मध्यप्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल रहे किसानों के हित में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। किसानों को चिंता दूर हो जाएगी। अब समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 10 अप्रैल के बजाय 9 अप्रैल से शुरू होगी यानी एक दिन पहले से एमएसपी पर गेहूं खरीदा जाएगा।

किसानों के हित में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल रहे किसानों के हित में राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। किसानों को चिंता दूर हो जाएगी। अब समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीदी 10 अप्रैल के बजाय 9 अप्रैल से शुरू होगी यानी एक दिन पहले से एमएसपी पर गेहूं खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पंजीयन कराने वाले सभी किसानों से एमएसपी पर खरीदी की जाएगी और पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। मुख्यमंत्री ने निर्देष दिए कि गेहूं खरीदी में सबसे पहले छोटे और इसके बाद मध्यम किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके बाद बड़े किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा। दरअसल, प्रदेश नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि किसानों की सुविधा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा, आज से स्लॉट बुकिंग भी शुरू कर दी गई है और शुरूआत में छोटे और मध्यम किसानों से खरीदी की जाएगी।
19 लाख किसानों ने कराया पंजीयन
प्रदेश में गेहूं खरीदी के लिए राज्य सरकार चार बार तारीख बदल चुकी है। इसके पहले तय किया गया था कि प्रदेश के चार संभागों में गेहूं की खरीदी 10 अप्रैल से शुरू की जाएगी। समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों से इस साल 19 लाख 4 हजार 644 किसानों ने पंजीयन कराया है। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 4 लाख ज्यादा है। राज्य सरकार ने इस साल समर्थन मूल्य पर 78 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 2625 रुपए प्रति क्विंटल का लक्ष्य रखा गया है। इसमें 40 रुपए का बोनस भी शामिल है। गेहूं उपार्जन के बाद किसानों को फसल का दाम सीधे किसानों को खातों में भेजा जाएगा।
कांग्रेस लगातार बना रही मुद्दा
प्रदेश में बारदानों की कमी की वजह से गेहूं उपार्जन की तारीखों में लगातार बदलाव किया जा रहा था। गेहूं उपार्जन के लिए वारदानों की कमी को पूरा करने के लिए केन्द्र सरकार ने 50 हजार जूट की नई गांठ का अतिरिक्त आवंटन किया है। इसके अलावा पीपी बैग्स का उपयोग भी उपार्जन के लिए किया जाएगा। उधर कांग्रेस आरोप लगा रही है कि, राज्य सरकार समय पर बारदानों के लिए टेंडर ही जारी नहीं कर सकी, इस वजह से गेहूं खरीदी में देरी हुई। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अनाज व्यापारियों को फायदा पहुंचाने के लिए खरीदी में देरी की है।


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