रीवा के कुठुलिया स्थित प्रदेश के एकमात्र फल अनुसंधान केंद्र को आईसीएआर से पुनः अनुमोदन मिल गया है। इससे आम और अमरूद अनुसंधान, संरक्षण तथा किसानों और वैज्ञानिकों को बड़ी राहत मिली है।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
रीवा के कुठुलिया में स्थित प्रदेश का इकलौता फल अनुसंधान केंद्र अब बंद नहीं होगा। प्रबंधन और स्थानीय जन प्रतिनिधियों के प्रयासों से आईसीएआर बेंगलूरू ने इसका पुन: अनुमोदन कर दिया है। इस आदेश के बाद प्रबंधन में खुशी की लहर है। यहां आम और अमरूद की सैकड़ों वैरायटी तैयार की जाती है। जो देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक भेजी जाती है।
उल्लेखनीय हे कि कृषि महाविद्यालय रीवा का कुठुलिया में वर्षों पुराना फल अनुसंधान केंद्र संचालित है। लेकिन अक्टूबर 2025 में आईसीएआर ने इसकी फंडिंग बंद करने का निर्णय लिया था। जिससे ना सिर्फ कृषि महाविद्यालय प्रबंधन बल्कि रीवा के रहने वाले लोगों में मायूसी छा गई थी। बाद में प्रबंधन समेत उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, सांसद जनार्दन मिश्रा समेत अनेक संगठनों ने आईसीएआर बेंगलूरु में पत्राचार कर फल अनुसंधान केंद्र को सुचारू रहने का आग्रह किया था। जिसका नतीजा रहा कि गत दिवस आईसीएआर ने फल अनुसंधान केंद्र का पुन: अनुमोदन कर दिया है। इस उपलब्धि पर अधिष्ठाता डॉ़ एसके त्रिपाठी, डा़ॅ रघुराज किशोर तिवारी एवं डा़ॅ टीके सिंह ने उप मुख्यमंत्री एवं सांसद से मिलकर धन्यबाद दिया। इस उपलब्धि के लिए कृषि महाविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केन्द्र के प्राध्यापकों एवं वैज्ञानिकों के साथ साथ अधिकारियों एवं कर्मचारियों में हर्ष व्याप्त है।
67 एकड़ में फैला है केंद्र
बताया जाता है कि कुठुलिया का फल अनुसंधान केंद्र करीब 67 एकड़ में फैला है। इसकी स्थापना 1980 में की गई थी। तब से यहां पर आम और अमरूद के पौधों पर रिसर्च चल रहा है। यहां पर आम के करीब 24 सौ और अमरूद के 2100 से अधिक पौधे लगे हुये हैं। जिनकी देखरेख करने के लिये 26 श्रमिकों को तैनात किया गया है।
तैयार की जाती हैं आम की 237 किस्म
जानकारी के अनुसार रीवा के कुठुलिया में स्थित फल अनुसंधान केंद्र में आम और अमरूद के पौधों पर रीसर्च किया जाता है। यहां पर आम की 237 वैरायटी तैयार की जाती है। वहीं अमरूद की भी 80 प्रजापतियां पाई जाती हैं। इसमें से सुंदरजा आम को जीआई टैगिंग भी गत वर्ष प्रदान की गई है।

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