मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने आईपीएस कैडर रिव्यू में देरी पर CAT का आदेश बरकरार रखते हुए केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर दी है।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र सरकार की उस याचिका को प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दिया, जिसमें केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जबलपुर के आदेश को चुनौती दी गई थी। यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश में राज्य पुलिस सेवा (State Police Service) के अधिकारियों के बहुप्रतीक्षित आईपीएस (IPS) कैडर रिव्यू में कथित देरी से जुड़ा हुआ है। हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने से CAT का पुराना आदेश पूरी तरह प्रभावी हो गया है, जिससे राज्य के पात्र अधिकारियों के लिए भारतीय पुलिस सेवा में पदोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।
यह कानूनी लड़ाई 'मध्य प्रदेश पुलिस एसोसिएशन' द्वारा दायर किए गए मूल आवेदन से शुरू हुई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए CAT, जबलपुर ने 9 जनवरी 2026 को एक अहम आदेश जारी किया था। इस आदेश में केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिए गए थे कि वे अतिरिक्त आईपीएस कैडर रिव्यू की पूरी प्रक्रिया को तय मानकों के तहत जल्द से जल्द पूरा करें।
अधिकरण ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 120 दिन की सख्त समय-सीमा निर्धारित की थी। एसोसिएशन का पक्ष था कि यदि समय पर कैडर रिव्यू नहीं होता है, तो इससे योग्य अधिकारियों के करियर की प्रगति बाधित होती है।
CAT के इस आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
केंद्र सरकार की दलील:
केंद्र की ओर से कोर्ट में तर्क दिया गया कि कैडर रिव्यू की प्रक्रिया समय-समय पर और नियमानुसार लगातार की जाती रही है। सरकार का दावा था कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की अनावश्यक या जानबूझकर देरी नहीं की गई है।
हाईकोर्ट का रुख:
जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने केंद्र सरकार की इन दलीलों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल यह दावा कर देना पर्याप्त नहीं है कि प्रक्रिया किसी समय पर हुई थी, बल्कि नियमों के अनुरूप समय-बद्ध तरीके से पुनरीक्षण होना अनिवार्य है।
सुनवाई के दौरान राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों की ओर से प्रमुखता से यह पक्ष रखा गया कि IPS (Cadre) Rules, 1954 के प्रावधानों के अनुसार कैडर रिव्यू समयबद्ध तरीके से होना कानूनी रूप से जरूरी है।
लंबे समय तक कैडर रिव्यू में देरी होने का सीधा और नकारात्मक प्रभाव राज्य पुलिस सेवा के पात्र अधिकारियों के आईपीएस में इंडक्शन (संविलियन/पदोन्नति) के अवसरों पर पड़ता है।
समय पर रिव्यू न होने से अधिकारियों की वरिष्ठता (Seniority) और भविष्य की संभावनाओं पर प्रतिकूल असर पड़ता है।
इस मामले में मध्य प्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे और अक्षय खंडेलवाल ने पैरवी करते हुए केंद्र सरकार के तर्कों का पुरजोर विरोध किया।
डिवीजन बेंच द्वारा केंद्र सरकार की याचिका को खारिज किए जाने के बाद अब CAT, जबलपुर का 9 जनवरी 2026 का आदेश पूरी तरह से प्रभावी हो गया है। इस निर्णय से केंद्र और राज्य सरकार दोनों के लिए अतिरिक्त कैडर रिव्यू की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का कानूनी रास्ता साफ हो गया है। मध्य प्रदेश राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए यह फैसला बेहद राहत भरा माना जा रहा है, क्योंकि इससे उन्हें समय पर उनकी पात्रता के अनुसार आईपीएस कैडर में पदोन्नति मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

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