सतना जिला अस्पताल में हीमोफीलिया मरीजों के लिए हब सेंटर संचालित है। सात जिलों के 72 मरीजों को मुफ्त इंजेक्शन, डे केयर सेंटर और विशेषज्ञ निगरानी की सुविधा मिल रही है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
हीमोफीलिया से पीड़ित मरीजों का इलाज सिर्फ सतना में ही संभव है। जिला अस्पताल में हीमोफीलिया डे केयर सेंटर भी स्थापित है, जहां मरीजों को दिन भर के लिए आब्जर्वेशन में रखा जाता है। दो संभागों रीवा और शहडोल के बीच हीमोफीलिया पीड़ितों के लिए सतना को हब सेंटर बनाया गया है। 7 जिलों के बीच हीमोफीलिया के 72 मरीज रजिस्टर्ड हैं। वर्तमान में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप द्विवेदी इसके प्रभारी नोडल आॅफिसर हैं जिन्हें निगरानी की जिम्मेदारी दी गई। 7 जिलों के हीमोफीलिया मरीजों को सतना के जिला अस्पताल में हजारों रुपए का इंजेक्शन नि:शुल्क लगाया जाता है। जिला अस्पताल में सतना, रीवा, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल और अनूपपुर को मिलाकर 69 मरीज हीमोफीलिया से दो-चार हो रहे हैं।
एक्सीडेंट या चोट ले सकती है जान
चिकित्सकों के अनुसार हीमोफीलिया एक ऐसी अनुवांशिक बीमारी है, जिसमें हल्की चोट के बावजूद खून बहता रहता है और बहता हुआ यह खून आसानी से जमता नहीं है। हालांकि सही देखभाल फैक्टर रिप्लेसमेंट थेरेपी, जीवन शैली में बदलाव से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। हीमोफीलिया तीन प्रकार के होते हैं, ए, बी और सी। हीमोफीलिया पीड़ित को एक्सीडेंट या चोट कई बार जानलेवा भी साबित हो सकती है, क्योंकि खून का बहना आसानी से बंद नहीं होता। इसलिए उन्हें चोट के तुरंत बाद चिकित्सक से परामर्श लेना चाहिए क्योंकि बहार खून नहीं निकलता लेकिन अंदर ही अंदर खून बहता रहता है। हीमोफीलिया का सबसे बड़ा कारण है, रक्त में प्रोटीन की कमी। जिससे क्लॉटिंग फैक्टर पर असर पड़ता है।
उपलब्ध कराए गए हैं इंजेक्शन
ब्लड सेल की देखरेख में जिला अस्पताल को हीमोफीलिया के उपचार के लिए 2 फैक्टर 8 और 9 में काम आने वाले इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। चोट लगने के बाद खून को रोकने के लिए फैक्टर इंजेक्शन लगाया जाता है जो कि खून का थक्का बनने में सहायक होता है। इसमें से कोई एक प्रकार का फैक्टर मरीज को दिया जाता है। मरीज की आयु, वजन एवं जानल ब्लीडिंग के प्रकार के आधार पर फैक्टर का डोज निर्धारित किया जाता है।
एक मरीज पर सालाना 50 हजार का खर्च
आपको बता दें कि 'हीमोफीलिया बी जीन थेरेपी' दवा की एक खुराक इतनी ज्यादा महंगी है कि यह आम आदमी के पॉकेट से काफी दूर है। इस बीमारी के मरीज को पूरी जिंदगी दवाई खानी पड़ती है साथ ही उसे यह भी डर सताता है कि किसी वजह से उसे कहीं चोट न लग जाए। गरीब मरीजों के लिए इस इलाज पर खर्चा करना संभव नहीं है। हीमोफीलिया के मरीज का सालाना खर्च औसतन 50 हजार रुपए होता है। इन मरीजों को लगने वाले आर फैक्टर और इंजेक्शन की कीमत हजारों में होती है। मरीज के ठीक होते-होते लगभग 50 से साठ हजार रुपए के इंजेक्शन भी लग जाते हैं। हालांकि शासन द्वारा ये इंजेक्शन जिला अस्पताल में नि:शुल्क उपलब्ध हैं।
7 जिलों के हीमोफीलिया पीड़ितों के लिए सतना हब सेंटर है। यहां जिला अस्पताल में ऐसे मरीजों के लिए नि:शुल्क इंजेक्शन उपलब्ध हैं। मरीजों को डे केयर सेंटर में रखकर उनकी निगरानी की जाती है। उन्हें हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं।
डॉ. संदीप द्विवेदी, प्रभारी नोडल आॅफिसर


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

मध्यप्रदेश: बैंक ऑफ बड़ौदा ब्लैक लिस्ट... सरकारी लेनदेन पर प्रतिबंध

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर सतना और मैहर सहित जिलेभर में सामूहिक योग कार्यक्रम आयोजित हुए। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, सामाजिक संगठनों और विद्यार्थियों ने भाग लेकर योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का संदेश दिया।
इंदौर में शुरू हुई डीजल की होम डिलीवरी सुविधा। व्हाट्सएप के जरिए ऑर्डर करें 200 लीटर तक डीजल। जानें कैसे काम करती है यह सुविधा और क्या हैं नियम।
सतना जिला अस्पताल में प्रसूता के गर्भस्थ शिशु की मौत पर परिजनों ने उपचार और सिजेरियन में देरी का आरोप लगाया है। घटना के बाद प्रसूति सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
रेलवे ने बिना टिकट यात्रा, धूम्रपान और महिला कोच में अनधिकृत प्रवेश सहित कई उल्लंघनों पर जुर्माना बढ़ा दिया है। वहीं पुणे-दानापुर अमृत भारत एक्सप्रेस 27 जून से सतना और मैहर होकर नियमित चलेगी।
सतना में आयोजित नीट यूजी री-एग्जाम कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न हुआ। फिजिक्स का पेपर कठिन रहा, जबकि एक छात्र केंद्र संबंधी गलत जानकारी के कारण परीक्षा से वंचित रह गया, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे।
मध्यप्रदेश में अपने लाजवाब स्वाद के लिए प्रसिद्ध रतलाम जिले की बालम ककड़ी और रतलामी गराडू को अब राष्ट्रीय के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल गई है। इन दोनों उत्पादों को जीआई टैग मिल गया है। गराडू को मालवी गराडू के नाम से यह मान्यता मिली है।
मध्यप्रदेश में अब दुकानों का डिजिटल सत्यापन होगा। सड़क किनारे से लेकर हॉकर्स कॉर्नर और बड़े भवनों में खान-पान की दुकानों की जियो टैगिंग होगी। उसके बाद ही खाद्य लाइसेंस मिलेगा। खाद्य एवं सुरक्षा ने नए नियम लागू किए हैं जिसकी शुरुआत राजधानी भोपाल में होने जा रही है। प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही दुकानदार को लाइसेंस मिल पाएगा।
मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के बैतूल राष्ट्रीय राजमार्ग पर टेमनी खुर्द के समीप आज भीषण सड़क हादसा हो गया। मजदूरों से भरी एक पिकअप वाहन की ट्रक से आमने-सामने टक्कर हो गई। जहां 5 लोगों की मौत हो गई और कई गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दावा किया जा रहा है कि मृतकों का आंकड़ा बढ़ सकता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कूनो नेशनल पार्क पहुँचकर चीता प्रोजेक्ट की प्रगति का जायजा लिया। भारत में अब 52 चीते हैं। राष्ट्रपति ने चीता कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का अवलोकन किया और अधिकारियों के साथ चर्चा की।
जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भाग लिया। उन्होंने युवाओं से जनजातीय समाज के विकास और भारतीय संस्कृति के संरक्षण का आह्वान किया।