रीवा और मऊगंज में सिंथेटिक एमडी ड्रग नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ। पुलिस ने 11 करोड़ रुपये से अधिक की ड्रग बरामद कर कई तस्करों को पकड़ा है। जांच अब अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह तक पहुंच गई है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
रीवा और मऊगंज जिले को ड्रग माफिया सेफ हैवेन की तरह यूज कर रहे थे। यह जानकारी 24 घंटे के अंतराल में पकड़े गये आधा दर्जन तस्करों से पूछताछ में सामने आई है। इनकी जड़े उत्तर प्रदेश और महाराष्टÑ के कई इलाकों तक फैली है, जिसे खोदने में रीवा पुलिस जुट गई है। पुलिस को अब तक 11 करोड़ से अधिक का सिंथेटिक ड्रग बरामद करने में सफलता मिली है। इसे विंध्य में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
दरअसल आईजी गौरव राजपूत के इनपुट पर रविवार की देर रात मऊगंज जिले के बिझौली में सिंथेटिक एमडी ड्रग के कारखाने का पर्दाफास किया गया था। मौके से चार आरोपी गिरफ्तार हुये थे, जिनके पास से करीब सवा करोड़ की ड्रग और उपकरण बरामद हुये थे। पूछताछ में आरोपियों ने बताया था कि वह रीवा जिले के गढ़ थाना अंतर्गत लालगांव चौकी क्षेत्र के सोनवर्षा गांव में यहां बनी ड्रग का स्टाक करते थे। इसके बाद महाराष्टÑ और उत्तर प्रदेश में सप्लाई करते थे। पुलिस ने उक्त इनपुट की तहकीकात किया तो सोनवर्षा गांव से दो और तस्कर पकड़े गये। इनके पास से 3 किलो 90 ग्राम सिंथेटिक एमडी ड्रग बरामद हुआ। जिसकी इंटरनेशनल मार्केट में कीमत 10 करोड़ 10 लाख रुपये है। आरोपियों की पहचान मंडप सिंह पुत्र राकेश सिंह 23 वर्ष एवं ज्ञानभूषण शर्मा पुत्र बुद्धसेन शर्मा 27 वर्ष दोनों निवासी सोनवर्षा के रूप में की गई है। आरोपियों ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि मऊगंज के बिझौली में ड्रग तैयार करते थे, इसके बाद सोनवर्षा में लाकर स्टाक करते थे। बाद में यहीं से ड्रग की अलग-अलग पैकेट बना कर महाराष्टÑ और उत्तर प्रदेश के जिलों में सप्लाई करते थे। फिलहाल आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।
सिंडीकेट की तरह काम करते थे तस्कर
प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि ड्रग माफियाओं का पूरा सिंडीकेट बना हुआ है। जिसमें निर्माण और सप्लाई करने वालों की अलग-अलग कटेघरी है। इसके अलावा ड्रग तैयार करने में लगने वाले केमिकल और उपकरण उपलब्ध कराने वाला ग्रुप अलग है। बहरहाल इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की तैयारी पुलिस ने कर रखी है। जिसके लिये गहन तहकीकात की जा रही है।
मोबाइल उगलेगा राज
सोनवर्षा में दस करोड़ की ड्रग के साथ पकड़े गये आरोपियों के कब्जे से दो मोबाइल भी बरामद हुये है। जिसे सायबर सेल की मदद से पुलिस खंगाल रही है। माना जा रहा है कि मोबाइल से पूरे नेटवर्क का पता चल सकता है। जिससे जांच में सहूलियत होगी। फिलहाल तो यह पता चला है कि तस्कर मऊगंज में तैयार ड्रग कोे रीवा से उत्तर प्रदेश के लखनऊ और कानपुर समेत महाराष्टÑ के नागपुर, पूणे और मुंबई तक भेजते थे।
जन चौपाल का दिखा असर
माना जा रहा है कि आईजी गौरव राजपूत के द्वारा शुरू किये गये अभिनव पहल जन चौपाल पुलिस आपके द्वार का ही नतीजा है कि आॅपरेशन प्रहार 2.0 को बड़ी सफलता मिल रही है। जन चौपाल का ही नतीजा है कि मऊगंज में चोरी छिपे चल रही एमडी ड्रग बनाने के कारखाने का खुलासा हुआ है। जिसके चलते अब तक 11 करोड़ से अधिक का हाई प्रोफाइल सिंथेटिक एमडी ड्रग बरामद हुआ है।
टीम में ये रहे शामिल
एसपी गुरुकरण सिंह ने बताया कि सोमवार की देर रात जब सूचना मिली कि सोनवर्षा गांव में एमडी ड्रग की सप्लाई करने वाले तस्कर मौजूद हैं तो तत्कालिक रूप से टीम तैयार की गई। टीम में गढ़ थाना प्रभारी अवनीश पाण्डेय, आईजी कार्यालय सायबर सेल प्रभारी एसआई मृगेन्द्र सिंह, लालगांव चौकी प्रभारी प्रशांत शुक्ला, एएसआई महेन्द्र त्रिपाठी, प्रधान आरक्षक शिवाजीत मिश्रा, अशोक सिंह, जीतेन्द्र सेन, आरक्षक अखिल सिंह, शुभम बरोरे, संजय कुमार नापित, धीरज कुमार, मयंक तिवारी आदि शामिल थे।
मुखबिर की सूचना पर सोनवर्षा गांव में दबिश देकर दो तस्करों को पकड़ा गया है। इनके कब्जे से 3 किलो से अधिक सिंथेटिक एमडी ड्रग बरामद हुई है। जिसकी अंतर्राष्टÑीय बाजार में कीमत 10 करोड़ 10 लाख रुपये है। आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है। ये ड्रग मऊगंज में पकड़े गये कारखाने में तैयार की गई थी। जिसे महाराष्टÑ और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में सप्लाई करने की तैयारी थी। पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है।
गौरव राजपूत, आईजी रीवा जोन


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