पन्ना के पवई में 87 करोड़ की जल परियोजना के बावजूद लोगों को पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। एजेंसी और नगर परिषद के बीच तालमेल की कमी से जनता अब भी जल संकट झेलने को मजबूर है।

हाइलाइट्स:
पन्ना, स्टार समाचार वेब
नगर में शुद्ध पेयजल की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए वर्ष 2017 में मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कम्पनी के माध्यम से जिस ड्रीम प्रोजेक्ट की नींव रखी गई थी, वह 2026 में भी जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता नहीं दिख रहा है। करीब 87 करोड़ रुपये की लागत से जय वरुडी कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं रंजीत बिल्डकॉन लिमिटेड गुजरात द्वारा तैयार किया गया यह प्रोजेक्ट अब विवादों और अव्यवस्थाओं के घेरे में है। जहाँ कागजों पर 24 घंटे पानी का दावा था, वहां हकीकत में लोग बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। आलम यह है कि नगवासियों को एक घंटे भी पानी नसीब नहीं हो रहा है। नगर के विभिन्न वार्डों से आ रही शिकायतें प्रोजेक्ट की सफलता पर सवालिया निशान लगा रही हैं। वार्ड क्रमांक 15 के निवासी आशू मिश्रा का कहना है कि उनके इलाके में बमुश्किल 1 घंटे ही पानी आता है। वहंीं वार्ड क्रमांक 3 के अरुण नगायच बताते हैं कि पानी का दबाव इतना कम है कि पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाती। वार्ड क्रमांक 14 के मोनू मिश्रा ने भी समान स्थिति बताई। हालात इतने बदतर हैं कि कई इलाकों में आज भी पाइपलाइन तक नहीं बिछी है, जिसके कारण लोग हैंडपंपों और कुओं पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।
देखा जाए तो इस 87 करोड़ के भारी-भरकम प्रोजेक्ट में निर्माण के साथ-साथ 10 वर्षों के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी एजेंसी की है। एशियाई विकास बैंक के सहयोग से बनी इस योजना का उद्देश्य पतने नदी से शुद्ध पानी फिल्टर कर हर घर तक पहुँचाना था। लेकिन वर्तमान में एजेंसी और नगर परिषद के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है। शासन ने करोड़ों रुपये इसलिए बहाए ताकि लोगों को बुनियादी सुविधा मिल सके, लेकिन पवई में जिम्मेदार एक-दूसरे के पाले में गेंद डाल रहे हैं। एक ओर कंपनी विस्तार के लिए परिषद की अनुमति का इंतजार कर रही है, तो दूसरी ओर परिषद सप्लाई की कमी का रोना रो रही है। इस खींचतान के बीच 87 करोड़ का यह प्रोजेक्ट सफेद हाथी साबित हो रहा है।
5 से 6 घंटे सप्लाई
इस अव्यवस्था के संबंध में जय वरुडी कंस्ट्रक्शन कंपनी एवं रंजीत बिल्डकॉन लिमिटेड गुजरात के साइट मैनेजर सोनू राजा बुंदेला का पक्ष विरोधाभासी है। उन्होंने बताया कि नगर को दो जोन में बांटकर नियमित सप्लाई की जा रही है। वार्ड 1 से 7 तक सुबह और वार्ड 8 से 15 तक शाम को 5 से 6 घंटे की सप्लाई का दावा उन्होंने किया है।
पाइपलाइन न होने के सवाल पर उन्होंने गेंद नगर परिषद के पाले में डालते हुए कहा कि हमने 22 इलाकों में 2400 मीटर नवीन पाइपलाइन के लिए नगर परिषद को प्रस्ताव दिया था, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला। केवल वे इलाके छूटे हैं जो 2017 के बाद बसे हैं। जबकि हकीकत इसके इतर है, नगरवासी ही बताते हैं, कि पानी की सप्लाई पर्याप्त नहीं हो रही है।
नगर परिषद की आपत्ति, महज 20 मिनट मिलता है पानी
वहीं, नगर परिषद पवई के मुख्य नगर पालिका अधिकारी विनीत नगायच ने कंपनी के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उनके अनुसार, कंपनी महज 20 मिनट ही सप्लाई दे पा रही है, बाकी व्यवस्था नगर परिषद को अपने संसाधनों से करनी पड़ रही है। उन्होंने बताया कि पाइपलाइन न होने और अन्य तकनीकी खामियों को लेकर भोपाल में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में आपत्ति दर्ज कराई गई है, लेकिन अभी तक धरातल पर कोई सुधार कार्य प्रारंभ नहीं हुआ है। कुल मिलाकर सबके अपने दावे हैं, लेकिन वास्तव में इस प्रोजेक्ट का लाभ पवई के लोगों को नहीं मिल पा रहा है, जिसके चलते नगरवासियों को आज भी दूषित पानी पीने एवं पानी के लिए संघर्ष को विवश होना पड़ रहा है। यह पूरा मामला राजनैतिक हस्ताक्षेप से दूर है, किसी भी जनप्रतिनिधि ने पवई नगरवासियों की इस अहम जरूरत पर आवाज तक उठाना जरूरी नहीं समझा।


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