एपीएसयू रीवा में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया जांच, पात्रता और लंबित मामलों के कारण विवादों में है। समिति परीक्षण कर रही है, जबकि पुराने जांच प्रकरणों को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का प्रमोशन जांच में ही फंसा हुआ है। कमेटी किसी निर्णय पर नहीं पहुंच पा रही है। कई पेच है। कर्मचारियों की डिग्री के साथ ही बुद्धसेन का जांच लिफाफा भी आडेÞ आ रहा है। बुद्धसेन पर तो निर्णय लेने से ही कमेटी ने साफ इंकार कर दिया। जिसके बाद पूरी कमेटी को ही फटकार लगी। बुद्धसेन के खिलाफ कमेटी ने जांच की थी। लिफाफा भी पूर्व कुलपति को दिया था। अब वह लिफाफा ही गायब बताया जा रहा है। पूर्व कुलपति पर ही साथ ले जाने का आरोप लग रहा है। हालांकि उन्होंने इस बात से इंकार किया है। कुल मिलाकर बुद्धसेन को बचाने में ही प्रबंधन जुट गया है।
अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय में गजब खेल चल रहा है। यहां सारा काम नियम विरुद्ध चल रहा है। वर्तमान समय में प्रमोशन का दौर चल रहा है। प्रमोशन में तृतीय और चतुर्थ वर्ग कर्मचारियों का प्रमोशन किया जाना है। इस प्रमोशन में कई दागियों के नाम भी शामिल है। कुछ अपात्र हैं, जिन्होंने शासन के निदेर्शा, नियमों का पालन नहीं किया गया। प्रतिबंधित या अमान्य बोर्ड से अंकसूची लेकर पहुंच गए। अब सभी प्रमोशन की दौड़ में लगे हैं। ऐसे में इन सभी को पहले गलत तरीके से ही प्रमोट करने की तैयारी में थे। बाद में मामला उजागर हुआ तो कुलपति के कहने पर कुलसचिव ने संयोजक और सदस्य बदल दिया। अब प्रमोशन को लेकर नई कमेटी ने बैठक की। बैठक में कई मुद्दों पर फाइनल निर्णय नहीं हो पाया है। पहले दिन देर रात तक मंथन मचा। इसमें कुछ नाम पर मुहर लगी लेकिन कई नाम अधर में लटक गए। इनमें बुद्धसेन का भी नाम शामिल है। बुद्धसेन को लेकर कोई भी टीम का सदस्य फैसला नहीं लेना चाहता लेकिन कुलपति चाहते हैँ कि बुद्धसेन को प्रमोशन मिल जाए। बस इसी में मामला लटका हुआ है।
डिप्टी रजिस्ट्रार को पहनाई थी जूतों की माला
सूत्रों की मानें तो विवि में डिप्टी रजिस्ट्रार के पद पर लाल साहब सिंह पदस्थ थे। उनके रिटायरमेंट के दिन तृतीय चतुर्थ कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बुद्धसेन ने अन्य साथियों के साथ लालसाहब सिंह को जूतों की माला पहनाने की कोशिश की थी। इस मामले में खूब बवाल मचा था। तब कुलपति राजकुमार आचार्य थे। इसकी शिकायत शासन तक पहुंची थी। शासन से मामले की जांच और कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। कुलपति ने तीन सदस्यीय टीम गठित की थी। इसमें संयोजक इतिहास विभाग के प्रो सीडी सिंह थे। इसके अलावा दो और भी सदस्य थे। टीम ने जांच पूरी कर जल्द ही रिपोर्ट भी सौंप दी थी। फिर मामले में कुछ नहीं हुआ। लिफाफा खुला ही नहीं और न ही कार्यपरिषद की बैठक में कार्रवाई के लिए ही रखा गया। अब इसकी का फायदा बुद्धसेन को देने की तैयारी है।
कुलपति अब बुद्धसेन को इशारों पर नचा रहे
सूत्रों का कहना है कि बुद्धसेन के खिलाफ की गई जांच का लिफाफा अभी भी कुलपति के चेम्बर में ही मौजूद है। अब इस लिफाफे को बुद्धसेन के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है। जूतों की माला पहनाने के बाद बुद्धसेन वैसे भी शांत पड़ गए हैं। अब जब भी वह कर्मचारियों के साथ सिर उठाने की कोशिश करते हैं तो वह कुलपति प्रो कुड़रिया उन्हें बुलाकर लिफाफा दिखा देते हैं। इसके बाद उनका भूत उतर जाता है। हालांकि लिफाफा को कुलपति जादू की झड़ी की तरह ही इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच में नहीं कर रहे।
स्थापना शाखा तक पहुंचे ही नहीं दस्तावेज
जिस लिफाफा को सालों पहले जांच अधिकारी ने तत्कालीन कुलपति डॉ राजकुमार आचार्य को सौंप दिया था। वह अब तक स्थापना शाखा तक पहुंची ही नहीं। इसके कार्यपरिषद तक में नहीं रखा गया। यही वजह है कि बुद्धसेन पर किसी तरह की कार्रवाई का प्रस्ताव पास ही नहीं हुआ। अब इसी का फायदा प्रमोशन में देने की तैयारी चल रही है। कमेटी ने हालांकि इसमें आपत्ति दर्ज की है। फिर प्रमोशन होना तय माना जा रहा है। लिफाफा को लेकर अब तरह तरह की बातें कही जा रही है कि पूर्व कुलपति ही अपने साथ लिफाफा ले गए। यहां नहीं है।
संयोजक की कुलपति ने लगाई क्लास
सूत्रों की मानें तो हाल ही में प्रमोशन को लेकर कमेटी की बैठक हुई थी। इसमें संयोजक के रूप में रसायन विभाग के एचओडी प्रो आरएन पटेल हैं। इसके अलावा प्रो रामभूषण मिश्रा सदस्य व अन्य सदस्य शामिल हैं। इन्होंनें बैठक में ऐसे कर्मचारियों के नाम किनारे कर दिए जिनके पास सीपीसीटी परीक्षा पास का सर्टिफिकैट नहीं था। बुद्धसेन पटेल भी इस दायरे में आए। इन्हें भी किनारे कर दिया गया। बुद्धसेन पर निर्णय नहीं होने पर कुलपति ने प्रो आरएन पटेल की जमकर क्लास लगाई।
पूर्व कुलपति ने सिरे से किया इंकार, बोले वहीं है जांच लिफाफा
पूर्व कुलपति डॉ राजकुमार आचार्य वर्तमान में ग्वालियर विवि में कुलपति है। उनसे चर्चा करने पर पता चला कि बुद्धसेन का लिफाफा रीवा विवि में ही है। उन्होंने कहा कि वह लिफाफा क्यों लेकर आएंगे। उन्हें उस लिफाफा से क्या लेना देना है। सब कुछ वहीं पर है। जब तक मामले में कोई आरोप तय नहीं होता। शासन से कोई सजा नहीं मिलती, तब तक प्रमोशन पर असर नहीं पड़ता। लिफाफा खोलने के बाद कार्रवाई के लिए कार्यपरिषद की बैठक में प्रस्ताव रखना था। वहीं से सजा तय होती।
अभी तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रमोशन को लेकर परीक्षण चल रहा है। जो बाबू के लिए प्रमोट हो रहे हैं, उनके लिए सीपीसीटी अनिवार्य है। वहीं जो अन्य पदों पर पदोन्नत हो रहे हैं। उनका क्लियर हो गया है। बुद्धसेन के मामले में कुलसचिव ही बताएंगी।
प्रो आरएन पटेल, संयोजक, पदोन्नति समिति, एपीएसयू रीवा
मैं अब रिटायर हो चुका है। बुद्धसेन के खिलाफ तीन सदस्यीय जांच टीम बैठी थी। फिर उस मामले में क्या कार्रवाई पता नहीं चला।
लाल साहब सिंह, रिटायर्ड डिप्टी रजिस्ट्रार, एपीएसयू रीवा


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