रीवा के टीकर जंगल में कटनी मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड को बाक्साइड खदान की मंजूरी, 31 हेक्टेयर वन भूमि प्रभावित, हजारों पेड़ों की कटाई और वन्यजीवों पर खतरे को लेकर चिंता बढ़ी

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
जंगल के नीचे दबी बाक्साइट पर खनिज कारोबारियों की नजर गड़ गई है। दो कंपनियों ने वन भूमि को लीज पर लेने के लिए जोर लगाया था। एक को केन्द्र सरकार से स्वीकृति मिल गई है। कटनी मिनरल्स की फाइल मप्र शासन ने केन्द्र सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजी थी। केन्द्र सरकार ने स्वीकृति प्रदान कर दी है। टीकर में 31 हेक्टेयर में बाक्साइट खदान लगाने की अनुमति दे दी गई है। हालांकि इसके पहले उन्हें सरकार के टर्म एंड कंडीशन को पूरा करना होगा।
मिली जानकारी के अनुसार रीवा के टीकर में बाक्साइड की प्रचुर मात्रा मौजूद है। वन क्षेत्र के नीचे बाक्साइट का भंडार है। इस जगह पर किरण देवी वर्मा की दो खदाने 14 साल पहले सिर्फ दो हेक्टेयर में ही संचालित होती थी। लीज खत्म होने के बाद खदानें बंद हो गई थी। अब इसी बाक्साइट पर किरण देवी वर्मा की फर्म के अलावा कटनी की एक फर्म कटनी मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड ने दोबारा खदान शुरू करने के लिए आवेदन किया था। लीज रिन्यू करने का आवेदन किया था। दोनों ही कंपनियों ने वन विभाग के पास वन भूमि आवंटित कराने के लिए आवेदन किया है। इनकी फाइलें रीवा से लेकर भोपाल तक दौड़ रही है। इनमें से एक कंपनी की लाटरी लग गई है। कटनी मिनरल्स की फाइल मप्र शासन ने केन्द्र सरकार के पास स्वीकृति के लिए भेजी थी। स्वीकृति मिल गई है। इस कटनी मिनरल्स के प्रस्ताव को केन्द्र से स्वीकृति मिली है। उसका प्रस्ताव क्रमांक एफपी/एमपी/एमआईएन/ क्यूआरवाय/ 437171/2023 है।
करीब 75 एकड़ जंगल होगा प्रभावित
जानकारी के अनुसार टीकर वन क्षेत्र में कटनी की कंपनी कटनी मिनरल्स प्राइवेट लिमिटेड ने पहले 28 हेक्टेयर भूमि आवंटित कराने के लिए आवेदन किया था। बाद में इसमें आपत्ति लगी तो रास्ते के लिए भी करीब 3 हेक्टेयर की मांग की गई। कुल 31.416 हेक्टेयर वन भूमि की डिमांड की गई। रीवा डीएफओ कार्यालय फाइल पहुंची। जांच और प्रतिवेदन के साथ वापस फाइल भोपाल भेजी गई। भोपाल से केन्द्र सरकार के पास फाइल स्वीकृति के लिए भेजी गई। सरकार ने वन भूमि पर बाक्साइट खदान खोलने की सशर्त अनुमति दे दी है।
किरण देवी वर्मा की फाइल अभी लटकी हुई है
इसके अलावा किरण देवी वर्मा ने करीब 80 एकड़ भूमि के लिए आवेदन किया है। इसमें किरण देवी वर्मा दो अलग अलग खदानों के लिए 40-40 एकड़ भूमि की डिमांड की है। इनकी पहले भी यहां खदान संचालित थी, जो लीज अवधि खत्म होने के कारण बंद हो गई थी। अब इसे ही रिन्यू कराना चाह रहे हैं। इनकी फाइल पर अभी फैसला नहीं हो पाया है।
वर्तमान में टीकर के जंगल में हाथियों का है डेरा
टीकर का जंगल काफी घना है। 14 साल पहले संचालित बाक्साइट की खदान बंद हो चुकी है। इस दौरान यहां तेजी से पौधरोपण किया गया। अब यहां जंगल काफी घना है। कई वन्यजीव भी यहां रहते हैं। शाकाहारी वन्यजीवों के अलावा बाघ और तेंदुओं का भी मूवमेंट यहां देखने को मिलता है। इसके अलावा वर्तमान में हाथी का जोड़ा भी इसी जंगल में डेरा जमाए हुए हैं। खदान खुलने से पेड़ों की कटाई तो होगी ही हाथी का जोड़ा भी प्रभावित होगा।
हजारों पेड़ों की चढ़ जाएगी बलि
टीकर में आरएफ 35 रेंज रीवा में खदान की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह क्षेत्र काफी घना है। यहां करीब 4 से 6 हजार पेड़ प्रभावित होंगे। 31 हेक्टेयर वन भूमि में 28.079 हेक्टेयर भूमि में खदान खोली जाएगी। इसके अलावा करीब 3 हेक्टेयर भूमि रास्ता बनाने में उपयोग किया जाएगा। इसमें भी कई पेड़ों की बलि ली जाएगी।
एल्यूमीनियम का मुख्य अयस्क है बाक्साइट
बाक्साइट का उपयोग मुख्य रूप से एल्युमीनियम धातु के उत्पादन में होगा है। बाक्साइट काफी महंगा बिकता है। एल्युमीनियम का उपयोग सोडा कैन से लेकर हवाई जहाज तक में उपयोग किया जाता है। टीकर में बाक्साइट का खनन करने के बाद इसे उड़ीसा जैसे राज्यों में एल्युमीनियम उत्पादन के लिए भेजा जाएगा।


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