कृषि उपज मंडियों में तुलाई व्यवस्था को लेकर किसानों ने पारदर्शिता की मांग उठाई है। वजन में अंतर, इलेक्ट्रॉनिक कांटों की विश्वसनीयता और नियमित सत्यापन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
इन दिनों कृषि उपज मंडियों में तुलाई व्यवस्था को लेकर किसानों के बीच सवाल उठने लगे हैं। किसानों का कहना है कि कई बार ट्रॉली में लोड की गई उपज का अनुमानित वजन और मंडी में दर्ज वजन में अंतर दिखाई देता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यह तकनीकी खामी है, मानवीय भूल है या फिर व्यवस्था में कहीं कोई गड़बड़ी है? मंडी में पहुंचे कई किसानों का कहना है कि गांव में लोडिंग के दौरान किए गए अनुमान और मंडी की तुलाई में दर्ज वजन के बीच अंतर दिखाई देता है। हालांकि यह अंतर हर मामले में नहीं होता, लेकिन जब भी ऐसा होता है तो किसान के मन में संदेह पैदा हो जाता है। किसानों का तर्क है कि यदि एक ट्रॉली में कुछ क्विंटल का भी अंतर आ जाए तो उसका सीधा असर भुगतान पर पड़ता है। यही कारण है कि तुलाई प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता की मांग लगातार बढ़ रही है।
इलेक्ट्रॉनिक कांटे कितने भरोसेमंद?
पिछले वर्षों में अधिकांश मंडियों में इलेक्ट्रॉनिक तुलाई मशीनें स्थापित की गई हैं। इनका उद्देश्य मानवीय त्रुटियों को कम करना और तुलाई को अधिक सटीक बनाना था। लेकिन सवाल यह है कि इन मशीनों का नियमित सत्यापन और तकनीकी परीक्षण कितनी गंभीरता से किया जाता है? माप-तौल नियमों के अनुसार तुलाई मशीनों का समय-समय पर कैलिब्रेशन और सत्यापन आवश्यक होता है। यदि यह प्रक्रिया नियमित रूप से नहीं हो तो मशीनों की सटीकता प्रभावित हो सकती है।
तुलाई प्रक्रिया खुले में हो
किसानों का कहना है कि तुलाई प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। कई किसान चाहते हैं कि तुलाई के दौरान डिजिटल डिस्प्ले ऐसी जगह लगाया जाए जहां किसान स्वयं वजन देख सके। इसके अलावा तुलाई पर्ची तत्काल उपलब्ध कराई जाए और यदि किसान को संदेह हो तो दोबारा तुलाई की स्पष्ट व्यवस्था हो।
सवालों के घेरे में कांटों का रखरखाव
मंडी में उपयोग होने वाले कई कांटे लंबे समय से उपयोग में हैं। किसानों और व्यापारियों का कहना है कि लगातार दबाव के कारण मशीनों की नियमित तकनीकी जांच आवश्यक है। यदि रखरखाव समय पर न हो तो तुलाई की सटीकता प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि किसान अब तुलाई मशीनों के निरीक्षण और प्रमाणन की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं।
अधिकारी क्या कहते हैं?
मंडी प्रशासन का दावा है कि सभी अधिकृत कांटों का नियमानुसार सत्यापन कराया जाता है और तुलाई प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि किसी किसान को तुलाई को लेकर शिकायत है तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आपत्ति दर्ज करा सकता है। हालांकि किसानों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया लंबी और जटिल होने के कारण अधिकांश लोग औपचारिक शिकायत नहीं कर पाते।


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