पन्ना जिले में जेके सीमेंट पर सरकारी और निजी जमीन पर अवैध उत्खनन के आरोप लगे हैं। ग्रामीणों ने कार्रवाई मांगी, लेकिन शिकायतकर्ता को नोटिस मिलने से प्रशासन पर सवाल उठे हैं।

हाइलाइट्स:
पन्ना, स्टार समाचार वेब
जिले में अवैध उत्खनन को लेकर एक बार फिर बड़ा मामला सामने आया है। ग्राम पंचायत कोनी क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया है कि जेके सीमेंट प्रबंधन द्वारा बिना अनुमति सरकारी स्कूल भूमि एवं किसानों की जमीनों पर अवैध उत्खनन किया जा रहा है। गंभीर बात यह है कि शिकायत के बावजूद अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, बल्कि शिकायतकर्ता सामाजिक कार्यकर्ता अंकित पाठक को ही नोटिस थमा दिया गया है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है। जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता अंकित पाठक सहित अन्य ग्रामीणों ने कलेक्टर पन्ना को दिए गए ज्ञापन में बताया कि कोटवार की जमीन, शासकीय प्राथमिक स्कूल की भूमि तथा किसानों की निजी जमीनों पर जेके सीमेंट द्वारा अवैध रूप से खुदाई की गई है। ज्ञापन में खसरा नंबरों का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि बिना किसी वैधानिक अनुमति के जमीनों को खोदकर उनकी स्थिति खराब कर दी गई है। ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि ग्राम पंचायत कोनी की शासकीय भूमि, जो वर्तमान में भी कोटवार के नाम दर्ज है, उस पर भी कंपनी द्वारा अवैध उत्खनन कर दिया गया। इसके अलावा शासकीय प्राथमिक विद्यालय की भूमि और किसानों की निजी भूमि को भी नहीं बख्शा गया। एक किसान ने शिकायत में बताया कि विरोध करने पर उसकी जमीन को और अधिक क्षति पहुंचाई गई, जिससे उसकी भूमि की भौतिक स्थिति खराब हो गई। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि जेके सीमेंट प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए मुकदमा दर्ज किया जाए और अवैध उत्खनन पर रोक लगाई जाए। गौरतलब है कि अंकित शर्मा की शिकायत पर खनिज विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण कर जांच की। लेकिन उक्त जांच के उपरांत आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई, उल्टा शिकायतकर्ता को थमाई नोटिस
मामले में सबसे चैंकाने वाली बात यह सामने आई है कि शिकायतकर्ता अंकित पाठक द्वारा पहले भी कई बार इस संबंध में शिकायत की जा चुकी है, लेकिन प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। उल्टा तहसीलदार सिमरिया ने उनके खिलाफ ही भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 126/136(3) के तहत नोटिस जारी कर दिया। इस कार्रवाई से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि प्रशासन कंपनी प्रबंधन पर मेहरबान नजर आ रहा है और शिकायत उठाने वालों को ही प्रताड़ित किया जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक, खनिज अधिकारी और संबंधित राजस्व अधिकारियों को भी ज्ञापन की प्रतिलिपि भेजते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी जमीनों के साथ-साथ किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है और देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर क्या कदम उठाते हैं। प्रशासन द्वारा प्रबंधन पर कार्यवाही नहीं किये जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं, उस पर शिकायतकर्ता पर ही प्रशासनिक कार्यवाही से महौल और खराब हो रहा है।
जांच और कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने पुलिस अधीक्षक, खनिज अधिकारी और संबंधित राजस्व अधिकारियों को भी ज्ञापन की प्रतिलिपि भेजते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो सरकारी जमीनों के साथ-साथ किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है और देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर क्या कदम उठाते हैं। प्रशासन द्वारा प्रबंधन पर कार्यवाही नहीं किये जाने से कई सवाल खड़े हो रहे हैं, उस पर शिकायतकर्ता पर ही प्रशासनिक कार्यवाही से महौल और खराब हो रहा है।


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