रीवा में रिश्वत लेते पकड़े गए लोक सेवकों पर सालों बाद भी कार्रवाई नहीं। लोकायुक्त की सुस्ती और कोर्ट में चालान पेश न होने से आरोपी विभागों में यथावत काम कर रहे।

हाइलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
पद की गरिमा को तार तार करने वाले लोक सेवकों को लोकायुक्त ने रिश्वत लेते पकड़ा था। ट्रैप की कार्रवाई हुए सालों बीत गए लेकिन एक भी लोकायुक्त निलंबित नहीं हुआ। अभियोजन स्वीकृति लेने में लोकायुक्त ने देरी कर दी। अब यही लोकायुक्त सिस्टम को धता बता रहे हैं। मुंह चिड़ा रहे हैं। सरकार ने नियम शिथिल कर दिए लेकिन फिर भी कोर्ट में चालान लोकायुक्त पुटअप नहीं कर पाया।
आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में रिश्वत लेने वाले लोकासेवकों के खिलाफ लोकायुक्त और ईओडब्लू ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की। स्वास्थ्य से लेकर राजस्व, पुलिस और शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा लोक सेवक धरे गए। इन पकड़े गए लोकसेवकों पर सिर्फ प्रकरण दर्ज हुआ। इसके अलावा लोकायुक्त आगे की कार्रवाई नहीं कर पाया। ट्रैप की कार्रवाई हुए कई मामलों में 5 साल से अधिक का समय गुजर गया है। जिन्होंने रिश्वत ली और पकड़े गए वह अब अपने पुराने कर्मों को भूल कर नए सिरे से पैर पसार चुके हैं। सजा मिलने में देरी से अब लोगों का विश्वास भी टूटता जा रहा है। सरकार ने ऐसे लोकसेवकों को सजा दिलाने के लिए नियमों में भी बदलाव कर दिया फिर भी लोकायुक्त चालान पेश करने में देरी कर रही है। रीवा में ऐसे कई लोक सेवक हैं जो लाखों रुपए की रिश्वत लेते पकड़े गए लेकिन अब भी विभाग में यथावत काम कर रहे हैं। निलंबित तक नहीं हुए।
शासन ने बदल दिया है नियम
ट्रैप की कार्रवाई में फंसने वाले लोकसेवकों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश करने के पहले लोकायुक्त को शासन से अभियोजन स्वीकृति लेनी पड़ती थी। यह लंबी प्रक्रिया थी। पहले शासन से स्वीकृति मिलती थी। इसमें लंबा समय लगने के कारण शासन ने नियमों में बदलाव कर दिया। 23 दिसंबर 2024 को नया नियम शासन ने लागू कर दिया। इसमें नियोक्ता को सीधे तौर पर अभियोजन स्वीकृति देने के आदेश दे दिए गए। इसके बाद भी लोकायुक्त इसमें तेजी नहीं ला पा रहा है।
केस नंबर 1: 5.60 लाख रिश्वत लेते पकड़ाया था लेखापाल
लोकायुक्त रीवा ने मऊगंज बीईओ कार्यालय में पदस्थ राजाराम गुप्ता लेखापाल को रिश्वत लेते ट्रेप किया था। रिटायर्ड हेडमास्टर से एरियर और अर्जित अवकाश के स्वत्वों के भुगतान के लिए 50 फीसदी राशि यानि 5 लाख् 60 हजार रुपए की मांग की थी। 30 हजार ले चुके थे। 50 हजार नगद और शेष का चेक लेते लोकायुक्त ने ट्रेप किया था। तब से अब तक उनके खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ी।
केस नंबर 2: 10 हजार लेते पकड़ाया था स्थापना का बाबू
डीईओ आफिस रीवा में पदस्थ स्थापना बाबू विजय शर्मा वर्ष 2023 में ट्रैप हुए थे। उन्होंने एक निलंबित शिक्षक की बहाली के लिए 50 हजार रुपए की मांग की थी। 5 हजार रुपए शिक्षक से पहले ही ले चुके थे। 10 हजार रुपए लेते लोकायुक्त ने उन्हें ट्रैप किया था।
केस नंबर 3: 50 हजार रुपए लेते पकड़ाया था लेखापाल
इसी तरह शिक्षा विभाग का ही लेखापाल दयाशंकर अवस्थी 50 हजार रुपए लेते अगस्त 2024 में लोकायुक्त के हाथों ट्रेप हुआ था। रिटायर्ड शिक्षक से स्वत्वों के भुगतान के बदले डेढ़ लाख रुपए की मांग की थी। रायपुर कर्चुलियान में बीईओ कार्यालय में पदस्थ रहते दयाशंकर अवस्थी ने रुपए की मांग की थी। टीन शेड के नीचे पकड़ा गया था।
केस नंबर 4: एमएलसी बनाने मांगे थे 50 हजार
संजय गांधी अस्पताल में पदस्थ सीएमओ डॉ अलख प्रकाश को जुलाई 2021 में लोकायुक्त ने ट्रैप किया था। एमएलसी बनाने के बदले 50 हजार रुपए की मांग की थी। 20 हजार में डील फाइनल हुई थी। 10 हजार रुपए क्लीनिक में लेते ट्रैप हुए थे। तब से अब तक यथावत काम कर रहे हैं।
केस नंबर 5: मेडिकल कॉलेज का बाबू पकड़ाया था
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज में पदस्थ बाबू भूपेन्द्र सिंह को लोकायुक्त ने दिसंबर 2022 में ट्रैप किया था। बाबू ने मेडिकल का बिल पास करने के एवज में 15 हजार रुपए की मांग की थी। शिकायत पर लोकायुक्त ने बाबू को 15 हजार रुपए लेते ट्रैप किया था। ट्रैप की कार्रवाई के बाद इन्हें मेडिकल कॉलेज से हटाते हुए सुपर स्पेशलिटी भेज दिया गया था। बाद में फिर से मेडिकल कॉलेज में ही पदस्थ हैं।
प्रक्रिया चल रही है। नया नियम आया है। जल्द ही जितने भी लंबित प्रकरण हैं, उसमें कार्रवाई की जाएगी।
सुनील पाटीदार, एसपी लोकायुक्त रीवा

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