सतना जिला अस्पताल की पहली मंजिल पर एक साल पहले लगी टाइल्स उखड़ने लगी हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है और निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सतना से अन्य जिलों को भेजे गए खराब चावल पर सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला प्रबंधक को नोटिस जारी कर गुणवत्ता और परिवहन खर्च की जिम्मेदारी पर जवाब मांगा गया है।
इंदौर में दूषित पानी से मौतों के बाद सतना नगर निगम सतर्क हुआ। महापौर के निर्देश पर फिल्टर प्लांट, केमिकल शुद्धता, टंकियों की सफाई और पेयजल सप्लाई की थर्ड पार्टी जांच के आदेश दिए गए।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में विश्वस्तरीय शिक्षा के लिए टास्क फोर्स के गठन का निर्देश दिया। ASU, पर्ड्यू और एशिया यूनिवर्सिटी से अध्ययन केंद्र स्थापित करने के लिए संवाद तेज है, जिससे स्थानीय विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शोध के अवसर मिलेंगे।
सतना में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। रात में बनी डामर सड़क का सुबह उखड़ जाना नगर निगम और संविदाकारों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप खड़े करता है। आठ करोड़ की स्टेशन रोड परियोजना से लेकर 10 करोड़ की डामरीकरण योजना तक सब पर भ्रष्टाचार और अनियमितता की गूंज।
NCERT ने 12वीं साइंस स्ट्रीम के छात्रों के लिए SWAYAM पोर्टल पर फिजिक्स, केमिस्ट्री और साइकोलॉजी के निःशुल्क ऑनलाइन कोर्स शुरू किए हैं। कोर्स अवधि, रजिस्ट्रेशन और परीक्षा की तिथियां यहां देखें।
दीपावली से दो दिन पहले मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) खराब श्रेणी में पहुंच गया है। MPPCB के आंकड़ों के अनुसार, कई स्थानों पर AQI 175 के पार है। वाहनों की भीड़, धूल और आतिशबाजी से बढ़ रहे इस प्रदूषण से स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा है। जानें मौजूदा स्थिति, कारण और बचाव के उपाय।
मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) ने गुणवत्तापूर्ण और स्थिर वोल्टेज पर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश के 417 में से 412 सबस्टेशनों पर कैपेसिटर बैंक सक्रिय कर दिए हैं। सीधी जिले के पांच सबस्टेशनों पर 84 एमवीएआर क्षमता स्थापित की गई है। इस पहल से उपभोक्ताओं को मानक वोल्टेज पर भरोसेमंद बिजली उपलब्ध हो रही है।
रीवा के 150 करोड़ के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक्स-रे विभाग की दीवार और पिलर में दरार आ गई है। पहले से ही सीवेज, सीपेज और फॉल सीलिंग गिरने जैसी खामियों से घिरे इस अस्पताल की गुणवत्ता पर फिर सवाल उठे हैं। पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से मरीजों की जान पर संकट।
सीधी जिले की धौहनी विधानसभा में ठोंगा से जमुआ तक बनने वाली 3.30 किमी सड़क भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई। 2.77 करोड़ की लागत से बनी इस सड़क में मुख्य अभियंता की जांच में गंभीर कमियां उजागर हुईं। सड़क की मोटाई, बिटुमिनस लेयर और गुणवत्ता तकनीकी प्राक्कलन से कम पाई गई। ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की मिलीभगत पर सवाल।






















