मध्य प्रदेश के इंदौर में ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। तय कार्यक्रम के मुताबिक, 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी और इसके बाद 12 से 13 जून को मुख्य कृषि मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया जाएगा।

भारत पहले भी तीन सम्मेलनों की अध्यक्षता कर चुका
खाद्य सुरक्षा के साथ किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
हर नीति के केंद्र में छोटे किसान और उनकी समस्याएं
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के इंदौर में ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने जा रही है। तय कार्यक्रम के मुताबिक, 9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठकें होंगी और इसके बाद 12 से 13 जून को मुख्य कृषि मंत्रियों की बैठक का आयोजन किया जाएगा। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस बड़े आयोजन की विस्तृत रूपरेखा साझा की। गौरतलब है कि इस साल ब्रिक्स की अध्यक्षता भारत कर रहा है। भारत इससे पहले भी 2012, 2016 और 2021 में ब्रिक्स की अध्यक्षता कर चुका है, जिसके दौरान 2016 में ब्रिक्स कृषि अनुसंधान मंच जैसी पहल शुरू की गई थी। शिवराज ने कहा- खाद्य हानि और अपव्यय आज पूरी दुनिया के सामने एक गंभीर चुनौती है। हर वर्ष लगभग एक अरब टन से अधिक खाद्यान्न बर्बाद हो जाता है।फसल कटाई से लेकर भंडारण और तैयार भोजन तक, हर स्तर पर होने वाला यह अपव्यय न केवल चिंता का विषय है, बल्कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी लगभग 8 से 10 प्रतिशत तक योगदान देता है। इस बैठक में इस पर गंभीर चर्चा होगी कि खाद्य हानि और अपव्यय को कैसे कम किया जाए। मध्यप्रदेश के लिए यह अत्यंत गौरव और प्रसन्नता का विषय है कि इंदौर में ब्रिक्स देशों के एग्रीकल्चर वर्किंग ग्रुप एवं कृषि मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हो रही है।
ब्रिक्स समूह की चार प्रमुख प्राथमिकताएं
1. खाद्य सुरक्षा, पोषण-किसानों की आजीविका
2. कृषि व्यापार और आपसी सहयोग
3. जलवायु अनुकूल और सतत कृषि
4. नवाचार, अनुसंधान और साझेदारी
42 फीसदी खाद्य उत्पादन ब्रिक्स देशों के पास
केंद्रीय मंत्री शिवराज ने कहा- ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में हुई थी और आज 11 सदस्य देशों व 10 साझेदार देशों के साथ यह विश्व के सबसे प्रभावशाली समूहों में से एक बन गया है। वैश्विक नजरिए से यह समूह बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया की लगभग 42 फीसदी कृषि भूमि, 68 प्रतिशत कृषि और करीब 42 फीसदी खाद्य उत्पादन इन्हीं ब्रिक्स देशों के पास है।
अधिकारियों ने अब तक आठ बैठकें की
संवाददाताओं से चर्चा के दौरान शिवराज ने कहा कि अधिकारियों के समूह ने अब तक आठ बैठकें की हैं, जिनमें खाद्य सुरक्षा फिशरीज पशुपालन जैसे विषयों पर विमर्श हुआ है। हमारी हर नीति नवाचार के केंद्र में छोटे जोत वाले किसान रहे हैं, इनकी अपनी समस्याएं हैं। रिसर्च का लाभ इन्हें मिले बाजार तक इनकी पहुंच आसान हो। कृषि क्रेडिट का प्रवाह इनकी तरफ बढ़े। किसानों की आय रोजगार आजीविका और सतत कृषि विकास पर चर्चा होगी।
20 देशों के प्रतिनिधि होंगे शामिल
इंदौर में आयोजित हो रहा यह सम्मेलन इसलिए भी खास है क्योंकि पहली बार ब्रिक्स कृषि मंत्रियों की यह बैठक मंत्री स्तर पर आयोजित की जा रही है, जिसमें सदस्य और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होने जा रहे हैं । भारत की अध्यक्षता में अब तक कृषि कार्य समूह के अंतर्गत 4 सत्रों में 8 सफल बैठकें होंगी।
चार वर्गों पर मुख्य फोकस
छोटे और सीमांत किसान हमारी हर नीति और सहयोग के केंद्र में रहेंगे। कृषि विकास का वास्तविक अर्थ तभी सिद्ध होगा जब किसानों की आय बढ़ेगी और उनकी आजीविका सुरक्षित होगी। इस बार मुख्य रूप से चार विषयों-खाद्य सुरक्षा, पोषण एवं आजीविका, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु अनुकूलन एवं सतत कृषि, कृषि एवं खाद्य प्रणालियों में नवाचार व साझेदारी को सशक्त बनाने पर विशेष काम किया जा रहा है।
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