रीवा में भूमाफियाओं ने फर्जी रजिस्ट्री के जरिए प्रयागराज के डॉक्टर से 1.10 करोड़ रुपये ठगने का आरोप है। नामांतरण के दौरान रिकॉर्ड फर्जी निकले, जिसके बाद पीड़ित ने आईजी से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
अब तक आपने सिर्फ जमीन बेचने में फर्जी के्रता और विक्रेता खड़ा करने का ही मामला सुना होगा। अब नया मामला फर्जी रजिस्ट्री तैयार करने का भी सामने आया है। यूपी के एक डॉक्टर को रीवा के भूमाफियाओं ने ऐसी चपत लगाई कि वह 1 करोड़ 10 लाख रुपए से हाथ धो बैठा। उसे जमीन तक नहीं मिली। अब न्याय के लिए इधर उधर भटक रहा है। पुलिस महानिरीक्षक से पीड़ित ने शिकायत की है। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।
रीवा जिस तेजी से बढ़ रहा है। उस तेजी से यहां फ्रॉड के मामले में सामने आ रहे हैं। सबसे अधिक जमीन से जुड़े प्रकरण देखने को मिल रहे हैं। यह ताजा मामला भी जमीन से ही जुड़ा है लेकिन और मामलों से हट कर है। इसमें जमीन से लेकर रजिस्ट्री तक फर्जी निकली है। पीड़ित का नाम मनोज कुमार सिंह पिता शारदा प्रसाद सिंह निवासी ग्राम पोस्ट नारीबारी, तहसील बारा जिला प्रयागराज है। मनोज कुमार पेशे से डॉक्टर हैं। इनका ससुराल रीवा के परसिया तहसील त्योंथर में है। मनोज रीवा शहर में घर बनाना चाह रहे थे। इसी के लिए वहजमीन की तलाश में थे। उन्होंने साले प्रमोद सिंह से भूमि तलाशने को कहा था। साला प्रमोद सिंह के मित्र राहल सिंह पिता कन्हैयालाल सिंह निवासी कोटरा खुर्द थाना सोहागी तहसील त्योंथर वार्ड क्रमांक 10 का अस्थाई निवासी है। राहुल सिंह, विकास सिंह और अतुल सिंह के साथ प्रापर्टी डीलिंग का काम करता है। अच्छी लोकेशन में जमीन दिलाने को इन्होंने मनोज को झांसा दिया। मनोज सिंह को बुलाकर राहुल ने कई जगह जमीनें दिखार्इं थी। इसमें सोनौरा में जमीन दिखाई। इसे लेने की सलाह दी। साला ने भूमि का निरीक्षण किया। इसके बाद मनोज सिंह को इसकी जानकारी दी गई। उन्होंने मौके पर पहुंच कर जमीन देखी और पत्नी के नाम से वर्ष 2019 में जमीन की रजिस्ट्री करा ली। इसके बाद पास में ही एक और प्लाट भी मनोज सिंह की पत्नी के नाम से रजिस्ट्री कराई गई। जमीन के लेन देने के कारण विश्वास बढ़ता गया। इसके बाद तीनों ने मिलकर लंबी प्लानिंग की और फर्जी जमीन दिखाकर एक और फर्जी रजिस्ट्री करा डाली। इसके बदले मनोज सिंह से 1 करोड़ 10 लाख तक ले लिए गए।
हूबहू ओरिजनल रजिस्ट्री जैसी कापी की गई तैयार
भूमाफियाओं ने रघुनाथगंज के जमीन की जो रजिस्ट्री तैयार की थी, वह पूरी तरह से फर्जी निकली। मनोज सिंह ने अधिवक्ता बीके माला के माध्यम से पत्रवार्ता में इस बात की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि रघुनाथगंज की जो ई रजिस्ट्री नंबर है वह एमपी 328492021ए1280390 है। इस नंबर की रजिस्ट्री रिकार्ड में मौजूद ही नहीं है। सारी जानकारी रजिस्ट्री में सही दर्ज की गई लेकिन जमीन और रजिस्ट्री का नंबर गलत और फर्जी निकला। पीड़ित मनोज कुमार ने आईजी रीवा को आवेदन देकर मामले की जांच कराने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है। भूमि विक्रेताओं ने धोखाधड़ी कर 1 करोड़ 10 लाख रुपए ठग लिए। अब इस राशि को वापस दिलाए जाने की मांग की गई है।
नामांतरण के दौरान फर्जीवाड़ा का हुआ खुलासा
जमीन खरीदने के बाद मनोज सिंह ने पटवारी को रजिस्ट्री की कापी दी और नामांतरण के लिए कहा। इसके बाद ही सारी पोल खुली। पटवारी ने जब रजिस्ट्री में दर्ज खसरा और भूमि स्वामी का नाम देखा तो उन्होंने बताया कि इस नाम से इतनी जमीन मौके पर मौजूद ही नहीं है। जिस खसरा की रजिस्ट्री कराई गई है। उसमें सिर्फ 0.21 एकड़ ही भूमि दर्ज है और भूमि स्वामी कानाम भी दूसरा है। इतना सुनने के बाद मनोज सिंह के होश ही उड़ गए। इसके बाद जब मनोज सिंह ने मामले की जांच की तो पता चला कि उनके साथ सोनौरा की जमीन की रजिस्ट्री के साथ ही धोखा किया गया। एक सही तो दूसरी फर्जी रजिस्ट्री कराई गई।
रघुनाथगंज में जमीन अच्छी लोकेशन में होने का दिया झांसा
जमीन के लेन देन के कारण मनोज सिंह और उनके साले का विश्वास विकास सिंह, अनुज सिंह और राहुल सिंह जीत लिए थे। इसी का फायदा उठाकर उन्होंने रघुनाथगंज में भी एक जमीन होने की बात कही। उन्हें इस बात की भी जानकारी थी कि मनोज सिंह को मुआवजा के रूप में मोटी रकम मिली है। इसी राशि को हथियाने के लिए उन्होंने यह सारी प्लानिंग की। उन्होंने मनोज सिंह को बताया कि रघुनाथगंज में भूमि खसरा क्रमांक 480 रकबा 0.405 हेक्टेयर मौजूद है। यह भूमि रीवा बनारस मुख्य मार्ग पर स्थित है। इसकी कीमत प्रति एकड़ क करोड़ 10 लाख होना बताया था। सब कुछ डील होने के बाद मौके पर ले जाकर जमीन भी दिखाई। बताई गई जमीन पर मनोज सिंह को खड़ा कर फोटोग्राफ भी लिया गया था। इसके बाद देनों पक्षों में खरीदी और बिक्री की बात फाइनल हो गई। राशि भी दे दी गई और रजिस्ट्री के लिए कहा गया। इसके बाद 19 मार्च 2021 को सोनौरी का एक प्लाट के साथ ही रघुनाथगंज की भूमि की भी रजिस्ट्री कराई गई थी। इसमें सोनौरा की रजिस्ट्री सही और रघुनाथगंज की फर्जी निकली।


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