प्रदेश की नि:शुल्क शव वाहन सेवा से हजारों परिवारों को राहत मिली है, लेकिन रीवा में 9 महीनों में 1,129 मौतों के आंकड़े ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कार्यप्रणाली और इलाज व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
प्रदेश सरकार द्वारा शुरू की गई 'नि:शुल्क शव वाहन सेवा' गरीबों और जरूरतमंदों के लिए बड़े संकट का सहारा बनी है। पिछले 9 महीनों में प्रदेश भर में 20 हजार 508 मृतकों के परिजनों को इस सेवा का सीधा लाभ मिला है। इस योजना के क्रियान्वयन में रीवा जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहा है, जहां 1,129 मृतकों के शवों को सम्मानपूर्वक उनके घरों तक पहुंचाया गया। वहीं, हाल ही में बना नया जिला मऊगंज इस सूची में सबसे नीचे 117 रहा है। यह आंकड़ा एक तरफ जहां संकट की घड़ी में गरीब परिवारों को मिल रही आर्थिक राहत को दर्शाता है, वहीं दूसरी तरफ रीवा जैसे बड़े स्वास्थ्य केंद्र में मौतों की इतनी बड़ी संख्या वहां की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
एक समय था जब प्रदेश के विभिन्न जिलों से शव को कंधे, खाट या साइकिल पर ले जाने की दिल दहला देने वाली तस्वीरें सामने आती थीं, जो सीधे तौर पर व्यवस्था को आईना दिखाती थीं। इस गंभीर समस्या को खत्म करने के लिए सरकार ने सभी जिलों में नि:शुल्क शव वाहन के संचालन की व्यवस्था बनाई। वर्तमान में 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन करने वाली कंपनी जेएईएस को ही इस नि:शुल्क शव वाहन सेवा की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके तहत सरकारी अस्पताल में किसी भी मरीज के निधन पर शव को पूरी तरह नि:शुल्क उनके निवास स्थान या श्मशान घाट तक पहुंचाया जा रहा है।
सराहनीय पहल, लेकिन मौतों का आंकड़ा चिंताजनक
रीवा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, संजय गांधी मेडिकल कॉलेज और एक हाईटेक जिला अस्पताल होने के बावजूद 9 महीने में 1,129 लोगों की मौत होना स्वास्थ्य प्रबंधन की विफलता को भी उजागर करता है। सरकार भले ही नि:शुल्क सेवा देकर परिजनों का दर्द कम कर रही हो, लेकिन इन मरीजों की जान बचाने में सरकारी तंत्र नाकाम साबित हो रहा है। आंकड़ों को अगर देखें तो प्रदेश में 9 महीने के भीतर सर्वाधिक मौतें रीवा जिले में हुई हैं। जबकि दूसरे स्थान पर छिंदवाड़ा में 790 एवं सबसे नीचे पायदान में मऊगंज 117 मौत होना बताया गया है।
किसे और कैसे मिलेगी यह सुविधा
यह सुविधा केवल उन लोगों के लिए है जिनके परिजन का निधन शासकीय अस्पताल मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी में उपचार के दौरान हुआ हो। इसके अलावा यदि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम हुआ है, तो भी वाहन उपलब्ध कराया जाता है। शासकीय अस्पताल से शव को मृतक के निवास स्थान या श्मशान घाट तक सम्मानपूर्वक छोड़ा जाता है।
इस सेवा का मुख्य उद्देश्य शासकीय अस्पतालों में मृत्यु होने की स्थिति में मृतक को सम्मानपूर्वक उनके परिजनों तक पहुंचाना और अंतिम यात्रा को गरिमामय बनाना है। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर एवं जरूरतमंद परिवारों को कठिन समय में राहत और सहयोग प्रदान करना है।
- तरुण सिंह परिहार, सीनियर मैनेजर शासकीय शव वाहन सेवा, मप्र


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के शिवाजी नगर स्थित सिद्धांता सुपर स्पेशलिटी अस्पताल पर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए उसका लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) की जांच में अस्पताल के संचालन में 19 गंभीर खामियां पाई गईं।
मध्यप्रदेश सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से बाजार से 3,600 करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया है। इस नई उधारी के बाद राज्य पर कुल कर्ज का बोझ 5.40 लाख करोड़ रुपए के पार पहुंच गया है। जानिए क्या हैं इसके आंकड़े और शर्तें।
भोपाल में रहवासी इलाकों में नगर निगम की कमर्शियल सीलिंग कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों ने भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के बैनर तले रोशनपुरा चौराहे पर प्रदर्शन किया। सीएम हाउस जा रहे व्यापारियों को पुलिस ने रोका।
एमपी के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में सीबीआई चार्जशीट के बाद ट्रायल उसी कोर्ट में ट्रांसफर हो गया है जहां से अग्रिम जमानत मिली थी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। कैबिनेट ने भोपाल में पश्चिमी बाइपास की पुनरीक्षित लागत को स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही, सेवानिवृत्त आईपीएस की सलाहकार के पद पर नियुक्ति और आरजीपीवी को तीन हिस्सों में बांटने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई है।
कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी के केस में मंत्री विजय शाह को लोक भवन से राहत मिलने की उम्मीद लगाई जा रही है। चूंकि अब मामला राज्यपाल के पास पहुंच गया है। इधर, इसी बीच मंगलवार को मंत्री विजय शाह के विरुद्ध मुकदमा चलाने की अनुमति देने की मांग कांग्रेस विधायक दल ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल से की है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल में प्रतिभावान विद्यार्थियों के लिए आयोजित लैपटॉप वितरण समारोह का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने मप्र माध्यमिक शिक्षा मंडल की 12वीं की परीक्षा में 75 फीसदी या उससे अधिक अंक पाने वाले 1 लाख 22 हजार से अधिक मेधावी विद्यार्थियों के बैंक खातों में लैपटॉप के लिए 25-25 हजार रुपए (कुल 304.98 करोड़ रुपए) सिंगल क्लिक से ट्रांसफर किए।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को जल्द ही नया मुख्य न्यायाधीश मिलने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने गुजरात हाईकोर्ट के जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की है। गुजरात सरकार की ओर से 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े कई मामलों में उन्होंने पैरवी की।
मध्य प्रदेश के ओरछा में संपन्न हुई बीजेपी की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक। 2028 के विधानसभा चुनाव, संगठन की मजबूती और सरकार की उपलब्धियों पर हुआ बड़ा मंथन।
भोपाल स्थित स्वास्थ्य संचालनालय में कोर्ट के आदेश पर कुर्की की कार्रवाई हुई। कोलकाता की कंपनी के 50 लाख के बकाए (ब्याज समेत 4 करोड़) के चलते गाड़ियां और दफ्तर का सामान कुर्क किया गया।