रीवा के श्याम शाह मेडिकल कॉलेज और संजय गांधी अस्पताल में सैकड़ों अग्निशामक यंत्रों की मियाद खत्म होने के बावजूद नए स्टीकर लगाए जाने के आरोप लगे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
प्रदेश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों में शुमार श्याम शाह मेडिकल कॉलेज और उससे संबद्ध संजय गांधी अस्पताल इन दिनों मरीजों के इलाज के लिए कम और अपनी बदइंतजामी के लिए ज्यादा चर्चा में है। ताजा मामला अस्पताल की सुरक्षा से जुड़ा है, जहाँ लगभग पौने पांच सौ अग्निशामक उपकरणों के रिफिलिंग की समय सीमा 8 माह पूर्व ही समाप्त हो चुकी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस चूक को सुधारने के बजाय, प्रबंधन द्वारा पुराने सिलेंडरों पर नए स्टीकर चिपकाकर हकीकत छिपाने का प्रयास किया जा रहा है।
कागजों में अपडेट, हकीकत में 'खतरा'
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल के निर्देशन में कथित तौर पर एक ऐसा खेल खेला जा रहा है जो हजारों जानों को जोखिम में डाल सकता है। सूत्रों के अनुसार, कॉलेज, संजय गांधी अस्पताल, जीएमएच, ओपीडी और हॉस्टल परिसर में लगे करीब पौने पांच सौ सिलेंडरों की मियाद खत्म हो चुकी है। नियमानुसार इनकी रिफिलिंग और मेंटेनेंस अनिवार्य थी, लेकिन मेंटेनेंस कराने के बजाय इन पर नए स्टीकर चस्पा कर दिए गए हैं ताकि निरीक्षण के दौरान ये 'वैध' नजर आएं।
सुरक्षा एजेंसी की चेतावनी को किया गया दरकिनार
अस्पताल की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली एजेंसी 'सुरक्षा फायरटेक इलाहाबाद' द्वारा इस संबंध में डीन को पूर्व में ही पत्राचार किया जा चुका है। पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया था कि उपकरणों की समय सीमा समाप्त हो गई है और तत्काल रिफिलिंग की आवश्यकता है। बावजूद इसके, अस्पताल प्रबंधन ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
हालिया घटना से भी नहीं लिया सबक
अभी कुछ समय पूर्व ही अस्पताल के गायनी विभाग की ओटी में आग लगने की घटना सामने आई थी। गनीमत रही कि उस वक्त स्थिति पर काबू पा लिया गया, अन्यथा परिणाम भयावह हो सकते थे। उस घटना के बाद उम्मीद थी कि प्रबंधन सचेत होगा, लेकिन वर्तमान स्थितियां बताती हैं कि प्रबंधन अभी भी किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
क्यों गहराया है खतरा
वर्तमान में तापमान 45 डिग्री के पार जा रहा है, ऐसे में शॉर्ट सर्किट और आगजनी की घटनाएं आम हो जाती हैं। यदि आग लगती है, तो इन निष्प्रभावी सिलेंडरों के अलावा अस्पताल के पास कोई दूसरा तात्कालिक विकल्प मौजूद नहीं है। अस्पताल में हर समय हजारों की संख्या में मरीज और उनके परिजन मौजूद रहते हैं, जिनके लिए भागने का रास्ता भी सीमित होता है।
प्रबंधन की चुप्पी और उठते सवाल
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या बजट का अभाव है या फिर यह प्रशासनिक अदूरदर्शिता है सरकारी संपत्ति और जनहानि की आशंका को देखते हुए क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी विंध्य के इस सबसे बड़े अस्पताल में यदि कोई अनहोनी होती है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। माना जाय तो वर्तमान में संजय गांधी अस्पताल की सुरक्षा पूरी तरह 'भगवान भरोसे' नजर आ रही है। यदि समय रहते इन उपकरणों की रिफिलिंग नहीं कराई गई और फर्जी स्टीकर की आड़ में सच्चाई छिपाई जाती रही, तो रीवा को एक बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है।


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मोहन कैबिनेट में आज कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगेगी। इसमें सबसे खास यह है कि गरीब परिवारों को आबादी की भूमि पर काबिज होने की स्थिति में नि:शुल्क रजिस्ट्री की सुविधा देने का फैसला लेने जा रही है। कैबिनेट में राजस्व विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दी जाएगी।
देश के मौसम मिजाज में बड़ा बदलाव आने वाला है। मौसम विभाग ने भविष्यवाणी की है कि दक्षिण पश्चिम मानसून किसी भी वक्त केरलम में दस्तक दे सकता है। मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड सहित देश के 17 राज्यों में भारी बारिश, ओलावृष्टि और 80 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज आंधी का अलर्ट जारी किया है।
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