सतना-मैहर में दिव्यांगों के 800 से अधिक पद रिक्त होने का दावा है। रोजगार और आरक्षण के लंबित पद भरने, आयोग गठन, प्रमाण-पत्र सत्यापन और योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की मांग उठी है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
एक ओर सरकार कमजोर वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाओं का संचालन कर रही है तो दूसरी ओर इसी वर्ग से आने वाले कमजोर वर्ग के दिव्यांगों को लेकर उपेक्षा बरती जा रही है। हालात यह हैं दिव्यांगों के सतना व मैहर जिले में 800 से अधिक पद रिक्त हैं जिनकी भर्ती करने से संबंधित विभाग कतरा रहा है। नतीजतन दोनो जिलों के तकरीबन 800 दिव्यांग इस आशा के साथ रोजगार कार्यालय के चक्कर काट रहे है कि शायद किसी दिन सरकार उनकी भी सुध ले। सूत्रों के अनुसार सतना-मैहर समेत समूचे प्रदेश में तकरीबन 23 हजार दिव्यांगों के पद खाली है जिन्हे भरने के लिए फिलहाल कोई गंभीर कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। दिव्यांगों के प्रति बरती जा रही इस उदासीनता ने जिले के दिव्यांगों को आक्रोशित कर दिया है जिसके चलते दिव्यांगों ने कलेक्टर को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन देकर इन पदों को भरने की मांग की है। सतना में दिव्यांगों ने नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिखकर गुजारिश की गई है कि उन्हें उनका हक दिलाया जाय।
सबसे बड़ा सवाल-वास्तविक दिव्यांग अभ्यर्थी का हक
दिव्यांग आरक्षण का उद्देश्य उन अभ्यर्थियों को अवसर उपलब्ध कराना है, जो निर्धारित पात्रता रखते हैं। यदि कोई अपात्र व्यक्ति आरक्षित पद का लाभ लेकर नियुक्त होता है और बाद में उसकी पात्रता पर सवाल सामने आते हैं तो उसका असर उस वास्तविक पात्र अभ्यर्थी पर पड़ सकता है, जो उसी पद के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहा था। इसीलिए दिव्यांग कोटे से हुई नियुक्तियों में पारदर्शी पुनर्सत्यापन की मांग उठ रही है। इसमें मूल प्रमाण-पत्र, सक्षम चिकित्सा बोर्ड की रिपोर्ट, नियुक्ति के समय प्रस्तुत दस्तावेज और चयन प्रक्रिया की जांच शामिल होनी चाहिए। साथ ही किसी कर्मचारी को केवल शिकायत के आधार पर दोषी मानने के बजाय सक्षम जांच के निष्कर्ष को कार्रवाई का आधार बनाया जाना जरूरी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं की पहुंच भी चुनौती
दिव्यांगजनों की समस्या केवल सरकारी नौकरी तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले अनेक दिव्यांगजन पेंशन, आवास, शौचालय, सहायक उपकरण, शिक्षा और रोजगार जैसी योजनाओं का लाभ लेने के लिए सरकारी व्यवस्था पर निर्भर हैं। गंभीर और बहुदिव्यांग लोगों के लिए कार्यालयों तक पहुंचना कठिन होता है। ऐसे में गांवों में विशेष शिविर लगाकर दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, विशिष्ट दिव्यांग पहचान-पत्र, पेंशन, आवास और सहायक उपकरण से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत है। सरकारी विभागों में दिव्यांगों के लिए आरक्षित पदों की स्थिति भी सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है। रिक्त पदों और लंबित आरक्षण की जानकारी सामने आने के बाद विशेष भर्ती अभियान चलाकर पात्र अभ्यर्थियों को अवसर दिया जा सकता है।
पेंशन से लेकर रोजगार तक कई मांगें
दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दों में पेंशन राशि बढ़ाने, समय पर सीधे बैंक खातों में भुगतान, विशिष्ट दिव्यांग पहचान-पत्र बनाने, सहायक उपकरण उपलब्ध कराने, दिव्यांग बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की व्यवस्था और सार्वजनिक भवनों को सुगम बनाने की मांग शामिल है। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए अलग हेल्पलाइन अथवा प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था बनाने और प्रत्येक शिकायत के निस्तारण की समय सीमा तय करने की जरूरत भी बताई जा रही है। सरकारी नौकरियों में आरक्षित पदों का बैकलॉग भरने और स्वरोजगार के लिए आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुख है।
सतना से उठी आयोग गठन कर अपात्रों को चिन्हित करने की मांग
इसी क्रम में रामपुर बघेलान तहसील के ग्राम खरवाही निवासी मुकेश अग्निहोत्री ने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र पेषित कर मध्यप्रदेश में दिव्यांगजन आयोग के गठन की मांग की है। अग्निहोत्री स्वयं दिव्यांग हैं और दिव्यांगजनों से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि दिव्यांगजनों की शिकायतों के समयबद्ध निराकरण के लिए प्रभावी आयोग गठित किया जाए और उसे आवश्यक अधिकार दिए जाएं। उन्होंने दिव्यांग कोटे से सरकारी नौकरी प्राप्त करने वालों के प्रमाण-पत्रों और पात्रता की जांच के लिए विशेष समिति गठित करने की मांग भी की है। अग्निहोत्री ने सतना सहित प्रत्येक जिले में विशेष रोजगार शिविर लगाने, आरक्षित रिक्त पद भरने, ग्रामीण क्षेत्रों में शिविर लगाकर पात्र दिव्यांगजनों को योजनाओं का लाभ देने, पेंशन राशि बढ़ाने, आवास एवं शौचालय उपलब्ध कराने और सहायक उपकरण मुहैया कराने की मांग की है। उन्होंने दिव्यांगजन बोर्ड की कार्यप्रणाली और वहां हुई नियुक्तियों की वैधानिकता की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी रखी है। उनका कहना है कि यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन प्रमाणित हो तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। जिले के दिव्यांगों की मांग है कि सितंबर 2026 में ही दिव्यांगजन आयोग के गठन की दिशा में निर्णय लिया जाए और ऐसी व्यवस्था बने जिसमें दिव्यांगजनों को अपने अधिकारों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उनका कहना है कि दिव्यांगजन दया नहीं, बल्कि अधिकार, सम्मान और समान अवसर चाहते हैं।

सतना-मैहर में दिव्यांगों के 800 से अधिक पद रिक्त होने का दावा है। रोजगार और आरक्षण के लंबित पद भरने, आयोग गठन, प्रमाण-पत्र सत्यापन और योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की मांग उठी है।
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