भारत में 1 अप्रैल 2025 से लागू होगा नया Income-tax Act. जानें मील बेनिफिट्स में 200 रुपये की बढ़ोतरी, नए मेट्रो शहरों में HRA छूट और Form 16 की जगह नए Form 130 के बारे में पूरी जानकारी।

भारत में टैक्स व्यवस्था एक ऐतिहासिक बदलाव की दहलीज पर है। 1 अप्रैल, 2025 से लागू होने वाला Income-tax Act, 2025, दशकों पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य टैक्स दरों को बढ़ाना नहीं, बल्कि जटिलताओं को खत्म कर पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। हालांकि टैक्स स्लैब स्थिर रखे गए हैं, लेकिन दैनिक भत्तों (Allowances) और रिपोर्टिंग के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं।
सैलरीड क्लास के लिए सबसे उत्साहजनक खबर मील बेनिफिट्स को लेकर है। अब तक कंपनियों द्वारा दिए जाने वाले मील वाउचर पर टैक्स छूट की सीमा मात्र 50 रुपये प्रति मील थी, जिसे अब बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया है। व्यावहारिक रूप से देखें तो एक कर्मचारी अब सालाना लगभग 1 लाख रुपये तक का मील बेनिफिट टैक्स-फ्री प्राप्त कर सकेगा। यह बदलाव न केवल कर्मचारियों की 'टेक-होम' सैलरी बढ़ाएगा, बल्कि खान-पान के बढ़ते खर्चों के बीच एक बड़ी वित्तीय राहत भी देगा।
मकान किराया भत्ता (HRA) के नियमों को अब आधुनिक शहरीकरण के अनुरूप ढाला गया है। पहले केवल दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को ही 50% HRA छूट के लिए 'मेट्रो शहर' माना जाता था। अब इस सूची में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल कर लिया गया है। इससे इन शहरों में रहने वाले लाखों आईटी और कॉर्पोरेट पेशेवरों को अधिक टैक्स छूट मिलेगी। हालांकि, पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अब मकान मालिक की पूरी जानकारी देना अनिवार्य है, ताकि फर्जी रेंट रसीदों के जरिए होने वाली टैक्स चोरी को रोका जा सके।
दस्तावेजीकरण के स्तर पर सबसे बड़ा बदलाव फॉर्म 16 का खत्म होना है। अब इसकी जगह Form 130 लेगा। यह नया फॉर्म पूरी तरह से सिस्टम-जनरेटेड और अधिक विस्तृत होगा, जिससे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइलिंग की प्रक्रिया काफी हद तक ऑटोमैटिक हो जाएगी। हालांकि, इसका एक पहलू यह भी है कि यदि आपके टीडीएस (TDS) डेटा में मामूली सी भी विसंगति हुई, तो सिस्टम आधारित प्रक्रिया के कारण रिफंड मिलने में देरी हो सकती है। इसलिए, अब डेटा की सटीकता पर अधिक ध्यान देना होगा।
नए नियमों के तहत पैन कार्ड की भूमिका को और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया गया है। अब वाहन खरीदने या बेचने जैसे सभी उच्च-मूल्य वाले लेन-देन (High-value transactions) के लिए पैन देना अनिवार्य है। इसके साथ ही, टैक्स रिजीम (Old vs New) चुनने की प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया गया है। अब आपको अलग से किसी फॉर्म की झंझट नहीं पालनी होगी, बल्कि आप अपने ITR फॉर्म के भीतर ही अपनी पसंद का रिजीम चुन सकेंगे। कुल मिलाकर, यह नया कानून 'फेसलेस असेसमेंट' और कम मानवीय हस्तक्षेप की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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