इंदौर के एमवाय अस्पताल (MYH) में भीषण गर्मी के बीच बच्चे को स्ट्रेचर पर धकेलने के वायरल वीडियो के बाद प्रशासन ने कड़ा एक्शन लिया है। सिक्योरिटी इंचार्ज बर्खास्त, डॉक्टर और नर्सों की सैलरी काटी गई।

इंदौर। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (MYH) और सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल के बीच से सामने आए एक झकझोर देने वाले वीडियो पर अस्पताल प्रबंधन ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है. भीषण गर्मी में एक बेबस माता-पिता द्वारा अपने गंभीर बीमार बच्चे को स्ट्रेचर पर लिटाकर पैदल धकेलने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. इस मामले में घोर लापरवाही पाए जाने पर डीन अरविंद घनघोरिया ने कड़ा रुख अपनाते हुए कई जिम्मेदारों पर तत्काल एक्शन लिया है.
वायरल वीडियो पर संज्ञान लेते हुए अस्पताल प्रबंधन ने प्राथमिक जांच में लापरवाही पाए जाने पर सिक्योरिटी इंचार्ज और हेल्प डेस्क इंचार्ज की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त (बर्खास्त) कर दी हैं.
इसके साथ ही, अन्य स्टाफ पर भी कार्रवाई की गाज गिरी है। जिम्मेदारी तय करते हुए डॉक्टर अनुराग श्रीवास्तव का 7 दिन का वेतन काटने के आदेश दिए गए हैं। ड्यूटी के दौरान मुस्तैद न रहने पर तीन नर्सों का भी एक-एक दिन का वेतन काटा गया है। आउटसोर्स एजेंसी BVG कंपनी पर 1 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है और उसे ब्लैकलिस्ट करने की अनुशंसा शासन को भेजी गई है। अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव और न्यूरो सर्जन डॉ. परेश सोंधिया को नोटिस जारी कर शासन से कहा गया है कि ये दोनों अपनी जिम्मेदारियों का ठीक से निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं.
यह पूरी घटना 6 जून (शनिवार) की है। जबरन कॉलोनी के रहने वाले गोलू मलक और ज्योति ने बताया कि उनके 11 वर्षीय बेटे आदर्श का इलाज 20 मई से एमवाय अस्पताल में चल रहा है.। शनिवार को डॉक्टरों ने बच्चे को रीढ़ संबंधी बेल्ट के लिए पास ही स्थित सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल रैफर किया था। काफी देर इंतजार के बाद भी जब अस्पताल स्टाफ और एम्बुलेंस नहीं मिली, तो लाचार माता-पिता खुद ही बच्चे को स्ट्रेचर पर लिटाकर तपती धूप में करीब एक किलोमीटर दूर पैदल धकेलते हुए ले गए. वहां औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें दोबारा इसी तरह बच्चे को वापस एमवाय अस्पताल लाना पड़ा.
स्ट्रेचर पर तड़प रहा 11 साल का मासूम आदर्श कोई सामान्य मरीज नहीं है, बल्कि वह हाइपोहाइड्रोटिक एक्टोडर्मल डिस्प्लेसिया (Hypohidrotic Ectodermal Dysplasia) नाम की एक अत्यंत दुर्लभ बीमारी से जूझ रहा है. जानिए क्या होती है हाइपोहाइड्रोटिक एक्टोडर्मल डिस्प्लेसिया बीमारी.
इस दुर्लभ बीमारी में मरीज के शरीर में पसीना बनाने वाली ग्रंथियां विकसित नहीं होतीं, जिससे उसे पसीना नहीं आता और गर्मी सहन करने की क्षमता खत्म हो जाती है. यही वजह थी कि तपती धूप में रास्ते भर मां अपने दुपट्टे को पानी में भिगोकर बच्चे के शरीर पर रखती रही ताकि उसका शरीर ठंडा रह सके.
11 साल की उम्र में भी आदर्श के दूध के दांत नहीं टूटे हैं और उसका शारीरिक विकास रुक गया है. मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, वह अन्य गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से भी ग्रसित है...
डिमायलिनेटिंग डिजीज (Demyelinating Disease): इस बीमारी में नसों की सुरक्षात्मक परत प्रभावित होती है, जिससे दिमाग और शरीर का आपसी संपर्क बाधित होता है.
गुलियन-बैरे सिंड्रोम (GBS): जांच रिपोर्ट में इस गंभीर बीमारी की भी आशंका जताई गई है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम खुद नसों पर हमला करता है, जिससे लकवे जैसी स्थिति बन जाती है.
अस्पताल के सुपरिटेंडेंट डॉ. अशोक यादव ने बताया कि बच्चे का इलाज फिलहाल जारी है और उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है. हालांकि, इस घटना ने सरकारी दावों और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के ढर्रे पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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