सतना नगर निगम महापौर पद के आरक्षण से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भाजपा और कांग्रेस में कई संभावित दावेदारों के नाम चर्चा में हैं, जबकि अंतिम तस्वीर आरक्षण प्रक्रिया के बाद ही साफ होगी।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
नगरीय निकाय चुनाव को भले ही अभी एक साल से ज्यादा का समय बकाया हो, लेकिन महापौर और नगर पालिका, नगर पंचायत अध्यक्षों के पद के आरक्षण के लिए नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा अधिकारी नियुक्त किए जाने के साथ ही इसकी हलचलें तेज हो गई हैं। नगर निगम सतना महापौर के पद की आरक्षण प्रक्रिया भले ही 4 से 6 माह में पूर्ण होगी और तय होगा कि इस बार महापौर का पद किस वर्ग के लिए आरक्षित होगा? लेकिन महापौर कौन हो सकता है? किस पार्टी से कौन प्रमुख दावेदार हो सकता है। भाजपा- कांग्रेस के अलावा अन्य राजनीतिक दलों व निर्दलीय तौर पर कौन सामने आ सकता है, इन सबकी चर्चाएं तेज हो गई हैं। महापौर को लेकर चर्चाओं में अभी तक जो नाम निकलकर सामने आ रहे हैं उनमें राजनीतिक घरानों के अलावा निकाय की राजनीति में मौजूदा समय में सक्रिय कई चेहरे शामिल हैं। वर्तमान परिषद के स्पीकर से लेकर पार्षद, पूर्व महापौर, पूर्व पार्षद और सक्रिय राजनीति में अहम भूमिका निभाने वाले कई चेहरे इस दौड़ में शामिल हैं।
एक साल पहले से ही सरगर्मियां बढ़ी, अब सिर्फ आरक्षण का इंतजार
यदि नगर निगम सतना में महापौर का पद अनारक्षित रहता है तो सत्तारूढ़ दल भाजपा से कौन- कौन दावेदार हो सकते हैं, यदि इसकी बात की जाए तो यहां दावेदारों की लम्बी फौज है लेकिन पार्टी जिन पर दांव लगा सकती है ऐसे आधा दर्जन के करीब नेता हैं पार्टी जिन्हें आने वाले समय में मौका दे सकती है उनमें सामान्य वर्ग से आने वाले नेताओं के अलावा नगर निगम के पूर्व स्पीकर अनिल जायसवाल का नाम भी प्रमुखता से लिया जा रहा है। दो अलग-अलग वार्डों से दो बार पार्षद रहे श्री जायसवाल की धर्मपत्नी श्रीमती ललिता जायसवाल भी एक बार वार्ड क्रमांक-42 से पार्षद रह चुकी हैं। पूर्व स्पीकर के पास नगरीय निकाय की राजनीति का अच्छा- खासा अनुभव है।
भाजपा आने वाले समय में किसे टिकट देगी यह तो आरक्षण के बाद ही तय होगा लेकिन अभी से महापौर पद के लिए शुरू हो चुकी जनचर्चाओं में इस पद के लिए लोगों की जुबान पर एक नाम फिर से आ रहा है और वह नाम है पूर्व महापौर पुष्कर सिंह तोमर का। लोगों का कहना है कि महापौर का पद अनारक्षित होने पर वे एक बार फिर से इस पद के लिए प्रबल दावेदार होंगे। श्री तोमर के अलावा पार्टी नेता मनीष तिवारी का नाम भी इस दौड़ में शामिल बताया जा रहा है।
नगरीय निकाय की राजनीति में पिछले कुछ समय से प्रदेश के चर्चित चेहरों में शामिल नगर निगम के मौजूदा स्पीकर राजेश चतुर्वेदी पालन को भी महापौर पद अनारक्षित होने पर इस पद के लिए पार्टी से प्रबल दावेदार माना जा रहा है। दूसरी बार के पार्षद श्री चतुर्वेदी के नाम सर्वाधिक मतों से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड का है। वे मौजूदा कार्यकाल में 2022 मतों से चुनाव जीत कर पार्षद निर्वाचित हुए थे। लगभग 3600 मतदाताओं वाले वार्ड 32 में चुनाव के समय 2900 वोट पड़े थे जिसमें से राजेश चतुर्वेदी पालन 2057 वोटों से चुनाव जीते थे। इससे पहले 2009 में भी ये पार्षद रहे। राजनीतिक घराने से ताल्लुकात रखने वाले श्री चतुर्वेदी के पिता भी नगर निगम और नगर पालिका के पार्षद रहे हैं। नगरीय निकाय की राजनीति के माहिर खिलाड़ी श्री चतुर्वेदी उस समय प्रदेश भर में सुर्खियों में आए थे जब विपक्ष ने इनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन दिया था, तब श्री चतुर्वेदी ने अपनी कार्यकुशलता से विपक्ष के प्रस्ताव को फ्लोर पर आने से पहले ही जहां धराशयी किया बल्कि कांग्रेस के कई पार्षदों को भी अपनी तरफ कर लिया, जिस तरह से ये पार्टी के कार्य और वार्ड में सक्रिय रहते हैं इससे इनकी दावेदारी भी किसी से कम नहीं है।
भाजपा के कब्जे वाली नगर निगम सतना में पार्टी से महापौर टिकट के प्रबल दावेदारों की यदि बात की जाए तो इसमें पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य नरेन्द्र त्रिपाठी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। 2016 से 2023 तक दो बार लगातार भाजपा के जिला अध्यक्ष रहे नरेन्द्र त्रिपाठी वर्तमान में सीधी जिले के संगठन प्रभारी हैं। संगठनात्मक क्षमता के धनी श्री त्रिपाठी सबको साथ लेकर चल सकते हैं।
भगवती पाण्डेय भले भाजपा के जिला अध्यक्ष हैं लेकिन यदि महापौर का पद अनारक्षित होता है तो पार्टी से टिकट के दावेदारों में प्रमुखता से इनका भी नाम सामने रहेगा। 2014 में वार्ड क्रमांक-22 से पार्षद रहे हैं और 2009 में इसी वार्ड से इनकी पत्नी भी पार्षद रह चुकी हैं। श्री पाण्डेय ने अपने कार्यकाल के दौरान जिस तरह की सक्रियता दिखाई इसको देखते हुए इनके नाम पर भी पार्टी अवश्य विचार करेगी।
महापौर का पद अनारक्षित होने की स्थित में टिकट के लिए पार्टी के पूर्व जिला उपाध्यक्ष श्रीराम मिश्रा की दावेदारी को भी कम नहीं आंका जा सकता हैं। पार्टी के उत्सव और एनजीओ प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक रह चुके श्री मिश्रा 2018 के विधानसभा चुनाव में रीवा संभाग के सह चुनाव प्रभारी भी रह चुके हैं। दो बार पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रहे श्री मिश्रा के पास संगठनात्मक संरचना का अच्छा खासा अनुभव है।
महापौर का पद अनारक्षित होने की स्थिति में टिकट के दावेदारों में सिंधी समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले संजय तीर्थवानी का नाम भी प्रमुखता से शामिल रहेगा। वर्तमान में विंध्य विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संजय तीर्थवानी पार्टी के पूर्वी और दीनदयाल उपाध्याय मंडल के अध्यक्ष,पार्टी के जिला उपाध्यक्ष रहे और युवा मोर्चा में भी सक्रिय रहे। श्री तीर्थवानी संगठन में लगातार सक्रिय रहे हैं।
अनारक्षित महिला आधा दर्जन से ज्यादा दावेदार
आने वाले समय में यदि सतना नगर निगम में महापौर का पद महिला के लिए आरक्षित होता है तो इस दौरान भाजपा से आधा दर्जन से ज्यादा महिलाएं टिकट की दावेदारी करती नजर आ सकती हैं। इनमें जो नाम अभी सामने आ रहे हैं उनमें भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश महामंत्री स्वप्ना वर्मा, महिला वित्त विकास निगम की पूर्व अध्यक्ष अंजू सिंह, भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सीमा यादव, पूर्व महापौर विमला पांडेय, ममता पांडेय के अलावा वार्ड क्र. 42 की वर्तमान पार्षद वंदना सिंह तोमर का नाम भी सामने आ रहा है। श्रीमती तोमर का घराना नगरीय निकाय की राजनीति वर्षों से कर रहा है। इनका शहर में एक अपना अलग जनाधार है,इनके पति प्रसेनजीत सिंह तोमर दो अलग-अलग वार्डों (24 एवं 42) से पार्षद रह चुके हैं। महापौर का पद अनारक्षित महिला होने पर पार्टी के जिलाध्यक्ष भगवती पांडेय की पत्नी आरती पांडेय की भी मजबूत दावेदारी रहेगी। वे नगर निगम के वार्ड क्र. 22 से पार्षद व भाजपा की जिला मंत्री भी रह चुकी हैं। इतना ही नहीं टिकट की दावेदारों में वार्ड क्र. 25 की वर्तमान पार्षद नम्रता सुशील सिंह भी शामिल हैं। वे इससे पहले 2009 में वार्ड नं. 26 से पार्षद रह चुकी हैं जबकि वार्ड क्र. 23 और 25 से इनके पति सुशील सिंह मुन्ना और 2004 में वार्ड क्र. 23 से उनके देवर राजेश सिंह निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे।
ओबीसी महिला यहां भी कम दावेदार नहीं
यदि महापौर का पद ओबीसी महिला के खाते में जाता है तो यहां भी भाजपा में टिकट के लिए महिला नेत्रियों की लम्बी कतार है जिसमें सबसे प्रमुख नाम सतना सांसद गणेश सिंह के छोटे भाई उमेश सिंह लाला की पत्नी और जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष सुधा सिंह, वर्तमान महापौर योगेश ताम्रकार की पत्नी अनीता ताम्रकार, चित्रकूट विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष की पत्नी व पूर्व पार्षद मधु यादव तथा महिला मोर्चा की पूर्व जिलाध्यक्ष नीता सोनी का नाम सामने आ रहा है।
कई अन्य चेहरे भी आ सकते हैं सामने
नगरीय चुनाव के समय महापौर पद के आरक्षण व परिस्थितियों के हिसाब से कई और चेहरे भी सामने आ सकते हैं,जो अभी पर्दे के पीछे हैं और समय का इंतजार कर रहे हैं। इनमें शहर के कई प्रतिष्ठित राजनीतिक घराने की महिलाएं अनारक्षित व ओबीसी महिला होने पर पर्दे के सामने आकर चुनावी समर में किस्मत आजमा सकती हैं। फिलहाल अभी इसके लिए 4 से 6 माह का समय है, अभी तो सिर्फ कयासों का दौर चल रहा है। महापौर का पद अनारक्षित होने की स्थिति में शहर में कई ऐसे नेता हैं जो चुनावी समर में अपनी किस्मत आजमा सकते हैं, फिलहाल वे अभी सामने नहीं आ रहे हैं वे इस बात के इंतजार में हैं कि आरक्षण के बाद की स्थिति सामने आ जाए उसके बाद वे अपने पत्ते खोलें। बहरहाल सतना नगर निगम अनारक्षित होने पर जो और नाम सामने आ सकते हैं उनमें बसपा से सतना विधानसभा में अपनी किस्मत आजमा चुके रत्नाकर चतुर्वेदी शिवा, बसपा से ही विधानसभा प्रत्याशी रहे व्यापारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले अनिल अग्रहरि शिवा, समाजसेवी शम्भू चरण दुबे का नाम चर्चाओं में है।
कांग्रेस : पति-पत्नी की जोड़ी का भी दावा
महापौर का पद अनारक्षित होने या अनारक्षित महिला होने पर पति-पत्नी की जोड़ी महापौर की टिकट के लिए प्रबल दावेदारों के रूप में कांग्रेस में उभरकर सामने आ रही है। अनारक्षित होने पर कांग्रेस से महापौर के टिकट की प्रबल दावेदारों की बात की जाए तो नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामकुमार तिवारी का नाम सबसे पहले नम्बर पर है। दो अलग-अलग वार्डों से तीन बार के पार्षद (2000, 2005 एवं 2010 में इनका कार्यकाल क्रमश: वार्ड क्र. 30 और 33 से पार्षद के तौर पर रहा) जबकि वर्तमान समय में इनकी पत्नी रजनी तिवारी वार्ड क्र. 31 से पार्षद हैं, श्रीमती तिवारी लगातार दूसरी बार पार्षद हैं, ये 2014 में वार्ड क्र. 33 से पार्षद रह चुकी हैं। यदि अनारक्षित महिला महापौर का पद होता है तो कांग्रेस से रजनी रामकुमार तिवारी टिकट की प्रबल दावेदार मानी जा रही हैं। श्रीमती तिवारी की ही तरह ही महिला कांग्रेस की पूर्व उपाध्यक्ष उर्मिला त्रिपाठी के दावे को भी कम नहीं आंका जा सकता है। लगभग एक दशक से ज्यादा समय तक महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रहीं श्रीमती त्रिपाठी पर पार्टी ने महापौर के चुनाव में एक बार भरोसा जताया भी है। इसी तरह एक नाम सविता अग्रवाल का सामने आ रहा है वे वर्तमान में शहर कांग्रेस कमेटी की महासचिव हैं। महापौर का पद अनारक्षित होने की स्थित में पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामकुमार तिवारी के अलावा कांग्रेस से महापौर की टिकट के लिए अन्य जिन नामों की चर्चा सामने आ रही है उनमें वर्तमान विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा, कांग्रेस के प्रदेश सचिव राजभान सिंह राज, युकां के पूर्व लोकसभा अध्यक्ष राजदीप सिंह मोनू, वर्तमान नेता प्रतिपक्ष मिथलेश सिंह एवं रितेश त्रिपाठी और अजय सोनी का नाम शामिल है।
प्रीति कुशवाहा हो सकती हैं चेहरा
यदि महापौर का पद ओबीसी महिला के खाते में जाता है तो कांग्रेस की तरफ से पार्टी के जिला अध्यक्ष व सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा की पत्नी पूर्व जिला पंचायत सदस्य प्रीती कुशवाहा कांग्रेस का चेहरा हो सकती हैं। बहरहाल प्रीति के अलावा कांग्रेस में ओबीसी महिला का कोई ऐसा बड़ा नाम सामने नजर नहीं आ रहा जिस पर कांग्रेस दांव लगा सके।


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