पन्ना टाइगर रिजर्व में रेस्क्यू किए गए बाघ की सात दिन बाद संदिग्ध मौत से वन्यजीव संरक्षण पर सवाल उठे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार, निगरानी और दवा प्रक्रिया पर जांच जारी है।

हाइलाइट्स:
पन्ना, स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के चर्चित पन्ना टाइगर रिजर्व से एक बार फिर ऐसी खबर सामने आई है जिसने वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पार्क से सटे ग्राम तारा से रेस्क्यू किए गए करीब दो वर्षीय नर बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। चौकाने वाली बात यह है कि जिस बाघ को सप्ताह भर पहले आबादी क्षेत्र से सुरक्षित पकड़कर चिकित्सकीय परीक्षण के बाद पूरी तरह स्वस्थ बताया गया था, उसी बाघ का शव अब जंगल के भीतर मिलने से हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार मंगलवार सुबह करीब 6:30 बजे अमानगंज वन परिक्षेत्र की रमपुरा बीट के हाथीडोल क्षेत्र स्थित एक नाले के पास बाघ का शव पड़ा मिला। जो वही बाघ बताया गया, जिसे 26 अप्रैल 2026 को ग्राम तारा से ट्रेंकुलाइज कर पकड़ा गया था। उस समय ग्रामीण क्षेत्र में बाघ के प्रवेश और मवेशियों के शिकार से तनाव की स्थिति बन गई थी। ग्रामीणों का आक्रोश इतना बढ़ गया था कि वन अधिकारियों को घेरने तक की नौबत आ गई थी। विशेषज्ञ टीम ने बाघ को बेहोश कर पकड़ा, चिकित्सकीय परीक्षण किया और बाद में उसे पूरी तरह स्वस्थ बताते हुए उसी दिन शाम को पन्ना टाइगर रिजर्व के हिनौता रेंज के कोर एरिया में छोड़ दिया गया। साथ ही बाघ को रेडियो कॉलर पहनाकर उसकी लगातार निगरानी किए जाने का दावा भी किया गया। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बाघ स्वस्थ था और उसकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी, तो फिर मात्र एक सप्ताह में उसकी मौत कैसे हो गई, क्या कॉलरिंग सिस्टम ने कोई संकेत नहीं दिया, क्या बाघ बीमार था, क्या रेस्क्यू के बाद उसकी हालत बिगड़ी या फिर निगरानी तंत्र केवल कागजों तक सीमित रहा, सवाल कई है। वन्यजीव विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि रेस्क्यू आॅपरेशन के दौरान उपयोग की गई बेहोशी की दवा का असर कई बार लंबे समय तक बना रह सकता है। कुछ सूत्रों द्वारा दवा के ओवरडोज की आशंका भी जताई जा रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि वन विभाग ने नहीं की है। यदि पोस्टमार्टम में ऐसा कुछ सामने आता है तो यह मामला बेहद गंभीर हो सकता है।
बाघों की सुरक्षा पर उठे सवाल
जानकार बताते हैं कि ट्रेंकुलाइजेशन के दौरान बाघ की उम्र, वजन, शारीरिक स्थिति और तनाव स्तर के अनुसार दवा की मात्रा तय की जाती है। जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसे में यदि रेस्क्यू के बाद पर्याप्त मेडिकल मॉनिटरिंग नहीं हुई हो, तो खतरा बढ़ जाता है। फिलहाल मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगा। लेकिन इस बीच वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना शुरू हो गए हैं। गौरतलब है कि इससे पहले गंगऊ अभ्यारण्य क्षेत्र में एक नर बाघ का क्षत-विक्षत कंकाल मुख्य मार्ग से कुछ दूरी पर मिला था। अनुमान था कि उसकी मौत करीब 15 दिन पहले हो चुकी थी, लेकिन वन अमले को भनक तक नहीं लगी। बाद में एक ग्रामीण की सूचना पर मामला सामने आया, जिसकी जांच एसटीएफ जबलपुर द्वारा की जा रही है। अब एक महीने के भीतर दूसरी बड़ी घटना ने पन्ना टाइगर रिजर्व की छवि पर असर डाला है। जिस रिजर्व को बाघ पुनर्वास की सफलता का राष्ट्रीय मॉडल माना जाता है, वहीं अब लगातार हो रही मौतें गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही हैं।
प्रबंधन ने बताया सिर पर रीढ़ की हड्डी में चोट
पन्ना टाइगर रिजर्व के उप संचालक द्वारा प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया गया कि वयस्क बाघ की मृत्यु की घटना पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सामने आई है। घटनास्थल पर वन्यजीव चिकित्सकों की टीम सहित डॉ. संजीव गुप्ता वन्यजीव चिकित्सक, डॉ. विनोद सिंह, श्रीमती नेहा अग्रवाल, एवं वन अमला की उपस्थिति में निरीक्षण एवं कार्यवाही की गई। घटनास्थल निरीक्षण के दौरान मृत बाघ के शरीर पर चोटों के चिन्ह पाए गए। चिकित्सकीय परीक्षण में बाघ की रीढ़ की हड्डी तथा सिर की हड्डी में चोट पाई गई। आवश्यक नमूने एकत्र कर विस्तृत जांच हेतु सुरक्षित किए गए हैं। इस बाघ को रेस्क्यू उपरांत पन्ना टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र में स्वस्थ अवस्था में रेडियो कॉलर पहनाकर छोड़ा गया था। रेडियो कॉलर के माध्यम से उसकी 24-7 निगरानी की जा रही थी। चिकित्सकीय जांच के दौरान यह भी पाया गया कि बाघ की गर्दन के हिस्से में भी अंदरूनी चोट के संकेत मिले हैं। विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट एवं वैज्ञानिक परीक्षण के उपरांत ही मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। क्षेत्र संचालक बृजेन्द्र श्रीवास्तव, उप संचालक वीरेन्द्र पटेल, सहायक संचालक कृष्णा मरावी, तहसीलदार ममता मिश्रा, चन्द्रभान तिवारी एनटीसीए प्रतिनिधि, नितिन भुर्जी मावन जागृति युवा मंच समिति पन्ना, विनोद सोनी सरपंच विक्रमपुर, एवं वन अमले की मौजूदगी में शवदाह किया गया।

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सीधी के जमोड़ी थाना क्षेत्र में राजमिस्त्री की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद हंगामा हुआ। परिजनों ने बकाया मजदूरी मांगने जाने का आरोप लगाया, जबकि मकान मालिक ने सीढ़ियों से गिरने की बात कही।
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रीवा में क्रिप्टो निवेश और जमीन एग्रीमेंट के नाम पर करोड़ों की ठगी का मामला सामने आया। पीड़ितों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया। पुलिस 50 करोड़ से अधिक की ठगी की जांच कर रही है।
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