा सकती ह। अदालत ने साफ किया कि आयोग ने भी इसी सीमित सवाल पर विचार किया है और ऐसी किसी भी जांच को कानून की निर्धारित सीमाओं के भीतर ही किया जाना चाहिए। यह आकलन केवल परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के संदर्भ में होगा। चुनाव आयोग के पास मतदाता सूची में नाम शामिल करने से इंकार करने का अधिकार है, लेकिन इस तरह की कार्रवाई को नागरिकता तय करने की प्रक्रिया नहीं माना जा सकता।
यह प्रक्रिया कानूनी रूप से टिकाऊ
एसआईआर के तहत चुनाव आयोग मतदाता सूची का सत्यापन करता है। इसमें मतदाताओं के दस्तावेज, पात्रता और रिकॉर्ड की दोबारा जांच की जाती है, ताकि फर्जी या डुप्लीकेट नाम हटाए जा सकें। उल्लेखनीय है कि बिहार में यह प्रक्रिया शुरू होने के बाद इसे चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि यह सामान्य संशोधन प्रक्रिया से अलग है और मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है।
कानून के खिलाफ नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आयोग संवैधानिक संस्था है और उसे निष्पक्ष एवं शुद्ध मतदाता सूची सुनिश्चित करने का अधिकार है। कोर्ट ने माना कि विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया अपनाना संविधान व कानून के खिलाफ नहीं है।
विपक्षी नेताओं की याचिकाएं
याचिकाकर्ताओं में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स, पीयूसीएल जैसे संगठनों के अलावा विपक्षी पार्टियों के नेता मनोज झा, योगेंद्र यादव, महुआ मोइत्रा, केसी वेणुगोपाल, पप्पू यादव, आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं ने पहले बिहार में एसआईआर की वैधता को चुनौती दी थी। कोर्ट ने तब एसआईआर पर रोक नहीं लगाई थी, लेकिन ये कहा था कि वो आगे चलकर तय करेगा कि क्या आयोग को एसआईआर करवाने का अधिकार है या नहीं।
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