सतना नगर निगम को केंद्र सरकार के चार प्रमुख संस्थानों से 2.65 करोड़ रुपये से अधिक सर्विस टैक्स वसूलना बाकी है, लेकिन लगातार डिमांड भेजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा। वहीं राज्य सरकार के कार्यालयों को अभी तक टैक्स डिमांड नोट भी जारी नहीं किया गया है।

सतना, स्टार समाचार वेब
सम्पत्ति कर के बकाए के लिए आम जनता के घरों व संस्थानों में तालाबंदी करने वाले नगर निगम को केन्द्र के कार्यालयों से सर्विस टैक्स वसूलने में जहां पसीने छूट रहे हैं वहीं राज्य सरकार के संस्थानों को अभी तक डिमांड ही नहीं भेजी गई है। शहर में केन्द्र के चार संस्थानों से नगर निगम को दो करोड़ 65 लाख रुपए से ज्यादा का राजस्व वसूलना है। इसकी वसूली के लिए निगम द्वारा इन संस्थानों को 2012 से डिमांड तो भेजी है पर विभागों द्वारा इस दिशा में कोई रिस्पांस नहीं दिया जा रहा है। नगरीय क्षेत्र में लगभग 1500 के करीब शासकीय संस्थान हैं। जिन्हें नगर निगम सर्विस तो देता है पर उनसे सर्विस टैक्स (सेवा कर) के रूप में एक रुपए नहीं लेता है।
सबसे ज्यादा 1 करोड़ 67 लाख रेलवे का बकाया
नगर निगम ने फिलहाल शहर में स्थित केन्द्र के जिन चार संस्थानों को सर्विस टैक्स (सेवा प्रभार) की वसूली के लिए डिमांड भेजा है। उनमें सबसे ज्यादा वसूली नगर निगम को रेलवे से करनी है। निगम को रेलवे से 1 करोड़ 67 लाख रुपए वसूलना है। इसके बाद दूर संचार विभाग से 70 लाख 32 हजार 829 रुपए तथा पोस्ट आॅफिस से लगभग 16 लाख रुपए बकाया है। इसमें से दूर संचार विभाग की शहर में सिविल लाइन स्थित मुख्य कार्यालय के अलावा दो और कार्यालयों की यह राशि है।
राज्य के कार्यालयों को डिमांड तक नहीं
सुविधाओं के एवज में आम जनता के सम्पत्ति कर व शासकीय कार्यालयों से सेवा कर की वसूली का नियम है पर निगम का सारा ध्यान आम जनमानस से ही कर वसूली पर टिका है। राज्य सरकार के संस्थानों से सर्विस टैक्स के रूप में नगर निगम को एक ढेला नहीं मिलता है। हालांकि अब अपनी आय बढ़ाने के प्रति संजीदा नजर आ रहे नगर निगम ने फिलहाल अपने सभी पांचों जोन कार्यालयों के प्रमुखों को निर्देशित किया है कि उनके जोन में आने वाले सभी राज्य सरकार के संस्थानों का सर्वे कर उन्हें डिमांड नोट भेजें और उनसे सर्विस टैक्स (सेवा कर) की वसूली करें। यद्यपि निगम के जोन प्रमुखों ने अभी तक इस दिशा में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
राज्य के कार्यालयों को डिमांड तक नहीं
सुविधाओं के एवज में आम जनता के सम्पत्ति कर व शासकीय कार्यालयों से सेवा कर की वसूली का नियम है पर निगम का सारा ध्यान आम जनमानस से ही कर वसूली पर टिका है। राज्य सरकार के संस्थानों से सर्विस टैक्स के रूप में नगर निगम को एक ढेला नहीं मिलता है। हालांकि अब अपनी आय बढ़ाने के प्रति संजीदा नजर आ रहे नगर निगम ने फिलहाल अपने सभी पांचों जोन कार्यालयों के प्रमुखों को निर्देशित किया है कि उनके जोन में आने वाले सभी राज्य सरकार के संस्थानों का सर्वे कर उन्हें डिमांड नोट भेजें और उनसे सर्विस टैक्स (सेवा कर) की वसूली करें। यद्यपि निगम के जोन प्रमुखों ने अभी तक इस दिशा में कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है।
तीन तरह से लगता है सर्विस टैक्स
नगरीय क्षेत्र में आने वाले शासकीय संस्थानों में टैक्स वसूली की बात की जाए तो नगर निगम इन संस्थो का सर्वे कर उनके सम्पत्ति का आंकलन करता है। फिर उस पर जैसी सुविधा दी जाती है। उस सुविधा के हिसाब से सर्विस टैक्स (सेवा कर) लगाया जाता है। सेवा कर पूरे सम्पत्ति कर का 33, 50 और 75 प्रतिशत होता है। शासकीय संस्थानों पर शिक्षा कर समेत अन्य कर नहीं लगते हैं।
80 हजार से ज्यादा सम्पत्तियां, 28 करोड़ करना है वसूल
नगरीय क्षेत्र में 80 हजार 318 सम्पत्तियां दर्ज हैं। जिसमें से 6000 सम्पत्तियां व्यवसायिक हैं। बीस हजार के करीब आवासीय और व्यवसायिक दोनों हैं। इसके बाद बची सभी सम्पत्तियां आवासीय हैं। नगर निगम सूत्रों के मुताबिक मौजूदा वित्तीय वर्ष में निगम को सम्पत्ति कर के रूप में 28 करोड़ 79 लाख रुपए वसूलने का लक्ष्य मिला है।
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