रीवा के सोहागी पहाड़ में अवैध उत्खनन के दौरान जब्त पोकलेन मशीनों को लेकर विवाद गहरा गया। कार्रवाई के बाद मशीनों के गायब होने और वन अपराध प्रकरण दर्ज नहीं होने से विभागीय प्रक्रिया सवालों के घेरे में है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
सोहागी पहाड़ में उत्खनन करते वन विभाग की एसडीओ और बीट गार्ड ने दो मशीनें पकड़ीं थी। डीएफओ के निर्देश पर जब्त की गर्इं थी। मौके पर पंचनामा बनाया गया था। पकड़ी गई मशीनें एबी इन्फ्रा की थी। तीन दिन बाद अचानक से मशीनरी गायब हो गईं। अब वहां नहीं है। पंचनामा बनाया गया लेकिन प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। फिर से पूरे मामले में लीपापोती कर दी गई है।
जंगल में मंगल चल रहा है। बड़ी और नामी कंपनियों के आगे अधिकारी नतमस्तक हो रहे हैं। सोहागी पहाड़ का चौड़ीकरण होना है। वन भूमि फंस रही है। एमपीआरडीसी ने अनुमति के लिए फाइल वन विभाग को दी थी। फाइल स्वीकृति के लिए भोपाल भेजी गई है। अभी अनुमति नहीं मिली और इधर कंपनी ने काम कराना शुरू कर दिया है। सोहागी पहाड़ का रास्ता एक्सीडेंटल फ्री बनाने के लिए एक अतिरिक्त पाथ का निर्माण किया जाना है। इसी टेंडर पहले ही हो चुका था। एमपीआरडीसी ने एबी इन्फ्रा लिमिटेड को ठेका दिया हुआ है। बिना अनुमति के ही एबी इन्फ्रा ने पहाड़ तोड़ने के लिए पोकलेन मशीनें लगा दी। अवैध रूप से उत्खनन में लगी पोकलेन मशीनों की जैसे ही जानकारी हुई तो मौके पर रेंजर पहुंच गई। भाग्यशाली सिंह ने इसकी जानकारी डीएफओ को दी। रीवा डीएफओ के निर्देश पर तुरंत दो पोकलेन वाहन को मौके पर ही जब्त कर लिया गया। बीट गार्ड दिलीप सिंह ने पंचनामा भी बनाया। इसके बाद तीन दिन और रात इनकी निगरानी की गई। चौथे दिन दोनों पोकलेन वाहन छोड़ दिए गए। अब किसके कहने पर छोड़े गए यह कोई बताने को तैयार नहीं है।
पुराने मामले पर भी उठे सवाल
सूत्रों के अनुसार वन विभाग की विवादित कार्यशैली का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी गुढ़ क्षेत्र में दिलीप बिल्डकॉन की मशीनें जप्त की गई थीं। उस समय भी तीन दिन तक कोई वन अपराध प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। बाद में आनन-फानन में प्रकरण दर्ज कर जुर्माना वसूल कर मशीनें छोड़ दी गईं। हद तो यह है कि लगातार कंपनियां बिना अनुमति के वनक्षेत्रों में उत्खनन करती हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की जगह उन्हें रियायत दी जा रही है। अधिकारी और कंपनी के बीच तालमेल चल रहा है। वहीं बली का बकरा कर्मचारी बनते हैं।
वाहन राजसात करने का है नियम
यदि वन क्षेत्र में कोई भी कंपनी 1 हजार से अधिक का नुकसान करती है तो मौके पर वन विभाग को वाहन जब्त कर वन अपराध पंजीबद्ध करना चाहिए। यह कार्रवाई पंचनामा बनाने के 24 घंटे के अंदर होनी चाहिए। इसके अलावा 1 हजार से अधिक के नुकसान पर वाहनों को राजसात करने का स्पष्ट प्रावधान भी है। इसके बाद भी केवल जुर्माना लगाकर वाहनों को छोड़ दिया जाता है। इसमें अधिकारियों की संलिप्तता साफ नजर आती है।
भोपाल भेजी गई है फाइल
एमपीआरडीसी ने सोहागी पहाड़ में सड़क बनाई थी। वर्ष 2013 में वन विभाग से वन क्षेत्र में कार्य की अनुमति ली गई थी। तब 45 मीटर चौड़ाई में कार्य की अनुमति ली गई थी। एमपीआरडीसी का कहना है कि तब उन्होंने 45 मीटर की अनुमति ली थी। अब एमपीआरडीसी का कहना है कि उन्होंने सड़क चौड़ीकरण में पूरी भूमि का उपयोग नहीं किया था। अब जो जमीन शेष रह गई है। उसी पर काम करने की अनुमति मांगी गई है। डीएफओ हालांकि इसका निराकरण कर सकते थे लेकिन उन्होंने प्रस्ताव अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक भू प्रबंध भोपाल को भेज दिया है। जहां से अभी अनुमति नहीं मिली है।
30 जुलाई को पकड़े गए थे दो वाहन
वन परिक्षेत्र सिरमौर के अंतर्गत सोहागी पहाड़ में एबी इंफ्रा लिमिटेड द्वारा सड़क चौड़ीकरण का कार्य पिछले लगभग दो माह से किया जा रहा था। दिनांक 30 जुलाई 2026 को वन विभाग ने अचानक कार्रवाई करते हुए कार्य रुकवाया, मौका पंचनामा तैयार किया तथा दो पोकलेन मशीनों को जब्त कर लिया। मशीनों की सुरक्षा के लिए कर्मचारियों की लिखित ड्यूटी भी लगा दी गई। लेकिन कार्रवाई के तीन दिन बाद तक भी वन अपराध प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। तीन दिन बाद जप्त के बावजूद वाहन छोड़ भी दिया गया। वन अपराध प्रकरण भी पंजीबद्ध नहीं हुआ।
दो गाड़ियां जब्त की गईं थी। उन्हें छोड़ा नहीं गया है। अभी वहीं पर हैं। रिन्युअल का मामला नहीं था। सड़क चौड़ीकरण के लिए वर्ष 2013 का एमपीआरडीसी के पास परमिशन था। 5.5 मीटर में कोई पेड़ पौधा भी नहीं आ रहा है। मामले की जांच की जा रही है। कलेक्टर और कमिश्नर से भी इस बारे में चर्चा की गई है।
लोकेश निरापुरे, डीएफओ, वन मंडल रीवा


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