सतना कृषि उपज मंडी में गेहूं एमएसपी से अधिक दाम पर बिक रहा, 2605 रुपये तक भाव पहुंचे, बेहतर भुगतान से किसान आकर्षित, उपार्जन केंद्रों में घट रही भीड़, बाजार में मांग बनी मजबूत

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
एक ओर किसानों के सामने उपार्जन के लिए तमाम परेशानियां खड़ी हैं। न स्लॉट बुक पा रहे न ही उपज लोड हो पा रही जिसके चलते उसका गुस्सा सड़क तक आ रहा है। इसके दूसरी ओर कृषि उपज मंडी में बिना झंझट के उनकी उपज बिक रही है। ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पिछले 5 दिनों में कृषि उपज मंडी में गेहूं के दाम न केवल सरकारी समर्थन मूल्य का छू पाए बल्कि इससे ज्यादा भी बिक गया। कृषि उपज मंडी के 5 दिनों के आवक की पड़ताल की। जिसमें पता चला कि गेहूं का उच्चतम दाम 2 हजार 5 सौ 90 रुपए से लेकर 2 हजार 6 सौ 5 रुपए तक गया। यानि उच्चतम दाम को बोनस (40 रुपए का अतिरिक्त लाभ मध्यप्रदेश सरकार दे रही है) बिना देखा जाय तो 5 से 20 रुपए तक अधिक में बिका। यह रेट 26 अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल तक लिए गए हैं।
उपार्जन केन्द्रों से किसानों की दूरी
मध्यप्रदेश शासन के बोनस को जोड़ दिया जाय तो गेहूं की उपज बेचने वाले किसानों को 40 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे इस तरह से केन्द्र सरकार की एमएसपी 2 हजार 5 सौ 85 और मध्यप्रदेश शासन का बोनस जोड़ कर 2 हजार 6 सौ 25 रुपए हो जाता है। इस बात को लेकर देखा जाय तो मंडी में 2 हजार 6 सौ 5 रुपए तक गेहूं बिक चुका है यानि साफ है कि भले ही 20 रुपए कम रहा हो लेकिन जिस तरह से मंडी में गेहूं के रेट बढेÞ हैं वैसे में सरकारी के उपार्जन केन्द्रों की भीड़ कम जाएगी। यही कारण भी है कि उपार्जन केन्द्रों में औसत भीड़ से भी किसानों की आमद कम है।
औसत खरीदी में मंडी पीछे
गेहूं खरीदी का औसत देखा जाय तो मंडी की आवक कम है। इसमें करीब 13 हजार मीट्रिक टल कर अंतर आ रहा है। मंडी में पिछले पांच दिनों में औसतन 25 हजार मीट्रिक टन गेहूं की आवक दर्ज की गई जबकि उपार्जन केन्द्रों में यह औसत 38 हजार मीट्रिक टन रहा। हालांकि यह इनके 15 दिन का हिसाब किताब है। मंडी की आवक सूची अनुसार औसतन 5000 बोरा गेहूं की आवक बनी हुई है। इस हिसाब से मंडी में रोजाना 2.50 लाख क्विंटल गेहूं की बिक्री हुई। यह 25 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन के हिसाब से रही। जबकि 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक उपार्जन केन्द्रों में 5.83 लाख मीट्रिक टन गेहूं उपार्जित किया गया इसका प्रतिदिन का औसत करीब 38 हजार मीट्रिक टन है। इस हिसाब से 13 हजार मीट्रिक टन का साफ फर्क है।
सरकार ने एक्सपोर्ट खोल रखा है इसका असर मंडी की आवक में दिख रहा है। प्रतिस्पर्धी दौर में आकर्षण आवश्यक है जिस कारण मंडी में दाम किसानों को बढ़िया मिल रहे हैं।
विनोद अग्रवाल, अनाज व्यापारी
गेहूं के बाई प्रोडक्ट ज्यादा है। जिसके कारण डिमांड बढ़ी हुई है। यही सीजन भी है जब मांग बढ़ती ही बढ़ती है। अच्छे दाम मिल रहे और भुगतान समय पर नगद हो रहा है तो इससे अच्छा क्या है।
सुभाष पांडेय, युवा किसान नेता
तुलनात्मक रूप से अराइवल कम है। लेकिन डिमांड के आधार पर दाम तय करते हैं व्यापारी भाई। इसी कारण दाम ठीक मिल रहे हैं। हालांकि ही यह सीजन का भी असर है।
करुणेश कुमार तिवारी, सहायक संचालक, कृषि उपज मंडी


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