मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने शहर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई 17 लोगों की मौत और बीमारी के मामले में तल्ख टिप्पणी करते हुए जिम्मेदारों को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने दो टूक शब्दों में कहा- देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा हो रहा, बहुत ही दुखद है।
मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर देशभर में सुर्खियां बटोर रहा है। इस बार चर्चा का मुख्य कारण बच्चों की मौत से जुड़ा है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आनन-फानन में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों से रिपोर्ट तलब की है।
भारत सरकार ने आज यानी बुधवार को बांग्लादेश के राजदूत को बुलाया। ये मुलाकात ढाका में भारतीय दूतावास को मिली धमकी के तुरंत बाद रखी गई। बांग्लादेश के राजदूत मोहम्मद रियाज हमीदुल्लाह दोपहर विदेश मंत्रालय पहुंचे।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने कांग्रेस सांसद सोनिया गांधी को नोटिस दिया है। यह नोटिस उस याचिका पर आया है, जिसमें दावा किया गया कि सोनिया गांधी का नाम 1980-81 की मतदाता सूची में गलत तरीके से जोड़ा गया था। अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी।
मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में अपनी सेवाएं दे रहे दैवेभो को लेकर राज्य सरकार सख्त फैसला लेने जा रही है। सरकार इस फैसले से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे युवाओं की उम्मीदें बढ़ गई हैं। विभाग ने 28 मार्च 2000 के बाद नियुक्त किए गए सभी दैवेभो की जानकारी 25 अक्टूबर तक अनिवार्य रूप से भेजने के निर्देश दिए हैं।
राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मध्य प्रदेश के 27 मदरसों में हिंदू बच्चों के धर्मांतरण के आरोपों पर संज्ञान लिया है। शिकायत में 556 बच्चों को निशाना बनाने का दावा किया गया है। आयोग ने स्कूल शिक्षा विभाग से 15 दिन में जवाब तलब किया है। साथ पूछा है कि मदरसों में हिंदू बच्चों को कैसे प्रवेश दिया जा रहा है।
मध्यप्रदेश में मुफ्त राशन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। खाद्य विभाग द्वारा कराई गई केवाईसी और बायोमेट्रिक जांच के बाद सामने आया कि 24 लाख लोग ऐसे थे, जो योजना के लिए पात्र नहीं थे, फिर भी सालों से फ्री राशन ले रहे थे। इन अपात्र लोगों को सूची से हटा दिया गया है। वहीं, 7.5 लाख नए हितग्राहियों का नाम जोड़ा गया है।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सागर जिले की देवरी नगर पालिका अध्यक्ष नेहा जैन को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके पद से हटाने के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा है कि अगली सुनवाई तक वे अपने पद पर बनी रहेंगी। जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने यह आदेश सुनाते हुए सरकार को चार सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने को कहा है।
मध्यप्रदेश सरकार योजनाओं के संचालन और विकास कार्यों के लिए कर्ज पर कर्ज ले रही है। वहीं जिम्मेदार अफसर-कर्मचारी अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहे हैं। आए दिन अफसरों और कर्मचारियों के करप्शन उजागर हो रहे हैं। राज्य सरकार जहां कर्ज के बोझ तले दबी जा रही है। मध्यप्रदेश में बजट से ज्यादा कर्ज हो गया है।






















