सतना नगर निगम में आरटीआई से मस्टरकर्मियों की तैनाती को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। सफाईकर्मी दूसरी शाखाओं और कार्यालयों में काम कर रहे हैं। वेतन पर सालाना 17.58 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर की गलियों में कचरे के ढेर, नालियों में गंदगी और सफाईकर्मियों की कमी की शिकायतें आम हैं। नगर निगम का तर्क अक्सर यही रहता है कि संसाधन और कर्मचारी पर्याप्त नहीं हैं। लेकिन इसी निगम के मस्टर रोल में दर्ज कर्मचारियों की तैनाती का ब्यौरा एक अलग ही तस्वीर सामने रखता है। सफाई के लिए नियुक्त कर्मचारी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बना रहे हैं, विवाह पंजीयन संभाल रहे हैं, निर्वाचन और जनगणना शाखाओं में काम कर रहे हैं। कोई जीपीएफ और आवक-जावक में बैठा है तो किसी की तैनाती पार्क, बाजार और जलकर शाखा में बताई गई है। आरोप तो यहां तक हैं कि कुछ कर्मचारी अधिकारियों के आवासों, वाहनों और निजी कामों में भी लगाए गए हैं। यानी शहर की सफाई के लिए वेतन पाने वाले कई कर्मचारी दूसरे कामों में खपाए जा रहे हैं, जबकि सफाई व्यवस्था पर सवाल लगातार बने हुए हैं। नगर निगम में कुल 1096 मस्टरकर्मी दर्ज हैं। इनके वेतन पर हर महीने 1 करोड़ 46 लाख 48 हजार 915 रुपये खर्च हो रहे हैं। सालाना यह रकम करीब 17 करोड़ 58 लाख रुपये बैठती है। आरटीआई से मिली तैनाती की जानकारी के मुताबिक सफाई संरक्षक श्रेणी के कर्मचारियों सहित बड़ी संख्या में मस्टरकर्मी अपने मूल काम से इतर दूसरी शाखाओं में लगाए गए हैं। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि कर्मचारी कहां काम कर रहे हैं, बल्कि यह भी है कि उनकी तैनाती किस अधिकारी के आदेश से हुई, उनकी हाजिरी कौन लेता है और शहर की सफाई के लिए निर्धारित मानवबल का उपयोग आखिर कहां हो रहा है?
सफाई के नाम पर नियुक्ति, काम दूसरी शाखाओं में
आरटीआई में सामने आई सूची के अनुसार सफाईकर्मी जन्म-मृत्यु शाखा, विवाह पंजीयन, निर्वाचन, जनगणना, बाजार, राजस्व, प्रधानमंत्री आवास, जीपीएफ, जलकर, आवक-जावक और पार्क शाखा में काम कर रहे हैं। कुछ कर्मचारियों के वाहन संचालन में लगाए जाने का भी उल्लेख है। इनमें ऐसे नाम भी हैं जिनकी तैनाती कार्यालयों और अधिकारियों से जुड़े परिसरों में बताई गई है। आरटीआई से मिली जानकारी में सतीश कुमार वर्मा की तैनाती जन्म-मृत्यु शाखा, ओमप्रकाश सिंह की विवाह पंजीयन शाखा और राधेश कुमार सेन की राजस्व शाखा में बताई गई है। राकेश बाल्मीक को वार्ड क्रमांक 7 में एक टीआई के यहां पर तथा नीरज चुटेलकर को भाजपा कार्यालय में लगाए जाने का उल्लेख है। अंजली गंगवानी और माधुरी जन्म-मृत्यु शाखा में, दुर्गा प्रसाद कुशवाहा और राजकुमार सहायक स्वास्थ्य अधिकारी से जुड़े कार्यों में तैनात बताए गए हैं। दिवांश शेवड़े आवक-जावक शाखा में, रानी बाल्मीक, पिंकी खरे और अमर कुमार करोसिया नगर निगम कार्यालय में काम कर रहे हैं। इसी सूची में अमित सिंह, शिपेंद्र कुमार, सोनचंद्र, राहुल वंशकार, रानी सेन, अनंत राज मलिक और अमित कुमार के नाम पार्क शाखा में दर्ज बताए गए हैं। सचिन कुमार की तैनाती लोडर वाहन के साथ धारकुंडी महाराज के यहां बताई गई है। विनय जानवे और मनीष नए बस स्टैंड, राहुल प्रजापति जनगणना शाखा, अजय कुमार कोल निर्वाचन शाखा और अरुण प्रसाद बाजार शाखा में तैनात बताए गए हैं। नरेंद्र कुमार कुशवाहा उपायुक्त कार्यालय, पूजा धौलपुरी जन्म-मृत्यु शाखा, चंपा और संतोष कुमार डोमार सहायक स्वास्थ्य अधिकारी के आवास, सतीश कुमार धर्मकांटा, संजय कुमार बाल्मीक कलेक्ट्रेट परिसर तथा प्रीति गंगहार हेमू कालानी पार्क में लगाए जाने का उल्लेख है। इसके अलावा आशीष की तैनाती जीपीएफ शाखा, कपिल की आवक-जावक, अनामिका की प्रधानमंत्री आवास, जतिन की सूत्र सेवा, स्वाति कुशवाहा की विवाह पंजीयन और विद्या की जलकर शाखा में बताई गई है। रवि शंकर नामक कर्मचारी के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी का वाहन चलाने की जानकारी भी दी गई है।
पार्षद ने मांगा भौतिक सत्यापन
वार्ड क्रमांक 25 की पार्षद नम्रता सिंह ने परिषद अध्यक्ष को पत्र देकर 1096 मस्टरकर्मियों की संख्या और कार्यस्थलों का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है। उन्होंने पार्षदों और अधिकारियों का संयुक्त जांच दल गठित करने तथा गड़बड़ी मिलने पर वैधानिक कार्रवाई की मांग की है। अब निगम प्रशासन के सामने सीधा सवाल है—कितने कर्मचारी सफाई के काम में लगे हैं, कितने दूसरी शाखाओं में और कितनों की ड्यूटी निजी परिसरों या अन्य कामों में लगाई गई है? नियुक्ति आदेश, पदस्थापना, उपस्थिति और वेतन भुगतान का मिलान कर स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। हर महीने 1.46 करोड़ रुपये वेतन पर खर्च करने वाले निगम को यह बताना होगा कि इस रकम के बदले शहर को कितनी सफाई मिल रही है। आखिर सफाईकर्मी बाबू का काम करेगा, साहब की गाड़ी चलाएगा या आवास पर सेवा देगा तो शहर की सफाई कौन करेगा?
हाजिरी तक पहुंच चुकी लोकायुक्त की टीम
मस्टरकर्मियों की उपस्थिति का मामला हाल ही में लोकायुक्त कार्रवाई तक पहुंचा था। 18 अक्टूबर को रीवा लोकायुक्त की टीम ने सफाई सुपरवाइजर बालकृष्ण आदिवासी को कथित तौर पर दो हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा था। शिकायत में हाजिरी कम दर्ज करने का आरोप लगाया गया था। ऐसे में अब यह सवाल और अहम हो जाता है कि जो कर्मचारी जिस शाखा या स्थान पर तैनात बताए जा रहे हैं, उनकी वास्तविक उपस्थिति का सत्यापन कौन करता है? मस्टर रजिस्टर में दर्ज हाजिरी और कर्मचारी के वास्तविक कार्यस्थल का मिलान नियमित रूप से होता है या नहीं?
नियुक्तियों और अतिरिक्त मानवबल सवालों के घेरे में
मस्टरकर्मियों की नियुक्तियों को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं। आरोप हैं कि कुछ नियुक्तियां वर्तमान और पूर्व पार्षदों तथा निगम के वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिजनों या करीबियों की हुई हैं। सफाई संरक्षक-1 श्रेणी के 55 कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर विवाद और न्यायालयीन प्रक्रिया का उल्लेख भी किया जा रहा है। इसकी स्थिति नियुक्ति आदेशों और न्यायालयीन अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकती है। केवल रिश्तेदारी के आधार पर नियुक्ति को गलत नहीं कहा जा सकता, लेकिन यदि भर्ती प्रक्रिया में नियमों के उल्लंघन की शिकायत है तो उसकी जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, 1096 मस्टरकर्मियों के अलावा आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था भी है। ऐसे में अतिरिक्त मानवबल की जरूरत तय करने से पहले मौजूदा कर्मचारियों की वास्तविक तैनाती और काम का आकलन जरूरी है।
ठेके पर जलप्रदाय फिर 155 कर्मचारी क्या कर रहे थे?
जलप्रदाय शाखा में 155 मस्टरकर्मी दर्ज हैं। इनके वेतन पर हर महीने 22 लाख 63 हजार 647 रुपये खर्च हो रहे हैं। दूसरी ओर, जानकारी के मुताबिक पिछले करीब एक साल से जलप्रदाय व्यवस्था निजी ठेके पर संचालित की जा रही थी। ऐसे में निगम को बताना चाहिए कि ठेका अवधि में इन 155 कर्मचारियों की वास्तविक जिम्मेदारी क्या थी? क्या वे ठेकेदार के अधीन काम कर रहे थे, निगरानी कर रहे थे या उन्हें दूसरी शाखाओं में भेज दिया गया था? टंकियों, फिल्टर प्लांट, पंप संचालन, पाइपलाइन और हैंडपंपों की देखरेख किसके जिम्मे थी?


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तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
रीवा के भाटी गांव में जून से खराब कृषि ट्रांसफार्मर नहीं बदले गए। बिल जमा होने के बावजूद बिजली आपूर्ति बहाल नहीं होने से रबी की बोनी और सिंचाई प्रभावित है। किसान ने धरने की चेतावनी दी।
रीवा के गोविंदगढ़ में जनविश्वास अभियान के तहत जिला पंचायत सीईओ सृष्टि देशमुख ने अस्पताल, पीएमश्री स्कूल और आंगनवाड़ी का निरीक्षण किया। गर्भवती महिलाओं की जांच, विद्यार्थियों की उपस्थिति और बच्चों के पोषण पर निर्देश दिए।
रीवा के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एनएबीएच सर्टिफिकेट रिन्युअल के निरीक्षण में कई कमियां सामने आईं। जांच से पहले एसजीएमएच से स्टाफ, एम्बुलेंस और उपकरण जुटाने के आरोप हैं। सोनोग्राफी लाइसेंस भी एक्सपायर्ड मिले।
सीधी के अमरपुर बेहड़ा मोड़ पर यात्री बस और ऑल्टो कार की टक्कर में तीन लोगों की मौत हो गई। पांच वर्षीय बच्ची गंभीर घायल हुई। पुलिस हादसे के कारणों की जांच कर रही है।
दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस में सफर कर रही गर्भवती महिला को सतना स्टेशन पर चिकित्सा सहायता दी गई। जिला अस्पताल ले जाते समय एंबुलेंस में बच्ची का जन्म हुआ। रेलवे स्टाफ की तत्परता से मां-बेटी दोनों स्वस्थ हैं।
सतना नगर निगम में आरटीआई से मस्टरकर्मियों की तैनाती को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। सफाईकर्मी दूसरी शाखाओं और कार्यालयों में काम कर रहे हैं। वेतन पर सालाना 17.58 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं।
मैहर के लटागांव में पुरानी रंजिश के चलते धनीराम कोल की पत्थर से हत्या करने वाले सुशील कुमार को अदालत ने दोषी ठहराया। प्रथम अपर सत्र न्यायालय ने आजीवन कारावास और एक हजार रुपये अर्थदंड सुनाया।
सतना के परसमनिया में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत प्रशासन ने जनसुनवाई की। उचेहरा की 3905 लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों में से 3150 का निराकरण किया गया, जबकि 755 शिकायतें अब भी लंबित हैं।
सतना में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत खोवा मंडी के पास नया आयुष विंग बनकर तैयार हुआ। अस्पताल से दूरी के कारण मरीजों को आयुर्वेद और एलोपैथी उपचार के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाना पड़ेगा।
सतना के मझगवां भट्टा में कृषि भूमि पर कथित अवैध प्लॉटिंग की शिकायतों के बावजूद पटवारी रिपोर्ट में अतिक्रमण नहीं मिला। एसडीएम के जांच निर्देश, विक्रय पत्र और न्यायालय के स्थगन आदेश जांच के दायरे में हैं।