सतना में 95 प्रतिशत किताबें जिला स्तर तक पहुंचीं, लेकिन स्कूलों में केवल 70 प्रतिशत वितरण हुआ। हजारों विद्यार्थी अब भी पाठ्यपुस्तकों के इंतजार में हैं, जिससे नए शैक्षणिक सत्र की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
रीवा के सरकारी स्कूलों में नए सत्र के तीन महीने बाद भी विद्यार्थियों को पूरी किताबें नहीं मिलीं। हिंदी माध्यम की पुस्तकें अधूरी पहुंचीं, जबकि अंग्रेजी माध्यम के छात्र अब भी पुस्तकों का इंतजार कर रहे हैं।
सतना-मैहर में सांदीपनि विद्यालयों के नए भवनों का काम वर्षों से अधूरा, कहीं जमीन तो कहीं डिजाइन में अटका मामला।
सिवनी के हायर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों से कथित रूप से ‘अल्लाह हू अकबर’ के नारे लगवाने पर विवाद भड़का। अभिभावकों के विरोध के बाद प्रिंसिपल प्रतीक्षा मानगढ़े को हटाया गया और जिला शिक्षा अधिकारी ने मामले की जांच के निर्देश दिए।
भोपाल के टीटी नगर स्थित मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल ने एजुकेशन वर्ल्ड रैंकिंग 2025-26 में लगातार तीसरी बार मध्यप्रदेश के सर्वश्रेष्ठ सरकारी स्कूल का खिताब जीता। साइकोलॉजी लैब, स्टूडियो क्लास और बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने दिलाई यह ऐतिहासिक उपलब्धि।
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों पर भारी बोझ, 35 से अधिक ऑनलाइन एप और पोर्टल चलाने की जिम्मेदारी। शिक्षक पढ़ाने के बजाय पूरा दिन इन एप्स और पोर्टल्स में डाटा फीडिंग और रिपोर्टिंग में लगा देते हैं। इससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और स्कूलों में संकट गहरा रहा है।
इंदौर के सांवेर क्षेत्र में शासकीय सांदीपनी स्कूल की प्रिंसिपल मनीषा पहाड़िया को दो शिक्षकों से स्थाईकरण की फाइल के लिए रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त ने पकड़ा।
सतना जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को तीन माह बाद भी गणवेश की राशि नहीं मिली। शिक्षा विभाग की देरी से गरीब बच्चे फटे पुराने कपड़ों में स्कूल जाने को मजबूर हैं। 300 रुपये में एक जोड़ी ड्रेस पर भी सवाल उठ रहे हैं।
मऊगंज के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय सरदमन में जुलाई माह समाप्त होने के बाद भी कक्षा 6, 7 और 8 के बच्चों को अब तक किताबें नहीं मिल पाई हैं। शिक्षक मोबाइल में व्यस्त और क्लास खाली मिली। शिक्षा विभाग की लापरवाही से बच्चों की पढ़ाई ठप पड़ी है।
मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले के कई सरकारी स्कूल खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। बरसात के दिनों में बच्चों की जान खतरे में है, लेकिन ना मरम्मत हुई और ना ही वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई। दीवारों की दरारें, टपकती छत और बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में मासूम बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई कर रहे हैं। जिम्मेदार अधिकारी निरीक्षण तक नहीं कर रहे।






















