रीवा में पुरी धाम की परंपरा अनुसार भगवान जगन्नाथ को दिव्य औषधि अर्पित की गई। उपचार पूर्ण होने के बाद 16 जुलाई को भगवान रथ यात्रा के माध्यम से नगर भ्रमण कर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
पुरी धाम की तर्ज पर जिले में राजतंत्र से लेकर वर्तमान प्रजातंत्र में परम्परा का निर्वहन करते हुए भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का आयोजन होता आ रहा है। एक समय था जब रथ यात्रा में शानो शौकत दिखाई देती थी। लक्ष्मणबाग स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में रविवार को विशेष औषधि दिए जाने की परम्परा का निर्वहन वैद्य ओमप्रकाश पसारी के निर्देशन में किया गया।
डेढ़ सौ साल से भी ज्यादा समय से पुरीधाम की तर्ज पर रीवा जिले में रथ यात्रा महोत्सव का आयोजन होता आ रहा है। एक समय ऐसा भी जब यह परम्परा ठाठ-बाट से आयोजित होती थी। जिसमें शामिल होने के लिए दूर-दूर भगवान जगन्नाथ के भक्त आया करते थे। अब यह आयोजन काफी कुछ सिमटता सा जा रहा है। दरअसल भगवान जगन्नाथ को लेकर जो कथायें प्रचलित है उसमें जेष्ठ माह की पूर्णिमा को दिव्य स्रान के बाद उन्हें लू लग जाती है और वे अपने बड़े भाई बलभद्र तथा सुभद्रा के साथ गर्भ ग्रह से बाहर आ जाते हैं। पन्द्रह दिनों तक भगवान श्री को फलों का रस, खिचड़ी के साथ-साथ औषधियां दी जाती है। समय-समय पर वैद्य उनकी नब्ज टटोल कर औषधि देते है। वहीं विशेष औषधि दी जाती है जिसके बाद वे स्वस्थ्य हो जाते है।
इस वर्ष प्रभु श्री के उपचार की अंतिम प्रक्रिया रविवार को वैद्य डॉ. ओमप्रकाश पसारी के निर्देशन में हुई जिसमें पुजारियों के साथ-साथ श्रद्धालु भी मंदिर पहुंचे हुए थे।
इसलिए करते हैं भक्त यात्रा का इंतजार
दरअसल पुरीधाम में भगवान श्री के गर्भग्रह में प्रवेश को लेकर कुछ प्रतिबंध लगे हुए है, जिसका सख्ती से पालन किया जाता है। जिसकी वजह से भक्तों को उनके दर्शन के लिए मुख्य द्वार के समीप से ही पूजा अर्चना करनी पड़ती है। जबकि भगवान स्वयं वर्ष में एक बार अपने भक्तों का हाल-चाल जानने के लिए खुद रथ पर सवार को होकर भ्रमण पर निकलते हैं। यही वजह है कि इसे श्रद्धालु जो भगवान श्री दर्शन मंदिर के भीतर नहीं कर पाते थे। उनके लिए यह अवसर अत्यंत लाभदायक रहता है। यही वजह है कि न केवल पुरीधाम बल्कि जिले में भी भारी संख्या में श्रद्धालु प्रभु का दर्शन एवं पूजा अर्चना करने के लिए सड़क पर आते हैं। यहां गौरतलब बात यह है कि रथ यात्रा का आयोजन 16 जुलाई को किया जाना है। जिसमें यात्रा लक्ष्मण बाग से प्रारंभ होगी। जो वहां से चलकर सीधे किला पहुंचेगी। जहां उनकी विधिवत पूजा अर्चना की जाएगी। जहां से यात्रा फोर्ट रोड, स्टेच्यू चौराहा से होते हुए जय स्तंभ, पुराना बस स्टैण्ड से होकर ताला हाउस मार्ग से मानस पहुंचेगी। जहां रात्रि विश्राम करेगी।
भगवान ने खाई दवाई
अस्वस्थ्य चल रहे भगवान श्री को लगातार उपचार दिया जा रहा था। वहीं अंतिम चरण में दिव्य औषधि दी गई जिसमें खसखस, काली मिर्च, सौंफ, लौंग, इलायची के अलावा अन्य औषधियां भी शामिल थी। जिसे भगवान श्री को खिलाया गया जिसके बाद वे स्वस्थ्य हुए और महास्रान के बाद अपने-अपने भक्तों का हाल-चाल जानने के लिए रथ पर सवार होकर भक्तों का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
मालपुआ का लगेगा भोग
यात्रा के दौरान भगवान को जामुन, आम, बतासा का अर्पण भक्तों द्वारा किया जाएगा। वहीं रात्रि विश्राम के बाद 17 जुलाई को मानस भवन में भात, कढ़ी व मालपुआ का भोग लगाकर श्रद्धालुओं को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाएगा। औषधि वितरण के दौरान डॉ. प्रभाकर चतुर्वेदी, भागवत शास्त्री, कृष्णकांत द्विवेदी, अनिल द्विवेदी, जगउदीश द्विवेदी, अंकित मिश्रा आदि मौजूद रहे।


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