देशभर में एनसीईआरटी की किताब को लेकर मच बवाल के बीच अब सीबीएसई ने भी एक बड़ा ऐलान किया है। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन-2023) के तहत सीबीएसई अगले सत्र यानी कि 2027-28 से नया सीबीएसई थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी- 2026 लागू करने जा रही है।
By: Arvind Mishra
Feb 26, 20262:34 PM

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
देशभर में एनसीईआरटी की किताब को लेकर मच बवाल के बीच अब सीबीएसई ने भी एक बड़ा ऐलान किया है। दरअसल, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन-2023) के तहत सीबीएसई अगले सत्र यानी कि 2027-28 से नया सीबीएसई थर्ड लैंग्वेज पॉलिसी- 2026 लागू करने जा रही है। इस नियम के अनुसार अब कक्षा 6 से सभी छात्रों को दो भारतीय भाषाओं के साथ एक फॉरेन यानी विदेशी भाषा पढ़ना अनिवार्य कर दिया गया है। नए नियम के मुताबिक अंग्रेजी भाषा को थर्ड लैंग्वेज माना जाएगा। ऐसे में स्टूडेंट्स दो भारतीय भाषाओं के साथ इंग्लिश को फॉरेन लैंग्वेज के रूप के चुन सकेंगे। अगर कोई छात्र फ्रेंच, जर्मन या अन्य कोई विदेशी भाषा पढ़ता है तो उसके साथ भी दो भारतीय भाषाएं सीखना अनिवार्य होगा। सीबीएसई की ओर से कक्षा 6 से अगले ही सत्र यह नियम लागू हो जाएगा। इसके बाद वर्ष 2031 एक इसे 10वीं क्लास तक लागू करने का रोडमैप तैयार किया जा रहा है। ऐसे में सीबीएसई 2031 में थर्ड लैंग्वेज को बोर्ड परीक्षा में शामिल करेगा।
नई किताबें की जाएंगी तैयार
अगले सत्र से नया नियम लागू हो जाएगा ऐसे में सीबीएसई की ओर से तीसरी भाषा के लिए पाठ्यक्रम/ किताबें तैयार की जाएंगी। पहले सत्र से सीबीएसई तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, गुजराती और बांग्ला सहित 9 भाषाओं के लिए बुक्स तैयार करेगा। बात में अन्य भारतीय भाषाओं एवं विदेशी भाषाओं के लिए भी बुक्स तैयार की जाएंगी।
उद्देश्य: बहुभाषिकता और सांस्कृतिक जुड़ाव
एनसीएफएसई के अनुसार, कक्षा 6-8 (मिडिल स्टेज) में तीसरी भाषा को पर्याप्त समय दिया जाएगा ताकि छात्र उसमें बुनियादी संवाद कौशल विकसित कर सकें। दस्तावेज में कहा गया है कि तीसरी भाषा को आर-1 और आर-2 की तुलना में अधिक समय दिया जाएगा, क्योंकि यह छात्रों के लिए एक नई भाषा होगी। कक्षा 10 तक छात्रों में तीनों भाषाओं में सामाजिक संवाद की क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि आर-1 और आर-2 में शैक्षणिक दक्षता भी सुनिश्चित की जाएगी।
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